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औरैयाः स्वास्थ्य केंद्रों पर सीबीसी जांच नहीं, मरीज परेशान
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बिधूना सीएचसी में बंद पड़ी सीबीसी मशीन। संवाद
- फोटो : AURAIYA
औरैया। जिले के सात सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर करीब 50 लाख रुपये खर्च कर एक-एक सीबीसी मशीन भेजी गई थी। इन मशीनों को भेजने का उद्देश्य था कि यहां आने वाले मरीजों की सीबीसी जांच हो और समय से इलाज मिल सके। करीब चार माह बीतने के बाद भी स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच की सुविधा नहीं मिल सकी। इधर, बारिश के बाद बुखार, टायफायड के मरीज बढ़ने के बाद लोगों को जांच के अभाव में कराहना पड़ रहा है। वहीं डॉक्टर भी मजबूरी बता किनारा कर रहे हैं।
बारिश के बाद अस्पतालों में बुखार, टायफायड के साथ ही उल्टी दस्त के मरीज बढ़े हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, किसी भी मर्ज का इलाज कराने से पहले जांच जरूरी होती है। बुखार व टायफायड के लक्षण मिलने वाले मरीजों को सीबीसी की जांच करानी होती है, लेकिन अस्पतालों में मशीनें काम न करने के कारण यह जांच नहीं हो पा रही है। यही कारण है कि बिना जांच के डॉक्टर भी दवा नहीं दे रहे हैं। जो लोग बाहर से जांच करा लाए उन्हें पर्चे पर दवा लिखी जा रही है। इसके अलावा अन्य मरीजों को वापस किया जा रहा है।
इन अस्पतालों में दी गई सुविधा
स्वास्थ्य विभाग द्वारा अछल्दा, सहार, अजीतमल, दिबियापुर, बिधूना, अयाना, ऐरवाकटरा स्वास्थ्य केंद्रों पर सीबीसी मशीन मार्च माह में दी गई थी। तब से यह मशीनें शोपीस बनी पड़ी है। कुछ जगहों पर मशीनें स्टाल नहीं हो सकी तो कुछ जगहों पर तकनीकी खामियां है। बिधूना में प्रिंटर खराब होने से जांच रिपोर्ट नहीं निकल रही है। प्रभारी चिकित्साधिकारी व डॉक्टर भी इसी का बहाना बना कर बाहर से जांच करा रहे हैं। इसके लिए कई बार आपूर्ति करने वाली संस्था मैरिल को भी पत्र लिखे जा चुके हैं।
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मरीजों की बात
बिधूना सीएचसी पर पहुंचे रठगांव निवासी रोहित ने बताया कि कई दिन से बीमार होने पर गुरुवार को जब दवा लेने अस्पताल आए तो डॉक्टर ने पर्चे पर सीबीसी जांच कराने की बात लिखी। पैथोलॉजी पहुंचने पर पता चला मशीन ठीक से काम नहीं कर रही है, इसलिए बाहर से जांच कराई पड़ी।
ऐरवाकटरा स्वास्थ्य केंद्र पर गुरुवार दवा लेने आई बेलझाली निवासी गीता देवी ने बताया कि उन्हें दो दिन से बुखार आ रहा है। डॉक्टर ने सीबीसी की जांच लिखी, लेकिन अस्पताल में जांच न होने पर उनसे बाहर से जांच कराने के लिए कहा गया, इसलिए पूरी दवाइयां भी नहीं लिखी गईं।
अछल्दा स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे चांदपुरा गढिय़ा निवासी आनंद सिंह ने बताया कि बुखार आने पर कमजोरी महसूस हो रही थी। चिकित्सक ने प्लेटलेट्स की जांच कराने के लिए कहा, अस्पताल आए तो पता चला कि जांच नहीं हो रही है। इस पर वह बिना जांच के लौट गए।
पुर्वा मकू निवासी रवींद्र कुमार ने बताया कि कई दिन से बुखार आने पर वह जांच व दवा लेने के लिए गुरुवार को अछल्दा अस्पताल पहुंचे। यहां पर आने पर पता चला कि जांच कराने के बाद ही दवा लिखी जाएगी। पर्चे पर एक डाक्टर ने बाहर से जांच कराने के लिए कहा, शुक्रवार को जांच रिपोर्ट मिलेगी, तब वह दिखाने जाएंगे।
सीएमओ डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य केंद्रों पर जो मशीनें भेजी गई उनकी देखरेख कर संचालन कराने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों की है। यदि मशीन में कोई खराबी है तो उन्हें टोल फ्री नंबर पर फोन कर खामियां दूर कराने के लिए बात करनी चाहिए। फिर जहां जो समस्याएं हैं, उसकी जानकारी कर जल्द खामियां दूर कराई जाएंगी और सभी की सीबीसी जांच होगी।
गोद लेने के बाद जिम्मेदारी भूल गए जनप्रतिनिधि
प्रदेश सरकार ने अस्पतालों की व्यवस्था सुधार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जनप्रतिनिधियों को अस्पताल गोद लेने के निर्देश दिए थे। बिधूना अस्पताल को पूर्व विधायक विनय शाक्य, सहार को कन्नौज सांसद सुब्रत पाठक, ऐरवाकटरा को राज्यसभा सांसद गीता शाक्य, अजीतमल को ब्लाक प्रमुख रजनीश शुक्ला, दिबियापुर को पूर्व कृषि राज्यमंत्री लाखन सिंह राजपूत ने गोद ले रखा है। इसके बाद भी यह लोग अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़े हैं। यही कारण है कि जिम्मेदार भी व्यवस्था सुधार में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाते और मरीजों को परेशान होना पड़ता है।
