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Atiq Murder: भाई ने मिलने के लिए बुलाया है...एनकाउंटर के पांच दिन बाद असद और बिल्डर मुस्लिम का ऑडियो सामने आया
Wed, 19 Apr 2023 03:24 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 19 Apr 2023 03:24 PM IST
सार
एनकाउंटर में मारे गए माफिया अतीक अहमद का बेटा असद और बिल्डर का ऑडियो वायरल हुआ है। 2.15 सेकंड के इस ऑडियो को सुनने से पता चलता है कि कॉल मुस्लिम की ओर से लगाई गई थी। ऑडियो शुरू होते ही असद मुस्लिम से कहता है कि जेल में मुलाकात के लिए जाने के दौरान बड़े भाई उमर ने उसे बात करने को कहा है।
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माफिया अतीक का बेटे असद (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
माफिया अतीक अहमद के बेटे पांच लाख के इनामी असद के एनकाउंटर में मारे जाने के पांच दिन बाद उसकी और बिल्डर मो. मुस्लिम की बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ है। इसमें असद उससे कहता है कि वह उसके बड़े भाई उमर से जेल या पेशी पर आने के दौरान मिल ले।
मुस्लिम वहां जाने को तो मना करता है, लेकिन उससे यह जरूर कहता है कि जो काम हो बताओ, वह उसे कर देगा। 2.15 सेकंड के इस ऑडियो को सुनने से पता चलता है कि कॉल मुस्लिम की ओर से लगाई गई थी।
ऑडियो शुरू होते ही असद मुस्लिम से कहता है कि जेल में मुलाकात के लिए जाने के दौरान बड़े भाई उमर ने उसे बात करने को कहा है। साथ ही यह भी कहता है कि वह उमर से पेशी या जेल जाकर मिल ले। मुलाकात का मकसद क्या है, इस बाबत वह कुछ नहीं बताता है।
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उधर मुस्लिम मुलाकात से इंकार करता है, लेकिन वह यह जरूर कहता है कि जो करना है, बताओ वह कर देगा। यह ऑडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है।
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मुस्लिम वहां जाने को तो मना करता है, लेकिन उससे यह जरूर कहता है कि जो काम हो बताओ, वह उसे कर देगा। 2.15 सेकंड के इस ऑडियो को सुनने से पता चलता है कि कॉल मुस्लिम की ओर से लगाई गई थी।
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ऑडियो शुरू होते ही असद मुस्लिम से कहता है कि जेल में मुलाकात के लिए जाने के दौरान बड़े भाई उमर ने उसे बात करने को कहा है। साथ ही यह भी कहता है कि वह उमर से पेशी या जेल जाकर मिल ले। मुलाकात का मकसद क्या है, इस बाबत वह कुछ नहीं बताता है।
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उधर मुस्लिम मुलाकात से इंकार करता है, लेकिन वह यह जरूर कहता है कि जो करना है, बताओ वह कर देगा। यह ऑडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है।
दोनों के बीच हुई बातचीत
असद: हैलो...
मुस्लिमः ...फोन किए थे?
असद: ये कह रहे थे कि भाई के पास हम जाते हैं जेल में मुलाकात करने...
मुस्लिमः हां?
असद: उमर भाई से हम मिलने जाते हैं जेल...
मस्लिमः हूं... हूं
असदः तो उन्होंने ही हमसे कहा था आपसे बात करने को कुछ
मुस्लिम: अच्छा...
असदः वो पांच तारीख को आ रहे हैं पेशी पर... तो आप टाइम निकालकर उनसे मुलाकात के लिए आ जाते...
मुस्लिमः हम यार.. कचहरी हमको न बुलाओ... समझे
असद: हैलो...
मुस्लिमः ...फोन किए थे?
असद: ये कह रहे थे कि भाई के पास हम जाते हैं जेल में मुलाकात करने...
मुस्लिमः हां?
असद: उमर भाई से हम मिलने जाते हैं जेल...
मस्लिमः हूं... हूं
असदः तो उन्होंने ही हमसे कहा था आपसे बात करने को कुछ
मुस्लिम: अच्छा...
असदः वो पांच तारीख को आ रहे हैं पेशी पर... तो आप टाइम निकालकर उनसे मुलाकात के लिए आ जाते...
मुस्लिमः हम यार.. कचहरी हमको न बुलाओ... समझे
असदः क्या हो गया कचहरी में?
मुस्लिमः कचहरी में थोड़ा सा ठीक नहीं रहता, कचहरी हम जाते भी नहीं हैं।
असदः या जेल चलिए हमारे साथ?
