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प्रधानमंत्री शहरी आवास में अपात्रों को बनाया पात्र
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औरैया। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री शहरी गरीब आवास योजना का औरैया शहर में पूरी तरह से मखौल बनाकर रख दिया गया है। डूडा विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई सूची की जांच के उपरांत तैयार की गई पात्रों की सूची में तहसील प्रशासन ने भी पूरी लापरवाही और अनदेखी बरती है। जिसके चलते पात्रों केे हक पर अपात्रों का डाका पड़ रहा है।
पिछले दिनों डूडा कार्यालय की ओर से प्रधानमंत्री शहरी गरीब आवास योजना में पात्रों का चयन करके एक सूची तैयार कर तहसील प्रशासन को सौंपी गई थी। जिसमें सूची मिलने के बाद एसडीएम सदर अनुपम शुक्ला के आदेश पर लेखपालों द्वारा उसकी क्रास चेकिंग कराई गई। इसमें लेखपालों ने 156 पात्रों के नाम सूचीबद्ध किए। इस सूची में दर्ज पात्रों की जब पड़ताल की गई तो पात्रता की पोल खुलकर सामने आ गई। पूरी सूची में शामिल पात्रों में आठ पात्र ऐसे पाए गए हैं जिनके पास जमीन का कोई कागज ही नहीं है। एक पात्र तो ऐसा मिला, जिसके खुद के नाम पक्का मकान होने के बाद भी लेखपालों ने उसकी आवेदक को सूची में शामिल कर पात्र बना दिया।
इससे शहर में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना की पूरी तरह से हवा निकलती दिखाई दे रही है। इस संबंध में जब पालिका प्रशासन से बात की गई तो ईओ पालिका सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि उक्त 156 पात्रों की सूची के फार्म उनके पास आए ही नहीं। ऐसे में वह इस संबंध में कुछ भी नहीं बता सकते। अहम बात यह है कि इस लापरवाही बरतने वालों को लेकर जब एसडीएम सदर से पूछा गया तो वह सिर्फ दोबारा शासनादेश के तहत जांच कराने की बात कहकर पल्ला झाड़ते नजर आए। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या पूर्व में की गई जांच शासनादेश के तहत नहीं की गई थी।
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‘संपूर्ण समाधान दिवस में आज लगभग 80 शिकायतें इसी से संबंधित आईं हैं। जिसमें व्यक्ति ने अपने को पात्र होते हुए भी अपात्र बनाने की बात कही है। ज्यादातर शिकायतें फफूंद क्षेत्र से आईं हैं। शहर में अगर ऐसी कोई शिकायत है तो उसकी पुन: शासनादेश के तहत जांच कराई जाएगी। अपात्र पाए जाने पर तत्काल उनकी पात्रता निरस्त की जाएगी।’
-अनुपम शुक्ला, एसडीएम सदर
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पिछले दिनों डूडा कार्यालय की ओर से प्रधानमंत्री शहरी गरीब आवास योजना में पात्रों का चयन करके एक सूची तैयार कर तहसील प्रशासन को सौंपी गई थी। जिसमें सूची मिलने के बाद एसडीएम सदर अनुपम शुक्ला के आदेश पर लेखपालों द्वारा उसकी क्रास चेकिंग कराई गई। इसमें लेखपालों ने 156 पात्रों के नाम सूचीबद्ध किए। इस सूची में दर्ज पात्रों की जब पड़ताल की गई तो पात्रता की पोल खुलकर सामने आ गई। पूरी सूची में शामिल पात्रों में आठ पात्र ऐसे पाए गए हैं जिनके पास जमीन का कोई कागज ही नहीं है। एक पात्र तो ऐसा मिला, जिसके खुद के नाम पक्का मकान होने के बाद भी लेखपालों ने उसकी आवेदक को सूची में शामिल कर पात्र बना दिया।
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इससे शहर में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना की पूरी तरह से हवा निकलती दिखाई दे रही है। इस संबंध में जब पालिका प्रशासन से बात की गई तो ईओ पालिका सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि उक्त 156 पात्रों की सूची के फार्म उनके पास आए ही नहीं। ऐसे में वह इस संबंध में कुछ भी नहीं बता सकते। अहम बात यह है कि इस लापरवाही बरतने वालों को लेकर जब एसडीएम सदर से पूछा गया तो वह सिर्फ दोबारा शासनादेश के तहत जांच कराने की बात कहकर पल्ला झाड़ते नजर आए। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या पूर्व में की गई जांच शासनादेश के तहत नहीं की गई थी।
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‘संपूर्ण समाधान दिवस में आज लगभग 80 शिकायतें इसी से संबंधित आईं हैं। जिसमें व्यक्ति ने अपने को पात्र होते हुए भी अपात्र बनाने की बात कही है। ज्यादातर शिकायतें फफूंद क्षेत्र से आईं हैं। शहर में अगर ऐसी कोई शिकायत है तो उसकी पुन: शासनादेश के तहत जांच कराई जाएगी। अपात्र पाए जाने पर तत्काल उनकी पात्रता निरस्त की जाएगी।’
-अनुपम शुक्ला, एसडीएम सदर