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बिना मान्यता चलते मिले सौ मदरसे
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गौरीगंज (अमेठी)। मदरसों की जांच का काम जिले में पूरा हो गया। अल्पसंख्यक विभाग की ओर से तैयार अंतिम रिपोर्ट में गैर संचालित मदरसों की संख्या 70 से बढ़कर सौ पहुंच गई है। मदरसों की आय का श्रोत्र सिर्फ चंदा है। दस मदरसे ऐसे हैं जिनमें मजहबी शिक्षा दी जाती है। कुछ में सिर्फ एक घंटे ही शिक्षण कार्य होता है। मदरसों में बुनियादी सुविधाओं की कमी के साथ बिहार प्रांत समेत गैर जिलों के विद्यार्थियों के पढ़ने का भी मामला जांच में सामने आया है।
मदरसा बोर्ड से संचालित स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की कमी व बिना मान्यता मदरसा संचालित होने की शिकायत पर शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने टीम गठित कर जांच कराई। पहले जांच में विभाग सिर्फ 70 गैर मान्यता मदरसा संचालित होने की बात कह रहा था। हालांकि शुक्रवार को शासन भेजी गई जांच रिपोर्ट ने बिना मान्यता संचालित होने वाले मदरसों की संख्या 100 बताई गई है। पांच मदरसे अवैध रूप से संचालित नदवा संस्था से मान्यता प्राप्त मिले।
10 मदरसों में बिहार प्रांत के साथ अंबेडकर नगर व आजमगढ़ समेत कई जिले के बच्चों के पढ़ने का मामला तो 20 मदरसों में मजहबी शिक्षा देने के साथ 25 मदरसों में सिर्फ कुछ समय ही शिक्षण कार्य होने तथा यहां पंजीकृत बच्चों के परिषदीय स्कूलों में नामांकित होनेे की पुष्टि हुई।
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इतना ही नहीं सभी मदरसों की आय का श्रोत चंदा होने के साथ फर्श पर शिक्षा देने तथा आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की कमी मिली। जांच टीम ने निर्धारित प्रारूप पर मदरसा का नाम, संचालन करने वाली संस्था का नाम, स्थापना वर्ष, मदरसे की अवस्थिति का संपूर्ण विवरण, मदरसे में विद्यार्थी सुरक्षा के प्रबंध, भवन, पेयजल, प्रसाधन, फर्नीचर, विद्युत व प्रसाधन, विद्यार्थियों की संख्या, शिक्षकों की संख्या, मदरसे में लागू पाठ्यक्रम, आय का श्रोत, क्या मदरसे के विद्यार्थी अन्य स्कूल में नामांकित हैं तथा जिस गैर सरकारी समूह/संस्था से मदरसे की संबद्धता की रिपोर्ट दी तो अल्पसंख्यक विभाग ने डीएम से संस्तुति प्राप्त कर शासन को रिपोर्ट भेज दी है।
मदरसों का विवरण तहसीलवार
तहसील - मान्यता प्राप्त - गैर मान्यता प्राप्त
मुसाफिरखाना - 22 - 61
तिलोई - 23 - 29
गौरीगंज - 05 - 08
अमेठी - 11 - 02
दिल्ली-मुंबई तक से मिलता चंदा
जांच टीमों ने मदरसों में मौजूद अभिलेखों को खंगाला तो पाया कि मदरसों को संचालित रखने के लिए कई तरीकों से फंडिंग होती है। कुछ मदरसों का संचालन फसली चंदा (सभी फसली में होने वाले उत्पादन से एकत्र राशन को बेचकर प्राप्त धनराशि) से तो कुछ का रमजान में मिले जकात की 2.5 प्रतिशत राशि से होता है। कुछ मदरसों के अभिलेखों में दिल्ली व मुंबई जैसे बड़े शहरों में रहने वालों से चंदा मिलने की बात भी दर्ज थी।
दूसरे जिलों के बच्चे व दूसरे प्रांतों के शिक्षक
जांच के दौरान टीमों ने पाया कि जिले में 10 मदरसे लिखा पढ़ी में आवासीय हैं। इन 10 मदरसों में न्यूनतम बच्चों की संख्या 50 है। सिंहपुर के एक व बहादुरपुर के दो आवासीय मदरसों में गोंडा, बस्ती, बहराइच आदि दूरस्थ जिलों के अलावा बिहार प्रांत के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते मिले। इसी तरह बाजार शुकुल में संचालित एक मदरसे में उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार प्रांत से आए शिक्षक भी शिक्षा कार्य करते मिले।
यह कमियां भी मिलीं
जांच टीम को 20 मदरसों मेें इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। कहीं डेस्क बेंच नहीं है तो कहीं ब्लैकबोर्ड तक नहीं। कहीं बिजली नहीं तो कई बिल्डिंग नहीं। इस दौरान 15 मदरसे ऐसे भी मिले जहां सुबह महज दो घंटे (अन्य मदरसों में पांच घंटे पढ़ाई का प्राविधान) ही बच्चों को धार्मिक तालीम दी जाती है। इसके बाद यह बच्चे प्राथमिक या नर्सरी समेत अन्य विद्यालयों में पढ़ने चले जाते हैं।
जांच पूरी, रिपोर्ट तैयार
