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Amethi News: कोर्ट के आदेश पर भी दर्ज नहीं हो रहा मुकदमा
Mon, 29 May 2023 11:54 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 29 May 2023 11:54 PM IST
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तत्कालीन एसपी व दो विवेचक पर था केस दर्ज करने का निर्देश
गुंगवांछ गांव में परिवार के चार लोगोत्की मौत से जुड़ा मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
गौरीगंज (अमेठी)। गुंगवांछ गांव में एक साल पहले हुई एक परिवार के चार लोगों की मौत के मामले में कोर्ट के आदेश के बाद भी तत्कालीन एसपी व दो विवेचकों के खिलाफ अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। पुलिस की विवेचना से असंतुष्ट परिवार की याचिका पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने तत्कालीन एसपी के साथ ही विवेचक उमाकांत शुक्ल तथा परशुराम ओझा के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने का आदेश दिया था। इसका पालन न होने से परेशान पीड़ित परिवार अब फिर से कोर्ट में प्रत्यावेदन देने की तैयारी में है।
आठ बिस्वा भूमि के लिए 16 मार्च 2022 को पीड़ित परिवार के चार सदस्यों की हत्या कर दी गयी थी। इस मामले में सात नामजद पर केस दर्ज होने के बावजूद विवेचक उमाकांत शुक्ल ने पहले आरोपी रमाशंकर तिवारी का नाम निकाल दिया। रमाशंकर का नाम निकलाने की जानकारी पीड़ित परिवार को हुई तो कोर्ट में प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दिया था। इस पर कोर्ट ने मामले की अग्रिम विवेचना का आदेश दिया था। इसके बाद मामले की जांच तत्कालीन एसपी ने विवेचक परशुराम ओझा को सौंपी। परशुराम ओझा ने पूर्व विवेचक की तरह ही मामले में शिथिलता बरतते हुए अपनी विवेचना में रमाशंकर के साथ ग्राम प्रधान आशा तिवारी, नितिन तिवारी व अभिषेक यादव को भी क्लीन चिट दे दी। हालांकि तत्कालीन सीजेएम रचना ने पुलिस की फाइनल रिपोर्ट को खारिज कर पत्रावली जिला जज कोर्ट में सुपुर्द कर दी।
जिला जज के समक्ष अभियुक्तगणों ने डिस्चार्ज प्रार्थना पत्र दिया। जिस पर सुनवाई करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय ने बीती 16 मई को डिस्चार्ज प्रार्थना पत्र निरस्त करते हुए बीती 16 मई को तत्कालीन एसपी व दोनों विवेचकों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने का आदेश देते हुए पूरे मामले की पुन: विवेचना कराने को कहा था। आदेश के बावजूद अब तक केस दर्ज नहीं होने से पीड़ित परिवार परेशान है।
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गुंगवांछ गांव में परिवार के चार लोगोत्की मौत से जुड़ा मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
गौरीगंज (अमेठी)। गुंगवांछ गांव में एक साल पहले हुई एक परिवार के चार लोगों की मौत के मामले में कोर्ट के आदेश के बाद भी तत्कालीन एसपी व दो विवेचकों के खिलाफ अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। पुलिस की विवेचना से असंतुष्ट परिवार की याचिका पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने तत्कालीन एसपी के साथ ही विवेचक उमाकांत शुक्ल तथा परशुराम ओझा के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने का आदेश दिया था। इसका पालन न होने से परेशान पीड़ित परिवार अब फिर से कोर्ट में प्रत्यावेदन देने की तैयारी में है।
आठ बिस्वा भूमि के लिए 16 मार्च 2022 को पीड़ित परिवार के चार सदस्यों की हत्या कर दी गयी थी। इस मामले में सात नामजद पर केस दर्ज होने के बावजूद विवेचक उमाकांत शुक्ल ने पहले आरोपी रमाशंकर तिवारी का नाम निकाल दिया। रमाशंकर का नाम निकलाने की जानकारी पीड़ित परिवार को हुई तो कोर्ट में प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दिया था। इस पर कोर्ट ने मामले की अग्रिम विवेचना का आदेश दिया था। इसके बाद मामले की जांच तत्कालीन एसपी ने विवेचक परशुराम ओझा को सौंपी। परशुराम ओझा ने पूर्व विवेचक की तरह ही मामले में शिथिलता बरतते हुए अपनी विवेचना में रमाशंकर के साथ ग्राम प्रधान आशा तिवारी, नितिन तिवारी व अभिषेक यादव को भी क्लीन चिट दे दी। हालांकि तत्कालीन सीजेएम रचना ने पुलिस की फाइनल रिपोर्ट को खारिज कर पत्रावली जिला जज कोर्ट में सुपुर्द कर दी।
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जिला जज के समक्ष अभियुक्तगणों ने डिस्चार्ज प्रार्थना पत्र दिया। जिस पर सुनवाई करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय ने बीती 16 मई को डिस्चार्ज प्रार्थना पत्र निरस्त करते हुए बीती 16 मई को तत्कालीन एसपी व दोनों विवेचकों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने का आदेश देते हुए पूरे मामले की पुन: विवेचना कराने को कहा था। आदेश के बावजूद अब तक केस दर्ज नहीं होने से पीड़ित परिवार परेशान है।
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