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धुंध व कोहरे की चादर 20 दिन लेट हो जाएगी गेंहू की बुबाई
Updated Sat, 11 Nov 2017 11:34 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
औरैया। धुंध के साथ अब कोहरे का भी प्रकोप शुरू हो गया है। धान कटने के बाद खाली पड़े खेतों में नमी आ गई है। इस कारण किसान गेहूं की बुआई नहीं कर पा रहे हैं। जब तक खेतों से नमी नहीं जाएगी तब बुआई संभव नहीं है। अगर कोहरे का प्रकोप लगातार जारी रहा तो इस बार गेहूं की बुआई पिछड़ सकती है। वहीं, कोहरे के चलते फूल गोभी का फूल बिखर सकता है इसके अलावा उसका रंग सफेद की जगह पीला हो जाएगा।
बुधवार से धुंध का प्रकोप शुरू हुआ तो किसानों की धड़कने बढ़ गई। मगर धुंध से के कारण खेतों में नमी नहीं आई थी। गुरुवार की शाम से अचानक ही कोहरे की चादर भी तन गई। सुबह से ही सड़कों पर वाहन रेंगने लगते हैं। शाम होते ही फिर से कोहरे की चादर तन जाती है। जहां धान की कटाई हो गई है उन खेतों में नमी है।
जहां अभी धान की कटाई नहीं हुई वहां कटाई रुक गई है। धान गीला हो गया है, किसानों के सामने समस्या खड़ी है। गेहूं की बुआई 15 से 25 नवंबर तक शुरू हो जाती है। मगर इस बार खेत में नमी होने के कारण किसान बुआई नहीं कर पाएंगे। खेत सामान्य होने में ही 20 दिन लग जाएंगे। अगर कोहरे का कहर लगातार जारी रहा तो गेहूं की फसल लेट हो जाएगी। इसके साथ ही फूल गोभी में भी पीलापन आ जाएगा। वहीं रबी की फसलों में चना, मटर, सरसों, मसूर में कीट लगने का खतरा बना हुआ है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक संदीप कुमार का कहना है कि धुएं के अलावा मौजूद इनर्ड गैसें-कार्बन मोनो आक्साइड, नाइट्रस आक्साइड, सल्फर आक्साइड, सल्फर डाइ आक्साइड भी धुंध बढ़ाने में मददगार साबित हो रही हैं। आगामी चार-पांच दिनों तक हवा की गति धीमी रहने की संभावना है। इस वजह से धुंध व कोहरा छाए रहने के आसार हैं। आसमान में बदली छाई है। अचानक ही दाब कम होने से कोहरे का भी प्रकोप आ गया है। धुंध और कोहरे के प्रकोप से दिखना बंद हुआ है, जबकि कोहरे की दृश्यता इतनी नहीं थी कि दिखे नहीं। मगर धुंध के कारण इसकी तीव्रता बढ़ गई।
घातक है धुंध (स्मॉग)
धुंध के कारण सांस लेने में परेशानी एलर्जी, आंखों की बीमारी, सांस, दमा, अस्थमा, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, श्वसन तंत्र संबंधी बीमारियों का खतरा रहता है। डा. पीके कटियार के अनुसार सुबह धुंध के कारण दृश्यता लगभग शून्य हो गई थी। धुंध सबसे ज्यादा अस्थमा और सांस की अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए मुसीबत बनकर आती है। बढ़ते प्रदूषण के कारण ठंड के मौसम में धुंध हावी हो जाती है। धुंध में छिपे केमिकल के कण अस्थमा के अटैक की आशंका बढ़ जाती है।
धुंध बनने के कारण
सामान्य भाषा में समझा जाए तो ये प्रदूषित हवा का एक प्रकार है। स्मॉग शब्द अंग्रेजी के दो शब्दों स्मोक और फॉग से मिलकर बना है। आम तौर पर जब ठंडी हवा किसी भीड़भाड़ वाली जगह पर पहुंचती है तब स्मॉग बनता है। ठंडी हवा भारी होती है इसलिए वह रिहायशी इलाके की गर्म हवा के नीचे एक परत बना लेती है। गर्म हवा हमेशा ऊपर की ओर उठने की कोशिश करती है। लेकिन ऐसा नहीं कर पाती। कुछ ही समय में हवा की इन दोनों परतों के बीच हरकतें रुक जाती हैं। इसी उलट-पुलट के कारण स्मॉग बनता है। स्मॉग में सूक्ष्म पर्टिकुलेट कण, ओजोन, नाइट्रोजन मोनोआक्साइड और सल्फर डाई ऑक्साइड मौजूद होते हैं जो लोगों की सेहत के लिए खतरनाक हैं।
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औरैया। धुंध के साथ अब कोहरे का भी प्रकोप शुरू हो गया है। धान कटने के बाद खाली पड़े खेतों में नमी आ गई है। इस कारण किसान गेहूं की बुआई नहीं कर पा रहे हैं। जब तक खेतों से नमी नहीं जाएगी तब बुआई संभव नहीं है। अगर कोहरे का प्रकोप लगातार जारी रहा तो इस बार गेहूं की बुआई पिछड़ सकती है। वहीं, कोहरे के चलते फूल गोभी का फूल बिखर सकता है इसके अलावा उसका रंग सफेद की जगह पीला हो जाएगा।
बुधवार से धुंध का प्रकोप शुरू हुआ तो किसानों की धड़कने बढ़ गई। मगर धुंध से के कारण खेतों में नमी नहीं आई थी। गुरुवार की शाम से अचानक ही कोहरे की चादर भी तन गई। सुबह से ही सड़कों पर वाहन रेंगने लगते हैं। शाम होते ही फिर से कोहरे की चादर तन जाती है। जहां धान की कटाई हो गई है उन खेतों में नमी है।
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जहां अभी धान की कटाई नहीं हुई वहां कटाई रुक गई है। धान गीला हो गया है, किसानों के सामने समस्या खड़ी है। गेहूं की बुआई 15 से 25 नवंबर तक शुरू हो जाती है। मगर इस बार खेत में नमी होने के कारण किसान बुआई नहीं कर पाएंगे। खेत सामान्य होने में ही 20 दिन लग जाएंगे। अगर कोहरे का कहर लगातार जारी रहा तो गेहूं की फसल लेट हो जाएगी। इसके साथ ही फूल गोभी में भी पीलापन आ जाएगा। वहीं रबी की फसलों में चना, मटर, सरसों, मसूर में कीट लगने का खतरा बना हुआ है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक संदीप कुमार का कहना है कि धुएं के अलावा मौजूद इनर्ड गैसें-कार्बन मोनो आक्साइड, नाइट्रस आक्साइड, सल्फर आक्साइड, सल्फर डाइ आक्साइड भी धुंध बढ़ाने में मददगार साबित हो रही हैं। आगामी चार-पांच दिनों तक हवा की गति धीमी रहने की संभावना है। इस वजह से धुंध व कोहरा छाए रहने के आसार हैं। आसमान में बदली छाई है। अचानक ही दाब कम होने से कोहरे का भी प्रकोप आ गया है। धुंध और कोहरे के प्रकोप से दिखना बंद हुआ है, जबकि कोहरे की दृश्यता इतनी नहीं थी कि दिखे नहीं। मगर धुंध के कारण इसकी तीव्रता बढ़ गई।
घातक है धुंध (स्मॉग)
धुंध के कारण सांस लेने में परेशानी एलर्जी, आंखों की बीमारी, सांस, दमा, अस्थमा, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, श्वसन तंत्र संबंधी बीमारियों का खतरा रहता है। डा. पीके कटियार के अनुसार सुबह धुंध के कारण दृश्यता लगभग शून्य हो गई थी। धुंध सबसे ज्यादा अस्थमा और सांस की अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए मुसीबत बनकर आती है। बढ़ते प्रदूषण के कारण ठंड के मौसम में धुंध हावी हो जाती है। धुंध में छिपे केमिकल के कण अस्थमा के अटैक की आशंका बढ़ जाती है।
धुंध बनने के कारण
सामान्य भाषा में समझा जाए तो ये प्रदूषित हवा का एक प्रकार है। स्मॉग शब्द अंग्रेजी के दो शब्दों स्मोक और फॉग से मिलकर बना है। आम तौर पर जब ठंडी हवा किसी भीड़भाड़ वाली जगह पर पहुंचती है तब स्मॉग बनता है। ठंडी हवा भारी होती है इसलिए वह रिहायशी इलाके की गर्म हवा के नीचे एक परत बना लेती है। गर्म हवा हमेशा ऊपर की ओर उठने की कोशिश करती है। लेकिन ऐसा नहीं कर पाती। कुछ ही समय में हवा की इन दोनों परतों के बीच हरकतें रुक जाती हैं। इसी उलट-पुलट के कारण स्मॉग बनता है। स्मॉग में सूक्ष्म पर्टिकुलेट कण, ओजोन, नाइट्रोजन मोनोआक्साइड और सल्फर डाई ऑक्साइड मौजूद होते हैं जो लोगों की सेहत के लिए खतरनाक हैं।