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नरेंद्र पांडेय ने बताया कि जांच का कार्य पूरा हो गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद निर्धारित 12 बिंदुओं पर मिली खामियों का उल्लेख किया गया है। डीएम के माध्यम से रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
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मदरसा बोर्ड से संचालित स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की कमी व बिना मान्यता मदरसा संचालित होने की शिकायत पर शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने टीम गठित कर जांच कराई। पहले जांच में विभाग सिर्फ 70 गैर मान्यता मदरसा संचालित होने की बात कह रहा था। हालांकि शुक्रवार को शासन भेजी गई जांच रिपोर्ट ने बिना मान्यता संचालित होने वाले मदरसों की संख्या 100 बताई गई है। पांच मदरसे अवैध रूप से संचालित नदवा संस्था से मान्यता प्राप्त मिले।
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10 मदरसों में बिहार प्रांत के साथ अंबेडकर नगर व आजमगढ़ समेत कई जिले के बच्चों के पढ़ने का मामला तो 20 मदरसों में मजहबी शिक्षा देने के साथ 25 मदरसों में सिर्फ कुछ समय ही शिक्षण कार्य होने तथा यहां पंजीकृत बच्चों के परिषदीय स्कूलों में नामांकित होनेे की पुष्टि हुई।
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इतना ही नहीं सभी मदरसों की आय का श्रोत चंदा होने के साथ फर्श पर शिक्षा देने तथा आवश्यक मूलभूत सुविधाओं की कमी मिली। जांच टीम ने निर्धारित प्रारूप पर मदरसा का नाम, संचालन करने वाली संस्था का नाम, स्थापना वर्ष, मदरसे की अवस्थिति का संपूर्ण विवरण, मदरसे में विद्यार्थी सुरक्षा के प्रबंध, भवन, पेयजल, प्रसाधन, फर्नीचर, विद्युत व प्रसाधन, विद्यार्थियों की संख्या, शिक्षकों की संख्या, मदरसे में लागू पाठ्यक्रम, आय का श्रोत, क्या मदरसे के विद्यार्थी अन्य स्कूल में नामांकित हैं तथा जिस गैर सरकारी समूह/संस्था से मदरसे की संबद्धता की रिपोर्ट दी तो अल्पसंख्यक विभाग ने डीएम से संस्तुति प्राप्त कर शासन को रिपोर्ट भेज दी है।
मदरसों का विवरण तहसीलवार
तहसील - मान्यता प्राप्त - गैर मान्यता प्राप्त
मुसाफिरखाना - 22 - 61
तिलोई - 23 - 29
गौरीगंज - 05 - 08
अमेठी - 11 - 02
दिल्ली-मुंबई तक से मिलता चंदा
जांच टीमों ने मदरसों में मौजूद अभिलेखों को खंगाला तो पाया कि मदरसों को संचालित रखने के लिए कई तरीकों से फंडिंग होती है। कुछ मदरसों का संचालन फसली चंदा (सभी फसली में होने वाले उत्पादन से एकत्र राशन को बेचकर प्राप्त धनराशि) से तो कुछ का रमजान में मिले जकात की 2.5 प्रतिशत राशि से होता है। कुछ मदरसों के अभिलेखों में दिल्ली व मुंबई जैसे बड़े शहरों में रहने वालों से चंदा मिलने की बात भी दर्ज थी।
दूसरे जिलों के बच्चे व दूसरे प्रांतों के शिक्षक
जांच के दौरान टीमों ने पाया कि जिले में 10 मदरसे लिखा पढ़ी में आवासीय हैं। इन 10 मदरसों में न्यूनतम बच्चों की संख्या 50 है। सिंहपुर के एक व बहादुरपुर के दो आवासीय मदरसों में गोंडा, बस्ती, बहराइच आदि दूरस्थ जिलों के अलावा बिहार प्रांत के बच्चे शिक्षा ग्रहण करते मिले। इसी तरह बाजार शुकुल में संचालित एक मदरसे में उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार प्रांत से आए शिक्षक भी शिक्षा कार्य करते मिले।
यह कमियां भी मिलीं
जांच टीम को 20 मदरसों मेें इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। कहीं डेस्क बेंच नहीं है तो कहीं ब्लैकबोर्ड तक नहीं। कहीं बिजली नहीं तो कई बिल्डिंग नहीं। इस दौरान 15 मदरसे ऐसे भी मिले जहां सुबह महज दो घंटे (अन्य मदरसों में पांच घंटे पढ़ाई का प्राविधान) ही बच्चों को धार्मिक तालीम दी जाती है। इसके बाद यह बच्चे प्राथमिक या नर्सरी समेत अन्य विद्यालयों में पढ़ने चले जाते हैं।
जांच पूरी, रिपोर्ट तैयार
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नरेंद्र पांडेय ने बताया कि जांच का कार्य पूरा हो गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद निर्धारित 12 बिंदुओं पर मिली खामियों का उल्लेख किया गया है। डीएम के माध्यम से रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।