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बारिश के बाद अस्पतालों में बुखार, टायफायड के साथ ही उल्टी दस्त के मरीज बढ़े हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, किसी भी मर्ज का इलाज कराने से पहले जांच जरूरी होती है। बुखार व टायफायड के लक्षण मिलने वाले मरीजों को सीबीसी की जांच करानी होती है, लेकिन अस्पतालों में मशीनें काम न करने के कारण यह जांच नहीं हो पा रही है। यही कारण है कि बिना जांच के डॉक्टर भी दवा नहीं दे रहे हैं। जो लोग बाहर से जांच करा लाए उन्हें पर्चे पर दवा लिखी जा रही है। इसके अलावा अन्य मरीजों को वापस किया जा रहा है।
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इन अस्पतालों में दी गई सुविधा
स्वास्थ्य विभाग द्वारा अछल्दा, सहार, अजीतमल, दिबियापुर, बिधूना, अयाना, ऐरवाकटरा स्वास्थ्य केंद्रों पर सीबीसी मशीन मार्च माह में दी गई थी। तब से यह मशीनें शोपीस बनी पड़ी है। कुछ जगहों पर मशीनें स्टाल नहीं हो सकी तो कुछ जगहों पर तकनीकी खामियां है। बिधूना में प्रिंटर खराब होने से जांच रिपोर्ट नहीं निकल रही है। प्रभारी चिकित्साधिकारी व डॉक्टर भी इसी का बहाना बना कर बाहर से जांच करा रहे हैं। इसके लिए कई बार आपूर्ति करने वाली संस्था मैरिल को भी पत्र लिखे जा चुके हैं।
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मरीजों की बात
बिधूना सीएचसी पर पहुंचे रठगांव निवासी रोहित ने बताया कि कई दिन से बीमार होने पर गुरुवार को जब दवा लेने अस्पताल आए तो डॉक्टर ने पर्चे पर सीबीसी जांच कराने की बात लिखी। पैथोलॉजी पहुंचने पर पता चला मशीन ठीक से काम नहीं कर रही है, इसलिए बाहर से जांच कराई पड़ी।
ऐरवाकटरा स्वास्थ्य केंद्र पर गुरुवार दवा लेने आई बेलझाली निवासी गीता देवी ने बताया कि उन्हें दो दिन से बुखार आ रहा है। डॉक्टर ने सीबीसी की जांच लिखी, लेकिन अस्पताल में जांच न होने पर उनसे बाहर से जांच कराने के लिए कहा गया, इसलिए पूरी दवाइयां भी नहीं लिखी गईं।
अछल्दा स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे चांदपुरा गढिय़ा निवासी आनंद सिंह ने बताया कि बुखार आने पर कमजोरी महसूस हो रही थी। चिकित्सक ने प्लेटलेट्स की जांच कराने के लिए कहा, अस्पताल आए तो पता चला कि जांच नहीं हो रही है। इस पर वह बिना जांच के लौट गए।
पुर्वा मकू निवासी रवींद्र कुमार ने बताया कि कई दिन से बुखार आने पर वह जांच व दवा लेने के लिए गुरुवार को अछल्दा अस्पताल पहुंचे। यहां पर आने पर पता चला कि जांच कराने के बाद ही दवा लिखी जाएगी। पर्चे पर एक डाक्टर ने बाहर से जांच कराने के लिए कहा, शुक्रवार को जांच रिपोर्ट मिलेगी, तब वह दिखाने जाएंगे।
सीएमओ डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य केंद्रों पर जो मशीनें भेजी गई उनकी देखरेख कर संचालन कराने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों की है। यदि मशीन में कोई खराबी है तो उन्हें टोल फ्री नंबर पर फोन कर खामियां दूर कराने के लिए बात करनी चाहिए। फिर जहां जो समस्याएं हैं, उसकी जानकारी कर जल्द खामियां दूर कराई जाएंगी और सभी की सीबीसी जांच होगी।
गोद लेने के बाद जिम्मेदारी भूल गए जनप्रतिनिधि
प्रदेश सरकार ने अस्पतालों की व्यवस्था सुधार और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जनप्रतिनिधियों को अस्पताल गोद लेने के निर्देश दिए थे। बिधूना अस्पताल को पूर्व विधायक विनय शाक्य, सहार को कन्नौज सांसद सुब्रत पाठक, ऐरवाकटरा को राज्यसभा सांसद गीता शाक्य, अजीतमल को ब्लाक प्रमुख रजनीश शुक्ला, दिबियापुर को पूर्व कृषि राज्यमंत्री लाखन सिंह राजपूत ने गोद ले रखा है। इसके बाद भी यह लोग अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़े हैं। यही कारण है कि जिम्मेदार भी व्यवस्था सुधार में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाते और मरीजों को परेशान होना पड़ता है।

ऐरवाकटरा अस्पताल में बंद पैथालॉजी कक्ष। संवाद- फोटो : AURAIYA

रोहित- फोटो : AURAIYA

ऐरवाकटरा अस्पताल में भर्ती बुखार से पीड़ित मरीज। संवाद- फोटो : AURAIYA

गीता देवी- फोटो : AURAIYA

रवींद्र कुमार- फोटो : AURAIYA

आनंद सिंह- फोटो : AURAIYA