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Amroha News: दो नई लाइनें बिछाने को 46 गांवों की जमीन के अधिग्रहण की तैयारी
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अमरोहा। गाजियाबाद-मुरादाबाद रेलखंड पर यातायात का दबाव कम करने के लिए दो नई रेल लाइनें बिछाने की योजना पर प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए 46 गांवों के किसानों की जमीन अधिग्रहीत की जानी है। प्रशासन ने जमीनों के आकलन और गाटा संख्या के मिलान के लिए रेलवे से प्रस्ताव और नक्शा मांगा है।
रेलवे बोर्ड प्रभावित गांवों की सूची साझा कर चुका है। विस्तृत प्रस्ताव मिलने के बाद राजस्व विभाग की टीम गांवों में सर्वे कर जमीनों का चिह्नांकन करेगी। लेखपाल गाटा संख्या का मिलान करेंगे, जिससे तय होगा कि किस किसान की कितनी भूमि परियोजना में आएगी। फिलहाल संबंधित गांवों में जमीनों के बैनामों पर रोक लगा दी गई है।
नई लाइनें बनने से रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव कम होने और यात्री व मालगाड़ियों का संचालन बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, जिले में गंगा एक्सप्रेसवे विस्तार के लिए भी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।
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प्रस्ताव मिलते ही शुरू होगा गाटा सर्वे
जिला प्रशासन के मुताबिक अभी रेलवे ने केवल प्रभावित गांवों की सूची उपलब्ध कराई है। भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद राजस्व विभाग गाटा संख्या के आधार पर सर्वे करेगा। इसके बाद प्रभावित किसानों की सूची तैयार होगी और मुआवजा प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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रेल ट्रैफिक का दबाव होगा कम
गाजियाबाद-मुरादाबाद रेलखंड उत्तर रेलवे के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। तीसरी और चौथी रेल लाइन बनने से यात्री और मालगाड़ियों के संचालन में सुविधा होगी। इससे ट्रेनों की समयबद्धता सुधरेगी और भविष्य में अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन का रास्ता भी खुलेगा। इस ट्रैक पर 100 से ज्यादा ट्रेनें गुजरती हैं।
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इन गांवों में जमीन का अधिग्रहण होगा
रेलवे की सूची में काफूरपुर, नरैना कलां, भटपुरा माफी, जलालपुर, मुलकटा, महेशरा, शेखूपुर शुमाली, शाहपुर बुजुर्ग, भानपुर खालसा, अलीपुर भूड़ शुमाली, अफजलपुर गोसाईं, मोहरका, चौबारा, शहबाजपुर डोर, कांकाठेर, ओसिता एहतमाली, जगदेवपुर, पायंती कलां, सिरसा मोहन, नौरंगी, मुजफ्फरपुर पट्टी, सिरसा मनिहार, वाजिदपुर, चक्कालीलेट, कासिमपुर जट, लोदीपुर बंजारा, मोड़ी जट, पृथ्वीपुर कलां, कैलसा, उमर मोहम्मदपुर, अदलपुर ताज, तेलीपुरा माफी, केशोपुर, उमरपुर, धनौरी अहीर, सलेमपुर हामनगर, अमरोहा खास चुंगी, गुलड़िया, खालकपुर खादर, गफ्फारपुर, धकतौड़ा, चांदनगर समेत कुल 46 गांव शामिल हैं।
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रेलवे से जमीनों के संबंध में प्रस्ताव और नक्शा मांगा गया है। जिससे मौके पर जमीनों की गाटा संख्या का मिलान किया जा सके। लेखपाल इसका आकलन करेंगे। इन जमीनों पर धारा-80 पहले ही लागू हो चुकी है।
-करमेंद्र सिंह, विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी
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रेलवे बोर्ड प्रभावित गांवों की सूची साझा कर चुका है। विस्तृत प्रस्ताव मिलने के बाद राजस्व विभाग की टीम गांवों में सर्वे कर जमीनों का चिह्नांकन करेगी। लेखपाल गाटा संख्या का मिलान करेंगे, जिससे तय होगा कि किस किसान की कितनी भूमि परियोजना में आएगी। फिलहाल संबंधित गांवों में जमीनों के बैनामों पर रोक लगा दी गई है।
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नई लाइनें बनने से रेलखंड पर ट्रेनों का दबाव कम होने और यात्री व मालगाड़ियों का संचालन बढ़ने की उम्मीद है। वहीं, जिले में गंगा एक्सप्रेसवे विस्तार के लिए भी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।
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प्रस्ताव मिलते ही शुरू होगा गाटा सर्वे
जिला प्रशासन के मुताबिक अभी रेलवे ने केवल प्रभावित गांवों की सूची उपलब्ध कराई है। भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद राजस्व विभाग गाटा संख्या के आधार पर सर्वे करेगा। इसके बाद प्रभावित किसानों की सूची तैयार होगी और मुआवजा प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
रेल ट्रैफिक का दबाव होगा कम
गाजियाबाद-मुरादाबाद रेलखंड उत्तर रेलवे के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। तीसरी और चौथी रेल लाइन बनने से यात्री और मालगाड़ियों के संचालन में सुविधा होगी। इससे ट्रेनों की समयबद्धता सुधरेगी और भविष्य में अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन का रास्ता भी खुलेगा। इस ट्रैक पर 100 से ज्यादा ट्रेनें गुजरती हैं।
इन गांवों में जमीन का अधिग्रहण होगा
रेलवे की सूची में काफूरपुर, नरैना कलां, भटपुरा माफी, जलालपुर, मुलकटा, महेशरा, शेखूपुर शुमाली, शाहपुर बुजुर्ग, भानपुर खालसा, अलीपुर भूड़ शुमाली, अफजलपुर गोसाईं, मोहरका, चौबारा, शहबाजपुर डोर, कांकाठेर, ओसिता एहतमाली, जगदेवपुर, पायंती कलां, सिरसा मोहन, नौरंगी, मुजफ्फरपुर पट्टी, सिरसा मनिहार, वाजिदपुर, चक्कालीलेट, कासिमपुर जट, लोदीपुर बंजारा, मोड़ी जट, पृथ्वीपुर कलां, कैलसा, उमर मोहम्मदपुर, अदलपुर ताज, तेलीपुरा माफी, केशोपुर, उमरपुर, धनौरी अहीर, सलेमपुर हामनगर, अमरोहा खास चुंगी, गुलड़िया, खालकपुर खादर, गफ्फारपुर, धकतौड़ा, चांदनगर समेत कुल 46 गांव शामिल हैं।
रेलवे से जमीनों के संबंध में प्रस्ताव और नक्शा मांगा गया है। जिससे मौके पर जमीनों की गाटा संख्या का मिलान किया जा सके। लेखपाल इसका आकलन करेंगे। इन जमीनों पर धारा-80 पहले ही लागू हो चुकी है।
-करमेंद्र सिंह, विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी