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देवोत्थान एकादशी : लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी
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गजरौला के तिगरी में कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले गंगा मेले में देवोत्थान एकादशी पर स्नान करते ?
- फोटो : GAJRAULA
गजरौला (अमरोहा)। देवोत्थान एकादशी पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगाधाम तिगरी में गंगा में डुबकी लगाकर पुण्यलाभ कमाया। इस बार मेला समय से पूर्व शुरू हो जाने के कारण घाटों पर काफी भीड़ रही।
शुक्रवार को देवोत्थान एकादशी पर गंगाधाम तिगरी में स्नान का सिलसिला तड़के से ही शुरू हो गया था। सेक्टर एक, दो, तीन के बाद सेक्टर 10 से 14 में विशाल स्नान घाट बनाने जाने के कारण श्रद्धालुओं ने वहां गंगा में डुबकी लगाई। सुरक्षा के मद्देनजर गहराई वाले स्थानों को चिह्नित करने के लिए वहां बल्लियां लगाई गईं थीं। वहीं घाटों पर रोशनी की व्यवस्था भी रही। इस कारण श्रद्धालुओं को अंधेरे में स्नान करने में कोई तकलीफ नहीं हुई। दिन निकलने के साथ ही घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी होती रही। सुबह 11 बजे घाटों पर पांव तक रखने की जगह नहीं थी।
गंगा के तटों पर मां गंगा मैया के जयकारे गूंज रहे थे। घाटों पर जल अधिक नहीं होने के कारण श्रद्धालु काफी देर तक गंगा में अठखेलियां करते रहे। इनमें महिलाओं, युवतियों और बच्चों की संख्या अधिक रही। घाटों पर जिला पंचायत की ओर से महिलाओं के वस्त्र बदलने के लिए अलग से कक्ष बनाए गए हैं। वहीं घाटों पर पंडितों ने भी अपने झोपड़ियां और सख्त सजाए हुए थे। स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने सामर्थ्यानुसार दान भी दिया। गंगा में पेड़े, दूध, लौंग और पुष्प आदि भी अर्पित किए। सुरक्षा के मद्देनजर घाटों पर पुलिस भी तैनात रही।
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शुक्रवार को देवोत्थान एकादशी पर गंगाधाम तिगरी में स्नान का सिलसिला तड़के से ही शुरू हो गया था। सेक्टर एक, दो, तीन के बाद सेक्टर 10 से 14 में विशाल स्नान घाट बनाने जाने के कारण श्रद्धालुओं ने वहां गंगा में डुबकी लगाई। सुरक्षा के मद्देनजर गहराई वाले स्थानों को चिह्नित करने के लिए वहां बल्लियां लगाई गईं थीं। वहीं घाटों पर रोशनी की व्यवस्था भी रही। इस कारण श्रद्धालुओं को अंधेरे में स्नान करने में कोई तकलीफ नहीं हुई। दिन निकलने के साथ ही घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी होती रही। सुबह 11 बजे घाटों पर पांव तक रखने की जगह नहीं थी।
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गंगा के तटों पर मां गंगा मैया के जयकारे गूंज रहे थे। घाटों पर जल अधिक नहीं होने के कारण श्रद्धालु काफी देर तक गंगा में अठखेलियां करते रहे। इनमें महिलाओं, युवतियों और बच्चों की संख्या अधिक रही। घाटों पर जिला पंचायत की ओर से महिलाओं के वस्त्र बदलने के लिए अलग से कक्ष बनाए गए हैं। वहीं घाटों पर पंडितों ने भी अपने झोपड़ियां और सख्त सजाए हुए थे। स्नान के उपरांत श्रद्धालुओं ने सामर्थ्यानुसार दान भी दिया। गंगा में पेड़े, दूध, लौंग और पुष्प आदि भी अर्पित किए। सुरक्षा के मद्देनजर घाटों पर पुलिस भी तैनात रही।
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