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Amroha News: बीमा क्लेम खारिज करने को गढ़ी गई मनगढ़ंत रिपोर्ट
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अमरोहा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बीमा कंपनी के इन्वेस्टिगेटर की रिपोर्ट को मनगढ़ंत और मनमाना बताया। आयोग ने टिप्पणी की कि क्लेम खारिज करने के उद्देश्य से सोची-समझी चाल के तहत रिपोर्ट तैयार की गई। कंपनी को मृतक की मां को 5.17 लाख रुपये की बीमा राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज समेत देने का आदेश दिया गया है। मानसिक-आर्थिक परेशानी और वाद खर्च के रूप में 25 हजार रुपये भी देने होंगे। भुगतान एक महीने में करना होगा।
मूलरूप से संभल जिले के निवासी राजेश जोया में रहते थे। उन्होंने 17 मार्च 2024 को एजेंट के जरिये जीवन बीमा पॉलिसी ली थी, जिसमें मां विमला देवी नामित थीं। वह 4337 रुपये मासिक प्रीमियम जमा करते थे। पॉलिसी के करीब दस दिन बाद तबीयत बिगड़ने पर उनकी मौत हो गई। विमला देवी ने दावा किया तो कंपनी ने इन्कार कर दिया, जिस पर उन्होंने आयोग में शिकायत की।
सुनवाई में कंपनी ने कहा कि राजेश पहले से कैंसर और अस्थमा से पीड़ित थे और बीमारी छिपाकर बीमा कराया। लेकिन वह कोई चिकित्सकीय दस्तावेज या डॉक्टर की रिपोर्ट पेश नहीं कर सकी। आयोग अध्यक्ष रमाशंकर सिंह ने कंपनी के तर्क और जांच रिपोर्ट अस्वीकार करते हुए यह आदेश दिया।
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मूलरूप से संभल जिले के निवासी राजेश जोया में रहते थे। उन्होंने 17 मार्च 2024 को एजेंट के जरिये जीवन बीमा पॉलिसी ली थी, जिसमें मां विमला देवी नामित थीं। वह 4337 रुपये मासिक प्रीमियम जमा करते थे। पॉलिसी के करीब दस दिन बाद तबीयत बिगड़ने पर उनकी मौत हो गई। विमला देवी ने दावा किया तो कंपनी ने इन्कार कर दिया, जिस पर उन्होंने आयोग में शिकायत की।
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सुनवाई में कंपनी ने कहा कि राजेश पहले से कैंसर और अस्थमा से पीड़ित थे और बीमारी छिपाकर बीमा कराया। लेकिन वह कोई चिकित्सकीय दस्तावेज या डॉक्टर की रिपोर्ट पेश नहीं कर सकी। आयोग अध्यक्ष रमाशंकर सिंह ने कंपनी के तर्क और जांच रिपोर्ट अस्वीकार करते हुए यह आदेश दिया।
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