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Auraiya News: टेलीस्कोप में दिखा शनि का अद्भुत नजारा
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दिबियापुर। ध्रुव तारा साइंस सेंटर, विकास कुंज में रविवार रात विज्ञान प्रेमियों, बच्चों और अभिभावकों ने टेलीस्कोप के माध्यम से शनि ग्रह का अद्भुत नजारा देखा। परिवारों के साथ पहुंचे बच्चे सौरमंडल के इस सुंदर ग्रह को प्रत्यक्ष देखकर रोमांचित हुए।
चार अक्तूबर को शनि अपनी वार्षिक प्रतियुति की स्थिति में था। इस दौरान पृथ्वी, सूर्य और शनि लगभग एक सीधी रेखा में होते हैं और पृथ्वी सूर्य व शनि के बीच आ जाती है। इसके चलते शनि वर्षभर में अधिक चमकीला और पृथ्वी के अपेक्षाकृत निकट दिखाई देता है। इसी कारण उसके प्रसिद्ध वलय भी अधिक स्पष्ट नजर आते हैं। शनि को सूर्यास्त के बाद पूर्व दिशा में उदित होकर पूरी रात देखा जा सकता है।
ध्रुव तारा साइंस सेंटर के संस्थापक व राष्ट्रपति पदक प्राप्त शिक्षक मनीष कुमार ने बताया कि शनि लगभग 378 दिनों के अंतराल पर प्रतियुति की स्थिति में आता है। अगला अनुकूल अवसर 18 अक्तूबर 2027 के आसपास आएगा। कार्यक्रम में बच्चों को बताया गया कि शनि सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है। उसके चारों ओर बर्फ और धूल से बने विशाल वलय हैं। उसके 80 से अधिक उपग्रह हैं और सबसे बड़ा चंद्रमा टाइटन पृथ्वी के चंद्रमा से भी बड़ा है। शनि को सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में करीब 29.5 वर्ष लगते हैं।
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जिला विज्ञान क्लब के समन्वयक मोहित सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जिज्ञासा विकसित करते हैं। शिक्षक अनिल कुमार बाथम, अर्पित यादव और संदीप गुप्ता ने कहा कि जब बच्चे मोबाइल स्क्रीन से बाहर निकलकर स्वयं ग्रहों को देखते हैं तो विज्ञान उनके लिए जीवंत अनुभव बन जाता है।
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चार अक्तूबर को शनि अपनी वार्षिक प्रतियुति की स्थिति में था। इस दौरान पृथ्वी, सूर्य और शनि लगभग एक सीधी रेखा में होते हैं और पृथ्वी सूर्य व शनि के बीच आ जाती है। इसके चलते शनि वर्षभर में अधिक चमकीला और पृथ्वी के अपेक्षाकृत निकट दिखाई देता है। इसी कारण उसके प्रसिद्ध वलय भी अधिक स्पष्ट नजर आते हैं। शनि को सूर्यास्त के बाद पूर्व दिशा में उदित होकर पूरी रात देखा जा सकता है।
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ध्रुव तारा साइंस सेंटर के संस्थापक व राष्ट्रपति पदक प्राप्त शिक्षक मनीष कुमार ने बताया कि शनि लगभग 378 दिनों के अंतराल पर प्रतियुति की स्थिति में आता है। अगला अनुकूल अवसर 18 अक्तूबर 2027 के आसपास आएगा। कार्यक्रम में बच्चों को बताया गया कि शनि सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है। उसके चारों ओर बर्फ और धूल से बने विशाल वलय हैं। उसके 80 से अधिक उपग्रह हैं और सबसे बड़ा चंद्रमा टाइटन पृथ्वी के चंद्रमा से भी बड़ा है। शनि को सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में करीब 29.5 वर्ष लगते हैं।
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जिला विज्ञान क्लब के समन्वयक मोहित सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जिज्ञासा विकसित करते हैं। शिक्षक अनिल कुमार बाथम, अर्पित यादव और संदीप गुप्ता ने कहा कि जब बच्चे मोबाइल स्क्रीन से बाहर निकलकर स्वयं ग्रहों को देखते हैं तो विज्ञान उनके लिए जीवंत अनुभव बन जाता है।