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Amroha News: व्यावसायिक सोच से महिला महिला स्वावलंबन की मिसाल बनीं रेखा
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हसनपुर। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गांव डगरौली निवासी रेखा राणा मिसाल बनकर उभरी हैं। उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और व्यावसायिक सोच के बल पर रोजगार के तीन अलग-अलग माध्यम विकसित किए हैं।
हसनपुर में रहरा अड्डे पर संचालित सीएससी जनसेवा केंद्र, गांव डगरौली में दूध की डेयरी और ब्लॉक हसनपुर में आधार केंद्र के माध्यम से वह अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। इन तीनों कार्यों से उनकी सालाना आय पांच लाख रुपये तक पहुंचने की संभावना है। इसी उपलब्धि के चलते वह पंच लखपति दीदी के रूप में महिला स्वावलंबन की प्रेरक मिसाल बन रही हैं।
रेखा राणा की सफलता यह संदेश देती है कि यदि महिलाओं को अवसर मिले और वे अपनी मेहनत व कौशल का सही इस्तेमाल करें, तो वे आर्थिक रूप से मजबूत बनकर अपने परिवार की जिम्मेदारी निभाने के साथ समाज में भी अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।
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तीन कार्यों से बढ़ाई आमदनी
-रेखा राणा ने रोजगार के लिए किसी एक माध्यम पर निर्भर रहने के बजाय तीन अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां संचालित की हैं। हसनपुर के रहरा अड्डे पर उनका सीएससी जनसेवा केंद्र लोगों को विभिन्न जनसेवाएं उपलब्ध कराने का माध्यम बना हुआ है। वहीं, गांव डगरौली में दूध की डेयरी के संचालन से वह दुग्ध व्यवसाय से जुड़ी हैं। इसके अतिरिक्त ब्लॉक हसनपुर में आधार केंद्र के माध्यम से भी वह सेवाएं प्रदान कर रही हैं। तीनों कार्यों के बेहतर संचालन से उनकी आमदनी में वृद्धि हो रही है।
महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
-रेखा राणा की यह उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्र की उन महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का सपना देखती हैं। उनका उदाहरण बताता है कि स्थानीय जरूरतों को समझकर छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू किए जाएं और उन्हें निरंतर मेहनत से आगे बढ़ाया जाए, तो रोजगार के बेहतर अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
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-शासन की योजनाओं से जुड़कर रेखा राणा पंच लखपति दीदी में शामिल हैं। वह महिला स्वावलंबन की दिशा में बढ़िया कार्य करके अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। ऐसी महिलाएं दूसरों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं। -रोहताश कुमार, खंड विकास अधिकारी हसनपुर।
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हसनपुर में रहरा अड्डे पर संचालित सीएससी जनसेवा केंद्र, गांव डगरौली में दूध की डेयरी और ब्लॉक हसनपुर में आधार केंद्र के माध्यम से वह अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। इन तीनों कार्यों से उनकी सालाना आय पांच लाख रुपये तक पहुंचने की संभावना है। इसी उपलब्धि के चलते वह पंच लखपति दीदी के रूप में महिला स्वावलंबन की प्रेरक मिसाल बन रही हैं।
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रेखा राणा की सफलता यह संदेश देती है कि यदि महिलाओं को अवसर मिले और वे अपनी मेहनत व कौशल का सही इस्तेमाल करें, तो वे आर्थिक रूप से मजबूत बनकर अपने परिवार की जिम्मेदारी निभाने के साथ समाज में भी अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।
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तीन कार्यों से बढ़ाई आमदनी
-रेखा राणा ने रोजगार के लिए किसी एक माध्यम पर निर्भर रहने के बजाय तीन अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां संचालित की हैं। हसनपुर के रहरा अड्डे पर उनका सीएससी जनसेवा केंद्र लोगों को विभिन्न जनसेवाएं उपलब्ध कराने का माध्यम बना हुआ है। वहीं, गांव डगरौली में दूध की डेयरी के संचालन से वह दुग्ध व्यवसाय से जुड़ी हैं। इसके अतिरिक्त ब्लॉक हसनपुर में आधार केंद्र के माध्यम से भी वह सेवाएं प्रदान कर रही हैं। तीनों कार्यों के बेहतर संचालन से उनकी आमदनी में वृद्धि हो रही है।
महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
-रेखा राणा की यह उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्र की उन महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का सपना देखती हैं। उनका उदाहरण बताता है कि स्थानीय जरूरतों को समझकर छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू किए जाएं और उन्हें निरंतर मेहनत से आगे बढ़ाया जाए, तो रोजगार के बेहतर अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
-शासन की योजनाओं से जुड़कर रेखा राणा पंच लखपति दीदी में शामिल हैं। वह महिला स्वावलंबन की दिशा में बढ़िया कार्य करके अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। ऐसी महिलाएं दूसरों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं। -रोहताश कुमार, खंड विकास अधिकारी हसनपुर।