{"_id":"68ae04e297524f45b6018da8","slug":"even-though-there-is-no-playground-children-are-bringing-medals-auraiya-news-c-211-1-aur1006-130627-2025-08-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: खेल का मैदान न होने पर भी बच्चे ला रहे मेडल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: खेल का मैदान न होने पर भी बच्चे ला रहे मेडल
Wed, 27 Aug 2025 12:32 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Wed, 27 Aug 2025 12:32 AM IST
विज्ञापन
फोटो-26एयूआरपी 05-स्कूल के हॉल में टेबल टेनिस खेलते बच्चे। संवाद
औरैया। राजकीय विद्यालय बिझाई के बच्चे संसाधनों की कमी में भी अपनी मेधा का लोहा मनवा रहे हैं। बच्चे नेशनल प्रतियोगिताएं खेलकर मेडल भी जीत रहे हैं।
विद्यालय के पास खेल का मैदान भी नहीं है, लेकिन बच्चों की लगन और हौसले के आगे सारे अभाव घुटने टेक रहे हैं। जूनियर स्तर की पढ़ाई के बाद यहां के इलाके बच्चों को माध्यमिक शिक्षा मिले इसके लिए बिझाई में राजकीय हाईस्कूल की स्थापना की गई थी।
यहां पर यह विद्यालय पढ़ाई के साथ ही खेलों में भी अपना दबदबा बनाए हुए हैं। विद्यालय में केवल दो ही कक्षाएं चलती हैं। इनमें कक्षा नौ व 10 शामिल हैं। यहां पर मौजूदा वक्त में 142 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।
यहां के सहायक अध्यापक भूपदीप सिंह हैं। खोखो व एथलेटिक्स में उन्होंने खुद भी नेशनल के तमगे भी जीते हैं। बीपीएड के बाद उनकी पहली तैनाती उत्तराखंड में हुई थी। इसके बाद वह राजकीय हाईस्कूल बिझाई आ गए। यहां उन्होंने बच्चों की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें तराशना शुरू किया।
विज्ञापन
वर्ष 2018 में उन्होंने विद्यालय की टीम को कबड्डी में उतारा था। कबड्डी प्रतियोगिता में शामिल तीन खिलाड़ियों ने स्टेट और धरमाई पुरवा निवासी रश्मि ने राष्ट्रीय स्तर पर कबड्डी खेलकर मेडल भी पाया था।
इसके बाद यहां के बच्चे खोखो, कबड्डी, टेबल टेनिस में बाजी मार रहे हैं। 100 बच्चे खेलों की प्रैक्टिस करते हैं। दोपहर दो बजे तक कक्षा में पढ़ते हैं। इसके बाद पीटीआई भूपदीप की सीटी बजते ही स्कूल परिसर में आ जाते हैं। इसके बाद फिर उनके खेलों की प्रैक्टिस शुरू हो जाती है।
अगले माह चार बच्चे एथलेटिक्स में स्टेट खेलने जा रहे हैं। वर्ष 2019-20 में जिलास्तर, मंडल व स्टेट में 43 मेडल जीत चुके हैं। 2022-23 में 38, 2023-24 में 49 व 2024-25 में 56 मेडल जीत चुके हैं। शिक्षक भूपदीप सिंह ने बताया कि खेलों में रुचि के अनुसार बच्चों को तैयार किया जा रहा है। बच्चे मेडल भी ला रहे हैं।
बिझाई राजकीय स्कूल के बच्चे खेल में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। वहां पर खेलों को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। जो भी जरूरतें है। उन्हें पूरा कराया जाएगा।
-प्रदीप मौर्या, डीआईओएस
विज्ञापन
विद्यालय के पास खेल का मैदान भी नहीं है, लेकिन बच्चों की लगन और हौसले के आगे सारे अभाव घुटने टेक रहे हैं। जूनियर स्तर की पढ़ाई के बाद यहां के इलाके बच्चों को माध्यमिक शिक्षा मिले इसके लिए बिझाई में राजकीय हाईस्कूल की स्थापना की गई थी।
यहां पर यह विद्यालय पढ़ाई के साथ ही खेलों में भी अपना दबदबा बनाए हुए हैं। विद्यालय में केवल दो ही कक्षाएं चलती हैं। इनमें कक्षा नौ व 10 शामिल हैं। यहां पर मौजूदा वक्त में 142 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।
विज्ञापन
यहां के सहायक अध्यापक भूपदीप सिंह हैं। खोखो व एथलेटिक्स में उन्होंने खुद भी नेशनल के तमगे भी जीते हैं। बीपीएड के बाद उनकी पहली तैनाती उत्तराखंड में हुई थी। इसके बाद वह राजकीय हाईस्कूल बिझाई आ गए। यहां उन्होंने बच्चों की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें तराशना शुरू किया।
विज्ञापन
वर्ष 2018 में उन्होंने विद्यालय की टीम को कबड्डी में उतारा था। कबड्डी प्रतियोगिता में शामिल तीन खिलाड़ियों ने स्टेट और धरमाई पुरवा निवासी रश्मि ने राष्ट्रीय स्तर पर कबड्डी खेलकर मेडल भी पाया था।
इसके बाद यहां के बच्चे खोखो, कबड्डी, टेबल टेनिस में बाजी मार रहे हैं। 100 बच्चे खेलों की प्रैक्टिस करते हैं। दोपहर दो बजे तक कक्षा में पढ़ते हैं। इसके बाद पीटीआई भूपदीप की सीटी बजते ही स्कूल परिसर में आ जाते हैं। इसके बाद फिर उनके खेलों की प्रैक्टिस शुरू हो जाती है।
अगले माह चार बच्चे एथलेटिक्स में स्टेट खेलने जा रहे हैं। वर्ष 2019-20 में जिलास्तर, मंडल व स्टेट में 43 मेडल जीत चुके हैं। 2022-23 में 38, 2023-24 में 49 व 2024-25 में 56 मेडल जीत चुके हैं। शिक्षक भूपदीप सिंह ने बताया कि खेलों में रुचि के अनुसार बच्चों को तैयार किया जा रहा है। बच्चे मेडल भी ला रहे हैं।
बिझाई राजकीय स्कूल के बच्चे खेल में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। वहां पर खेलों को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। जो भी जरूरतें है। उन्हें पूरा कराया जाएगा।
-प्रदीप मौर्या, डीआईओएस