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Amroha News: कैंसर छिपाकर ली थी बीमा पॉलिसी, उपभोक्ता आयोग ने खारिज किया क्लेम
Fri, 09 Oct 2026 12:21 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Fri, 09 Oct 2026 12:21 AM IST
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अमरोहा। बीमा पॉलिसी लेने के महज दो दिन बाद किसान मौत के मामले में उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी ने दो लाख रुपये का क्लेम खारिज कर दिया। आयोग ने माना कि बीमा पॉलिसी लेने से पहले किसान कैंसर से पीड़ित था और उसने प्रस्ताव पत्र में अपनी बीमारी की जानकारी छिपाई थी। इसे महत्वपूर्ण तथ्य छिपाना मानते हुए आयोग ने बीमा कंपनी द्वारा क्लेम निरस्त करने की कार्रवाई को विधिसम्मत माना।
हसनपुर के गांव दीपपुर निवासी गुड्डी देवी ने आयोग में परिवाद दाखिल कर बताया था कि उनके पति चरन सिंह ने आठ मार्च 2024 को 998 रुपये वार्षिक प्रीमियम देकर लाइफ इंश्योरेंस की पॉलिसी ली थी। इसमें दो लाख रुपये का बीमा था। अगले ही दिन नौ मार्च को सीने में दर्द के बाद चरन सिंह की मौत हो गई। गुड्डी देवी ने बीमा क्लेम के साथ आवश्यक दस्तावेज कंपनी को भेजे, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। लिहाजा गुड्डी देवी ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण लेकर दो लाख रुपये के साथ ब्याज, मानसिक क्षति और परिवाद खर्च की मांग की थी। अपने जवाब में बीमा कंपनी ने दावा किया कि चरन सिंह पॉलिसी लेने से पहले से कैंसर से पीड़ित थे। उनका इलाज श्री जगन्नाथ चैरिटेबल कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर में चल रहा था। मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार बीमारी का उपचार जनवरी 2024 से चल रहा था और 21 फरवरी को भी उन्हें भर्ती किया गया था। इसके बावजूद आठ मार्च को पॉलिसी लेते समय कैंसर की जानकारी प्रस्ताव पत्र में नहीं दी गई। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि बीमा प्रस्ताव में बीमाधारक को ऐसे सभी महत्वपूर्ण तथ्य बताने होते हैं, जो कंपनी के बीमा करने के निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं। बीमारी छिपाए जाने के आधार पर कंपनी द्वारा क्लेम निरस्त करना सही पाया गया। आयोग के अध्यक्ष रमा शंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित की पीठ ने परिवाद खारिज करते हुए दोनों पक्षों को अपना-अपना खर्च वहन करने का आदेश दिया।
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हसनपुर के गांव दीपपुर निवासी गुड्डी देवी ने आयोग में परिवाद दाखिल कर बताया था कि उनके पति चरन सिंह ने आठ मार्च 2024 को 998 रुपये वार्षिक प्रीमियम देकर लाइफ इंश्योरेंस की पॉलिसी ली थी। इसमें दो लाख रुपये का बीमा था। अगले ही दिन नौ मार्च को सीने में दर्द के बाद चरन सिंह की मौत हो गई। गुड्डी देवी ने बीमा क्लेम के साथ आवश्यक दस्तावेज कंपनी को भेजे, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। लिहाजा गुड्डी देवी ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण लेकर दो लाख रुपये के साथ ब्याज, मानसिक क्षति और परिवाद खर्च की मांग की थी। अपने जवाब में बीमा कंपनी ने दावा किया कि चरन सिंह पॉलिसी लेने से पहले से कैंसर से पीड़ित थे। उनका इलाज श्री जगन्नाथ चैरिटेबल कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर में चल रहा था। मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार बीमारी का उपचार जनवरी 2024 से चल रहा था और 21 फरवरी को भी उन्हें भर्ती किया गया था। इसके बावजूद आठ मार्च को पॉलिसी लेते समय कैंसर की जानकारी प्रस्ताव पत्र में नहीं दी गई। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि बीमा प्रस्ताव में बीमाधारक को ऐसे सभी महत्वपूर्ण तथ्य बताने होते हैं, जो कंपनी के बीमा करने के निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं। बीमारी छिपाए जाने के आधार पर कंपनी द्वारा क्लेम निरस्त करना सही पाया गया। आयोग के अध्यक्ष रमा शंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित की पीठ ने परिवाद खारिज करते हुए दोनों पक्षों को अपना-अपना खर्च वहन करने का आदेश दिया।
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