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Auraiya News: 667 दिन बीते, 558 लाभार्थियों का 65 लाख हड़पने वालों की मौज

Sat, 01 Jul 2023 01:17 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Sat, 01 Jul 2023 01:17 AM IST
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667 days passed, 65 lakhs of 558 beneficiaries were enjoyed by the grabbers
औरैया। समाज कल्याण विभाग में 30 सितंबर 2021 को 558 लाभार्थियों के खाते बदल कर वृद्धा पेंशन का 65 लाख हड़पने का मामले सामने आया था। इस घोटाले की जांच सीडीओ की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय टीम ने की। तत्कालीन समाज कल्याण के तीन अधिकारियों समेत लिपिकों को दोषी पाया गया। मगर 667 दिन बीत जाने के बाद भी घोटालेबाज अफसर मौज कर रहे हैं। समाज कल्याण निदेशालय और शासन इस मामले में एफआईआर कराने के निर्देश भी दे चुका है। बावजूद इसके जिम्मेदार कार्रवाई से किनारे किए हुए हैं।
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वृद्धावस्था पेंशन के खाते बदल कर घोटाला किए जाने का मामला 30 सितंबर 2021 को अधिकारियों के सामने आया था। इसमें सीडीओ अनिल कुमार की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय टीम ने अपनी जांच में पाया था कि 558 लाभार्थियों के खाते बदल कर विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की साठगांठ से लाभार्थियों का 65 लाख 82 हजार 700 रुपये का गबन किया गया।
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इस मामले में तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी शंकर लाल, भगवान सिंह, विनीत तिवारी और आवेश कुमार व दो लिपिकों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई। इसके साथ समाज कल्याण निदेशालय से भी अधिकारियों ने जांच कर मामले में एफआईआर व रिकवरी कराने के आदेश दिए। मगर दो साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी मामला ठंडे बस्ते में पड़ा है। समाज कल्याण अधिकारी से लेकर जिम्मेदार अफसर आगे की कार्रवाई करने से बचते नजर आ रहे हैं। यहीं कारण है कि घोटाले में शामिल अफसरों व कर्मचारियों पर कार्रवाई न होने से उनकी मौज है।
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ऐसे बदले गए थे खाते
पेंशन पोर्टल के संचालन और उसके डोंगल रखने की जिम्मेदारी समाज कल्याण अधिकारी की होती है। लॉगिन आईडी पर जाकर पेंशनर के दो विकल्प आते हैं। पहला पेंशन रोकने और दूसरा खाता अपडेट करने के लिए होता है। इस तरह डोंगल का प्रयोग कर लाभार्थियों के खाते बदल दिए गए, जो जांच में मिसमैच पाए गए हैं। यहीं से अफसरों पर शक गहराया था।

अनुसूचित जाति अत्याचार मद के अभिलेख गायब
वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए शासन से तीन करोड़ रुपये अनुसूचित जाति अत्याचार मद के लिए आवंटित हुआ था। इसमें हेराफेरी किए जाने की शिकायत पर जांच हुई तो 25 लाख का गबन पाया गया। इस मामले में पटल सहायक, लेखाकार, कंप्यूटर ऑपरेटर समेत तत्कालीन अधिकारियों को जांच में दोषी पाया गया। इस मामले में शासन से टीम ने आकर जांच की तो कई अभिलेख गायब मिले। इसके बाद से यह मामला भी लंबित पड़ा है। अब इस मामले में फिर से समाज कल्याण निदेशालय से अभिलेख तलब किए गए हैं।

वर्जन...

समाज कल्याण विभाग में घोटाले की मेरे स्तर से जांच पूरी की जा चुकी थी। विभागीय अधिकारियों को आगे की कार्रवाई करनी है। रिकवरी के आदेश भी हुए थे। अनुसूचित जाति अत्याचार मद में अभिलेख न मिलने की बात सामने आई है। पता किया जाएगा कि कार्रवाई कहां तक पहुंची है। समाज कल्याण अधिकारी को आगे की कार्रवाई करानी है। - अनिल कुमार सिंह, सीडीओ
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