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Amethi News: नाम तुम्हारा अमर रहेगा, याद करेगा जहां...
Mon, 21 Apr 2025 12:34 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 21 Apr 2025 12:34 AM IST
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अमेठी के नरैनी में कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करते कवि।-स्रोत : अयोजक
अमेठी। स्थानीय तहसील के खोझवा मजरे नरैनी गांव में शहीद अनिल मौर्य की स्मृति में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश अग्रहरि, विशिष्ट अतिथि प्रतापगढ़ सदर विधायक राजेंद्र मौर्य व सीआरपीएफ कैंप त्रिसुंडी के कमांडेंट आफिसर अमित कुमार सिंह, काशी प्रसाद तिवारी सहित कवियों व अतिथियों ने शहीद अनिल मौर्य के स्मारक स्थल पर प्रतिमा पर पुष्पार्चन कर किया।
कवि सम्मेलन में शायर शिवभानु कृष्णा ने नाम तुम्हारा अमर रहेगा, याद करेगा जहां... पंक्तियों के माध्यम से शहीद अनिल मौर्य को शब्द पुष्प अर्पित किए। सुल्तानपुर के कवि शिव सागर तिवारी की पंक्तियां नयन कर रहे चौकसी, अधर कर रहे जाप। हृदय निकेतन रिक्त है, कब आओगे आप... ने खूब तालियां बटोरीं। कवि अभिजित ने पढ़ा, जिस दिन हमने शस्त्र संभाले, कूच कर दिया पूरब में। तब दुनिया के नक्शे पर कोई बांग्लादेश नहीं होगा। तो दूसरी कविता हम सत्य सनातन के अनुयाई, अपना विश्व समूचा है। हर रंग की है इज्जत दिल में, पर भगवा सबसे ऊंचा है।
प्रयागराज से आए कवि अभिषेक शुक्ल शुभम की पंक्तियां जाके सरहद पे खुद को मिटा देंगे पर, आंच भारत पे आए नहीं चाहते तो पीलीभीत से आईं कवयित्री सरोज सरगम की पंक्तियां मन की वंशी पे सरगम बजी कृष्णा सी, झूमकर जिंदगी राधिका हो गई ने श्रोताओं की तालियां बटोरीं। राजेश प्रतापगढ़ी की पंक्तियां ऐसे सरहद के सपूतों की कसम है तुमको, दुरंगा कोई तिरंगे को न छूने पाए और शायर विवेक मिश्र की पंक्तियां नमन उनको मेरा मेरी गजल की दास्तानी में, लुटा आए जो जिगरो-जां वतन की पासबानी में को श्रोताओं ने खूब सराहा।
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कवि अभिमन्यु शुक्ल तरंग ने भागते हैं कायर अस्तित्व की लड़ाई से जो, एक दिन कुल का कलंक बन जाते हैं के माध्यम से लोगों को वीर रस से ओतप्रोत कर दिया। कवि शेखर त्रिपाठी ने पढ़ा कि जिन्हें दाम प्यारे, उन्हें दाम दे दो। मुझे राम प्यारे, मुझे राम दे दो और कवि विवेक कुशवाहा ने पढ़ा कि सीमाओं की रक्षा के हित वीर निकलते हैं घर से, दुश्मन से लड़ते-लड़ते कुछ वीर अमर हो जाते हैं पंक्तियां सराही गईं। कवि डॉ. केसरी शुक्ल की पंक्तियाें गर एक भी नजर उठी इधर, सौगंध हमें नारायण की। बस मानचित्र पर हम ही होंगे, बाकी संसार नहीं होगा से पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कार्यक्रम में आयोजक अरुण कुमार मौर्य, अजय मौर्य, नीरज मौर्य, राहुल मौर्य ने कवियों व अन्य अतिथियों को अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
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कवि सम्मेलन में शायर शिवभानु कृष्णा ने नाम तुम्हारा अमर रहेगा, याद करेगा जहां... पंक्तियों के माध्यम से शहीद अनिल मौर्य को शब्द पुष्प अर्पित किए। सुल्तानपुर के कवि शिव सागर तिवारी की पंक्तियां नयन कर रहे चौकसी, अधर कर रहे जाप। हृदय निकेतन रिक्त है, कब आओगे आप... ने खूब तालियां बटोरीं। कवि अभिजित ने पढ़ा, जिस दिन हमने शस्त्र संभाले, कूच कर दिया पूरब में। तब दुनिया के नक्शे पर कोई बांग्लादेश नहीं होगा। तो दूसरी कविता हम सत्य सनातन के अनुयाई, अपना विश्व समूचा है। हर रंग की है इज्जत दिल में, पर भगवा सबसे ऊंचा है।
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प्रयागराज से आए कवि अभिषेक शुक्ल शुभम की पंक्तियां जाके सरहद पे खुद को मिटा देंगे पर, आंच भारत पे आए नहीं चाहते तो पीलीभीत से आईं कवयित्री सरोज सरगम की पंक्तियां मन की वंशी पे सरगम बजी कृष्णा सी, झूमकर जिंदगी राधिका हो गई ने श्रोताओं की तालियां बटोरीं। राजेश प्रतापगढ़ी की पंक्तियां ऐसे सरहद के सपूतों की कसम है तुमको, दुरंगा कोई तिरंगे को न छूने पाए और शायर विवेक मिश्र की पंक्तियां नमन उनको मेरा मेरी गजल की दास्तानी में, लुटा आए जो जिगरो-जां वतन की पासबानी में को श्रोताओं ने खूब सराहा।
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कवि अभिमन्यु शुक्ल तरंग ने भागते हैं कायर अस्तित्व की लड़ाई से जो, एक दिन कुल का कलंक बन जाते हैं के माध्यम से लोगों को वीर रस से ओतप्रोत कर दिया। कवि शेखर त्रिपाठी ने पढ़ा कि जिन्हें दाम प्यारे, उन्हें दाम दे दो। मुझे राम प्यारे, मुझे राम दे दो और कवि विवेक कुशवाहा ने पढ़ा कि सीमाओं की रक्षा के हित वीर निकलते हैं घर से, दुश्मन से लड़ते-लड़ते कुछ वीर अमर हो जाते हैं पंक्तियां सराही गईं। कवि डॉ. केसरी शुक्ल की पंक्तियाें गर एक भी नजर उठी इधर, सौगंध हमें नारायण की। बस मानचित्र पर हम ही होंगे, बाकी संसार नहीं होगा से पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कार्यक्रम में आयोजक अरुण कुमार मौर्य, अजय मौर्य, नीरज मौर्य, राहुल मौर्य ने कवियों व अन्य अतिथियों को अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।