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एसआईटी ने शुरू की दो क्षतिग्रस्त सड़कों की जांच
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40 : गौरीगंज : क्षतिग्रस्त कादू-नाला थौरी मार्ग पर श्रमदान करते विधायक (फाइल फोटो)। -संवाद
- फोटो : AMETHI
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गौरीगंज (अमेठी)। विधानसभा क्षेत्र गौरीगंज के कादूनाला-थौरी व मुसाफिरखाना-पारा मार्ग के क्षतिग्रस्त होने की जांच एसआईटी ने शुरू कर दी है। मंगलवार को एसपी एसआईटी के नेतृत्व में पहुंची तीन सदस्यीय टीम ने प्रकरण से जुड़े सभी जिम्मेदारों के साथ बैठक की। पांच घंटे चली मैराथन बैठक में टीम ने ऐसेे सवाल किए कि अफसर परेशान नजर आए। टीम ने बुधवार सुबह तक दोनों सड़कों के अलावा पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निर्माण से जुड़े सभी दस्तावेज तलब किये हैं। बहुचर्चित सड़कों की जांच शुरू होते ही दायरे में आने वालों की धड़कन बढ़ गई है।
जिले के गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र में आने वाले कादूनाला-थौरी मार्ग (9.10 किलोमीटर) व मुसाफिरखाना-पारा मार्ग (5.650 किलोमीटर) का मामला एक बार फिर गर्म हो गया है। शासन के निर्देश पर गठित एसआईटी की टीम चुनाव के दरम्यान शांत पड़े इस मामले की जांच करने मंगलवार को जिला मुख्यालय गौरीगंज पहुंची। एसआईटी के एसपी देवरंजन वर्मा, जांचकर्ता इंस्पेक्टर मनोज तिवारी व इंस्पेक्टर विनोद कुमार त्रिपाठी ने दोनों सड़कों के निर्माण व उनके खराब होने की पूरी स्थिति की प्रारंभिक जानकारी जुटाने के लिए कलेक्ट्रेट सभागार में जिम्मेदार अफसरों की बैठक की।
टीम ने बैठक में शामिल पीडब्ल्यूडी, पीएमजीएसवाई, यूपीडा व पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था से ऐसे-ऐसे सवाल किए कि अफसरों को पसीना छूट गया। पांच घंटे की मैराथन बैठक में एसआईटी की टीम ने सभी संस्थाओं से जुड़े अभिलेख व जानकारी प्रत्येक दशा में बुधवार सुबह तक उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। एसआईटी बुधवार सुबह 10 बजे दोनों सड़कों की स्थलीय जांच करेगी। एसआईटी के अफसरों का कहना था कि जांच पूरी होते ही रिपोर्ट शासन को सौंप दी जाएगी।
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2016 में बनी थीं दोनों सड़कें
लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर कादूनाला से निकलकर थौरी व मुसाफिरखाना से निकलकर पारा बाजार को जोड़ने वाली दोनों सड़कों का निर्माण वर्ष 2016 में हुआ था। दोनों ग्रामीण सड़कें पीएमजीएसवाई के तहत बनाई गई थीं। 3.75 मीटर चौड़े कादूनाला-थौरी मार्ग का निर्माण तीन करोड़ 80 लाख 67 हजार रुपये की लागत से यूनिक कांस्ट्रक्शन कंपनी व 5.50 मीटर चौड़े मुसाफिरखाना-पारा संपर्क मार्ग का निर्माण चार करोड़ 28 लाख 99 हजार रुपये की लागत से मेसर्स राज कांस्ट्रक्शन कंपनी ने कराया था।
कैसे क्षतिग्रस्त हो गईं सड़कें
इन सड़कों का निर्माण पूरा होने के कुछ ही दिन बाद पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण शुरू हो गया। आरोप है कि एक्सप्रेसवे के निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री ढोने के लिए लगे वाहनों की दिन-रात आवाजाही से दोनों सड़कें जल्दी ही क्षतिग्रस्त हो गईं।
प्राक्कलन समिति कर चुकी जांच
इन सड़कों के जर्जर होने व पब्लिक की ओर से लगातार मिल रही शिकायत से नाराज विधायक राकेश प्रताप सिंह ने इसकी शिकायत शासन में की थी। विधायक की शिकायत पर 10 मार्च 2020 को प्राक्कलन समिति ने दोनों सड़कों का स्थलीय निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण के बाद पांच जनवरी 2021 को प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष व सदस्यों ने दोबारा पीएमजीएसवाई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी की मौजूदगी में सड़कों की जांच की थी।
