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Amroha News: गजरौला सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ और फिजिशियन नहीं
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गजरौला। कई बार विभिन्न पुरस्कार प्राप्त कर चुकी सीएचसी बुरे दौर से गुजर रही हैै। यहां पर करीब 8 महीने से बाल रोेग विशेषज्ञ नहीं हैं। फिजिशियन का भी पद रिक्त हैै। दस फार्मासिस्ट की जरूरत है लेकिन तीन से काम चलाया जा रहा हैै। वार्ड बाॅय तीन होने चाहिए, महज एक की ही तैनाती है। सीएचसी में आने वाले मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैै।
नगर हाईवे के किनारे बसा है। इस कारण लखनऊ-दिल्ली के साथ ही अन्य नगरों और महानगरों से सीधी कनेक्टिविटी हैै। यहां पर बनी सीएचसी भौगोलिक दृष्टि से ऐसी जगह स्थित है, जहां पर स्थानीय थाना क्षेत्र ही नहीं बल्कि रजबपुर, बछरायूं थाना क्षेत्र और हसनपुर कोतवाली क्षेत्र में होने वाले हादसों में घायल लोगों को तुरंत भर्ती कर दिया जाता हैै। इसके अलावा दूसरे क्षेत्रों के मरीज भी यहां पर दवाई लेने, जांच कराने आतेे हैं।
मरीजों को अच्छी सुविधाएं देने, उनसे स्टाफ के अच्छे व्यवहार केे कारण सीएचसी को कई बार पुरस्कार प्राप्त हुुए। मगर अब सीएचसी बुरे दौर से गुजर रही हैै। यहां पर स्टाफ की कमी हैै। डॉ. योगेंद्र सिंह बाल रोग विशेषज्ञ थे। 31 दिसंबर को उनको सीएचसी प्रभारी से कार्यवाहक सीएमओ बना दिया गया। अब स्थायी सीएमओ आ गए, लेकिन डॉ. योगेंद्र की वापसी सीएचसी में नहीं की गई। उनके स्थान पर किसी बाल रोेग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की गई। इस कारण पिछले आठ महीने सेे बच्चों को दिखाने या उनका उपचार कराने के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा हैै।
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वह मजबूरी में निजी चिकित्सकों के यहां जा रहे हैं। यहां पर फिजिशियन भी तैनात नहीं है। जबकि उनकी भूमिका अहम होती हैै। सीएचसी में ओेपीडी 600 से ऊपर तक पहुंच जाती है। स्वास्थ्य विभाग का मानक है कि 60 मरीजों पर एक फार्मासिस्ट होना चाहिए लेकिन सीएचसी में महज तीन ही तैनात हैं। उनमें भी चीफ फार्मासिस्ट मरीजों को देखने की बजाय अन्य कार्य करते हैं।
इसी तरह वार्ड बाॅय तीन होने चाहिए, लेकिन एक से ही काम चलाया जा रहा हैै। लैब में ब्लड, पेशाब, टायफाइड, मलेरिया आदि की जांच के लिए महज चार कर्मचारी तैनात हैं, जबकि कम से कम 6 होने चाहिए। एक्सरे करने के लिए भी एक ही कर्मचारी तैनात है, जबकि यहां पर सुबह सेे ही लाइन लग जाती हैै। उनकी संख्या को देखते हुए कम से कम दो कर्मचारी होने चाहिए।
बदहाल है सीएचसी की आवासीय कॉलोनी
गजरौला। सीएचसी की आवासीय कॉलोनी बदहाल हैै। हल्की बारिश में भी जलभराव हो जाता हैै। जलभराव के कारण स्टाफ घरों में कैद हो जाता हैै। आवासीय परिसर में उग रही घास और इधर-उधर बिखरा पड़ा कूड़ा कचरा सफाई व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं।
कोट:
सीएचसी में स्टाफ का अभाव है। उन्होंने स्टाफ की तैनाती के लिए कई बार पत्र लिखा लेकिन तैनाती नहीं की गई।- डॉ. योगेंद्र सिंह, पूर्व कार्यवाहक, सीएमओ एवं पूर्व सीएचसी प्रभारी गजरौला
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नगर हाईवे के किनारे बसा है। इस कारण लखनऊ-दिल्ली के साथ ही अन्य नगरों और महानगरों से सीधी कनेक्टिविटी हैै। यहां पर बनी सीएचसी भौगोलिक दृष्टि से ऐसी जगह स्थित है, जहां पर स्थानीय थाना क्षेत्र ही नहीं बल्कि रजबपुर, बछरायूं थाना क्षेत्र और हसनपुर कोतवाली क्षेत्र में होने वाले हादसों में घायल लोगों को तुरंत भर्ती कर दिया जाता हैै। इसके अलावा दूसरे क्षेत्रों के मरीज भी यहां पर दवाई लेने, जांच कराने आतेे हैं।
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मरीजों को अच्छी सुविधाएं देने, उनसे स्टाफ के अच्छे व्यवहार केे कारण सीएचसी को कई बार पुरस्कार प्राप्त हुुए। मगर अब सीएचसी बुरे दौर से गुजर रही हैै। यहां पर स्टाफ की कमी हैै। डॉ. योगेंद्र सिंह बाल रोग विशेषज्ञ थे। 31 दिसंबर को उनको सीएचसी प्रभारी से कार्यवाहक सीएमओ बना दिया गया। अब स्थायी सीएमओ आ गए, लेकिन डॉ. योगेंद्र की वापसी सीएचसी में नहीं की गई। उनके स्थान पर किसी बाल रोेग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की गई। इस कारण पिछले आठ महीने सेे बच्चों को दिखाने या उनका उपचार कराने के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा हैै।
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वह मजबूरी में निजी चिकित्सकों के यहां जा रहे हैं। यहां पर फिजिशियन भी तैनात नहीं है। जबकि उनकी भूमिका अहम होती हैै। सीएचसी में ओेपीडी 600 से ऊपर तक पहुंच जाती है। स्वास्थ्य विभाग का मानक है कि 60 मरीजों पर एक फार्मासिस्ट होना चाहिए लेकिन सीएचसी में महज तीन ही तैनात हैं। उनमें भी चीफ फार्मासिस्ट मरीजों को देखने की बजाय अन्य कार्य करते हैं।
इसी तरह वार्ड बाॅय तीन होने चाहिए, लेकिन एक से ही काम चलाया जा रहा हैै। लैब में ब्लड, पेशाब, टायफाइड, मलेरिया आदि की जांच के लिए महज चार कर्मचारी तैनात हैं, जबकि कम से कम 6 होने चाहिए। एक्सरे करने के लिए भी एक ही कर्मचारी तैनात है, जबकि यहां पर सुबह सेे ही लाइन लग जाती हैै। उनकी संख्या को देखते हुए कम से कम दो कर्मचारी होने चाहिए।
बदहाल है सीएचसी की आवासीय कॉलोनी
गजरौला। सीएचसी की आवासीय कॉलोनी बदहाल हैै। हल्की बारिश में भी जलभराव हो जाता हैै। जलभराव के कारण स्टाफ घरों में कैद हो जाता हैै। आवासीय परिसर में उग रही घास और इधर-उधर बिखरा पड़ा कूड़ा कचरा सफाई व्यवस्था की पोल खोल रहे हैं।
कोट:
सीएचसी में स्टाफ का अभाव है। उन्होंने स्टाफ की तैनाती के लिए कई बार पत्र लिखा लेकिन तैनाती नहीं की गई।- डॉ. योगेंद्र सिंह, पूर्व कार्यवाहक, सीएमओ एवं पूर्व सीएचसी प्रभारी गजरौला