मुस्लिमः अब जेल वेल हम ना जा पाएंगे.... और कोई मैसेज हो बताओ... जो करना हो कर देंगे
असदः नहीं तो....मुलाकात न कर पाएंगे ये कहना चाह रहे हैं आप?
मुस्लिमः तो मुलाकात कर लिया जाता है...
असदः तो कैसे हो... पेशी में भी नहीं आ पाएंगे आप, जेल भी न आएंगे?
मुस्लिम: पेशी पर न बुलाओ हमको, पेशी पर असल में...हम वहां जाते भी नहीं है कचहरी-वचहरी ज्यादा.....
मुस्लिमः कचहरी में थोड़ा सा ठीक नहीं रहता, कचहरी हम जाते भी नहीं हैं।
असदः या जेल चलिए हमारे साथ?
मुस्लिमः अब जेल वेल हम ना जा पाएंगे.... और कोई मैसेज हो बताओ... जो करना हो कर देंगे
असदः नहीं तो....मुलाकात न कर पाएंगे ये कहना चाह रहे हैं आप?
मुस्लिमः तो मुलाकात कर लिया जाता है...
असदः तो कैसे हो... पेशी में भी नहीं आ पाएंगे आप, जेल भी न आएंगे?
मुस्लिम: पेशी पर न बुलाओ हमको, पेशी पर असल में...हम वहां जाते भी नहीं है कचहरी-वचहरी ज्यादा.....
असद: तो फिर कैसे मुलाकात होगी?
मुस्लिमः मुलाकात हम तुम कर लेंगे... कहीं पे... जहां कहोगे.....
असदः नहीं, नहीं... उमर भाई से मिलना था आपको?
मुस्लिम: उमर से मिलना है तो.. चलो अच्छा हम देखते हैं... चूंकि वहां कचहरी-वचहरी बहुत कम जाते हैं न, एक बार वहां मुलाकात हो गई थी उन लोगों से... रजी लोगों से... कोई मैसेज हो तो बता देना...
असद: इसीलिए फिर वहीं बात है न... अब क्या बताएं... एक कहावत है न कि खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है...
मुस्लिमः मतलब, हम समझे नहीं
मुस्लिमः मुलाकात हम तुम कर लेंगे... कहीं पे... जहां कहोगे.....
असदः नहीं, नहीं... उमर भाई से मिलना था आपको?
मुस्लिम: उमर से मिलना है तो.. चलो अच्छा हम देखते हैं... चूंकि वहां कचहरी-वचहरी बहुत कम जाते हैं न, एक बार वहां मुलाकात हो गई थी उन लोगों से... रजी लोगों से... कोई मैसेज हो तो बता देना...
असद: इसीलिए फिर वहीं बात है न... अब क्या बताएं... एक कहावत है न कि खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है...
मुस्लिमः मतलब, हम समझे नहीं
असदः उसपे हम आगे क्या कर सकते हैं...
मुस्लिम: नहीं, नहीं, अभी तुमने जो इमरान की बात किया ना.. इमरान देखा तुमको पता है कि कहां रहते हैं कहा नहीं रहते है...तुम्हारी जानकारी में भी हैं...
असदः इमरान कहां रहता है...कहां नहीं रहता मुस्लिम साब... हम भी जानते हैं
मुस्लिम: नहीं, नहीं, सुन तो लो हमारी बात... और अगर कोई मसला-मसाएल हमारे साथ...बचपन से हमारे दोस्त भी रहे... फोन वोन आता है तो हम इंकार तो कर नहीं सकते। आज तो आए थे मुलाकात करके चले गए किसी के साथ...
असद: बस यही बात है। चलिए ठीक है हम बात कर लेते हैं... आप हमारा नंबर सेव कर लीजिए... बस फोन उठा लीजिएगा।
मुस्लिम: ठीक है।
मुस्लिम: नहीं, नहीं, अभी तुमने जो इमरान की बात किया ना.. इमरान देखा तुमको पता है कि कहां रहते हैं कहा नहीं रहते है...तुम्हारी जानकारी में भी हैं...
असदः इमरान कहां रहता है...कहां नहीं रहता मुस्लिम साब... हम भी जानते हैं
मुस्लिम: नहीं, नहीं, सुन तो लो हमारी बात... और अगर कोई मसला-मसाएल हमारे साथ...बचपन से हमारे दोस्त भी रहे... फोन वोन आता है तो हम इंकार तो कर नहीं सकते। आज तो आए थे मुलाकात करके चले गए किसी के साथ...
असद: बस यही बात है। चलिए ठीक है हम बात कर लेते हैं... आप हमारा नंबर सेव कर लीजिए... बस फोन उठा लीजिएगा।
मुस्लिम: ठीक है।