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Auraiya News: ट्रॉमा सेंटर और बर्न यूनिट का सपना अधूरा...जड़ा ताला

Thu, 25 Dec 2025 12:25 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Thu, 25 Dec 2025 12:25 AM IST
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The dream of trauma center and burn unit remains unfulfilled...locked
फोटो-18 - चिचौली मेडिकल कॉलेज कैंपस में बनी खड़ी बर्न यूनिट। संवाद
औरैया। जिले में 2025 स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के मामले में कुछ खास प्रगति नहीं कर सका। गंभीर मरीजों के लिए जिले को मेडिकल कॉलेज में मात्र 20 बेड की इमरजेंसी ही नसीब हो सकी।
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ट्रॉमा सेंटर से लेकर बर्न यूनिट का सपना इस साल भी अधूरा ही रहा। इन दोनों सपनों को पूरा करने के लिए स्वास्थ्य महकमा सिर्फ पत्राचार तक ही सीमित रहा। शासन में चिट्ठी भेजे जाने के बाद भी ट्रॉमा सेंटर व बर्न यूनिट पर ताला जड़ा हुआ है।
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साल 2019 में जिले को ट्रॉमा सेंटर की सौगात दी गई थी। हाईवे किनारे भगौतीपुर में जमीन चिह्नित करते हुए 2.64 करोड़ की लागत से भवन बनाया गया था। छह जनवरी 2021 को सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भवन का वर्चुअल लोकार्पण भी किया था।
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पिछले चार सालों से यहां पर न तो जरूरी स्टाफ की तैनाती की जा सकी है और न ही संसाधनों का इंतजाम हो सका है। साल 2025 भी अब जा रहा है। हालात यह हैं कि बनाए गए भवन में अब झाड़ियां उगने लगी हैं।

बर्न यूनिट के जख्मों पर नहीं लगा मरहम
साल 2015 में करीब एक करोड़ की लागत से चिचौली 100 शैया जिला अस्पताल में वातानुकूलित प्लास्टिक सर्जरी व बर्न यूनिट बनाई गई थी। यहां संसाधन भी जुटाए गए थे। उम्मीद जगी थी कि आग से झुलसने वाले मरीजों को यहां बेहतर उपचार मिल सकेगा। साथ ही सर्जरी भी आसानी से हो सकेगी, लेकिन यहां पर जरूरी डॉक्टर व स्टाफ की तैनाती नहीं हो सकी है। यूनिट के भवन पर अभी भी ताला लटका हुआ है। देखरेख के अभाव में बिल्डिंग भी जर्जर होने लगी है। फिलहाल यह बिल्डिंग अब मेडिकल कॉलेज के अधीन है। 10 साल बाद भी बर्न यूनिट सपना बनकर भवन तक सीमित है। स्वास्थ्य सुविधा लोगों को नहीं मिल पा रही है।
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रोज सैफई व कानपुर रेफर होते 30 से ज्यादा मरीज
सड़क हादसों से लेकर हर दिन मामले सामने आते हैं। आग लगने की घटनाएं भी होती है। हादसों में घायल मरीजों को सीएचसी में उपचार के बाद जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। यहां पर भी गंभीर मरीजों के लिए पर्याप्त उपचार की सुविधा नहीं होती है। ऐसे में यहां से मरीजों को सैफई व कानपुर हायर सेंटर रेफर किया जाता है।
जिला अस्पताल में जहां औसतन 10 मरीज रेफर होते हैं, वहीं मेडिकल कॉलेज में यह आंकड़ा बढ़कर 20 हो जाता है। ऐसे में हर रोज तकरीबन 30 मरीज रेफर हो रहे हैं।

ट्रॉमा सेंटर

- 2.64 करोड़ की लागत से साल 2019 में शुरू हुआ था भवन निर्माण
- 2021 में भवन बनकर हुआ तैयार

- छह जनवरी 2021 को मुख्यमंत्री ने किया था वर्चुअल लोकार्पण
- 2024 में ट्रॉमा सेंटर में स्टाफ की तैनाती को लेकर 50 कर्मियों को मिली थी स्वीकृति

पत्राचार किया गया
बर्न यूनिट के संचालन को लेकर स्टाफ की तैनाती के लिए शासन में पत्राचार किया गया है। जरूरी संसाधन पूरे हो जाने के बाद बर्न यूनिट का संचालन शुरू कराया जाएगा।-डॉ. मुकेश वीर सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज


संसाधन जुटाए जाएंगे
ट्रॉमा सेंटर के संचालन को लेकर स्टाफ में 50 की तैनाती होनी है। यह काम पूरा हो जाने के बाद कुछ संसाधन जुटाए जाएंगे। इनके पूरे होने के बाद ट्रॉमा का संचालन शुरू हो जाएगा।- डॉ. सुरेंद्र कुमार, सीएमओ

फोटो-18 - चिचौली मेडिकल कॉलेज कैंपस में बनी खड़ी बर्न यूनिट। संवाद

फोटो-18 - चिचौली मेडिकल कॉलेज कैंपस में बनी खड़ी बर्न यूनिट। संवाद

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