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'वेलेंटाइन डे नहीं, मातृ-पितृ दिवस मनाएं युवा'
महाकुंभ नगर (इलाहाबाद)/ब्यूरो
Updated Thu, 17 Jan 2013 07:45 AM IST
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संगमनगरी में चल रहे चार दिनी सत्संग के तीसरे दिन भक्तों के बीच प्रवचन के दौरान संत आसाराम बापू ने कहा कि वेलेंटाइन डे हमारी संस्कृति नहीं, अपसंस्कृति है। युवाओं में ऐसे आयोजनों से गलत प्रवृत्ति फैल रही है, इस पर रोक लगनी चाहिए। आसाराम ने मंच से राज्य सरकार से यह मांग कर डाली कि यूपी में इस पर प्रतिबंध लगाएं। कहा कि बदले में युवा मातृ-पितृ दिवस मनाएं।
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बुधवार को सेक्टर-छह में आयोजित प्रवचन के दौरान आसाराम बापू ने भक्तों से कहा कि वेलेंटाइन दिवस जैसे आयोजनों से दूर रहें। संत का दावा है कि उनके कहने पर छत्तीसगढ़ सरकार ने वेलेंटाइन डे पर रोक लगा दी। एक कार्यक्रम के लिए वहां के मुख्यमंत्री ने उन्हें आमंत्रित किया था। उसी के आसपास वेलेंटाइन दिवस का भी आयोजन होना था।
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उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि प्रदेश में वेलेंटाइन दिवस पर रोक लगा दें और उसकी जगह लोग मातृ-पितृ दिवस मनाएं। यह कहकर वह लौट आए और दो-तीन दिन बाद उन्होंने अखबार में एक तस्वीर देखी कि वेलेंटाइन दिवस पर एक पुलिस कर्मी युवक-युवती को उठक-बैठक करा रहा है और दोनों एक-दूसरे के कान पकड़े हुए हैं। उन्हें उम्मीद है कि यूपी में भी राज्य सरकार इस पर रोक लगाएगी और इसकी जगह लोग मातृ-पितृ दिवस मनाएंगे।
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सिंहल ने किया आसाराम का समर्थन
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल आसाराम बापू के बयान से सहमत हैं। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि आसाराम बापू ने अच्छी सलाह दी है। वेलेंटाइन डे भारत की संस्कृति नहीं है। हमें मातृ-पितृ दिवस ही मनाना चाहिए। सिंघल ने कहा कि वेलेंटाइन डे अश्लीलता की संस्कृति है जो भारत में भी जड़े जमाने की कोशिश में है, इसलिए इस पर रोक लगा दी जानी चाहिए।
किसी ने सराहा तो कोई सहमत नहीं
वेलेंटाइन डे के मसले पर आसाराम बापू का प्रवचन सुनने वाले युवाओं की प्रतिक्रया मिलीजुली रही। किसी ने वेलेंटाइन डे पर रोक लगाने का समर्थन किया तो कोई इस पक्ष में था कि भारतीय संस्कृति के दायरे में रहकर वेलेंटाइन डे मनाने में कोई हर्ज नहीं है।