सदन में उठाया था मुद्दा
विधायक राकेश प्रताप सिंह ने दोनों जर्जर सड़कों का मुद्दा 23 फरवरी 2021 को सदन में भी उठाया था। विधायक के अनुसार सदन में पूछे गए प्रश्न के जवाब में शासन ने 25 फरवरी को लिखित जवाब देकर उन्हें बताया था कि दोनों सड़कों के पुनर्निर्माण का इस्टीमेट बन गया है तीन महीने में सड़कों का पुर्ननिर्माण शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि ऐसा हुआ नहीं।
इस मुद्दे पर विधायक ने दिया था इस्तीफा
दोनों क्षतिग्रस्त सड़कें तब चर्चा में आई थीं जब गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह ने सड़कों का पुनर्निर्माण नहीं होने पर अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। विधायक ने दो अक्टूबर 2021 को जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से कहा कि यदि 31 अक्तूबर को पूर्वाह्न 11 बजे तक दोनों सड़कों का निर्माण शुरू नहीं हुआ तो वे अपने पद से इस्तीफा देकर जीपीओ पर धरना देंगे। ऐसा नहीं होने पर राकेश 31 अक्तूबर को लखनऊ पहुंचे और विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा जीपीओ पर धरना शुरू कर दिया। सात दिन तक चले धरने के बाद फिर उन्होंने आमरण अनशन शुरू किया था।
11 नवंबर को किया था श्रमदान
सड़कों के पुनर्निर्माण की मांग पूरी नहीं होने पर इस्तीफा देकर अनशन करने वाले विधायक ने 11 नवंबर को दोनों सड़कों पर श्रमदान शुरू कर दिया। श्रमदान में बड़ी संख्या में लोग सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और मैटेरियल लेकर पहुंचे थे। जब तक प्रशासन कुछ समझ पाता तब तक कई किलोमीटर सड़क चलने लायक बना दी गई। हालांकि बाद में सक्रिय प्रशासन उन्हें व समर्थकों को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन ले गया और देर रात छोड़ दिया। बाद में विधायक व श्रमदान में शामिल कई नामजद व अज्ञात लोगों के खिलाफ केस भी दर्ज किया गया था।
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जिले के गौरीगंज विधानसभा क्षेत्र में आने वाले कादूनाला-थौरी मार्ग (9.10 किलोमीटर) व मुसाफिरखाना-पारा मार्ग (5.650 किलोमीटर) का मामला एक बार फिर गर्म हो गया है। शासन के निर्देश पर गठित एसआईटी की टीम चुनाव के दरम्यान शांत पड़े इस मामले की जांच करने मंगलवार को जिला मुख्यालय गौरीगंज पहुंची। एसआईटी के एसपी देवरंजन वर्मा, जांचकर्ता इंस्पेक्टर मनोज तिवारी व इंस्पेक्टर विनोद कुमार त्रिपाठी ने दोनों सड़कों के निर्माण व उनके खराब होने की पूरी स्थिति की प्रारंभिक जानकारी जुटाने के लिए कलेक्ट्रेट सभागार में जिम्मेदार अफसरों की बैठक की।
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टीम ने बैठक में शामिल पीडब्ल्यूडी, पीएमजीएसवाई, यूपीडा व पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था से ऐसे-ऐसे सवाल किए कि अफसरों को पसीना छूट गया। पांच घंटे की मैराथन बैठक में एसआईटी की टीम ने सभी संस्थाओं से जुड़े अभिलेख व जानकारी प्रत्येक दशा में बुधवार सुबह तक उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। एसआईटी बुधवार सुबह 10 बजे दोनों सड़कों की स्थलीय जांच करेगी। एसआईटी के अफसरों का कहना था कि जांच पूरी होते ही रिपोर्ट शासन को सौंप दी जाएगी।
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2016 में बनी थीं दोनों सड़कें
लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर कादूनाला से निकलकर थौरी व मुसाफिरखाना से निकलकर पारा बाजार को जोड़ने वाली दोनों सड़कों का निर्माण वर्ष 2016 में हुआ था। दोनों ग्रामीण सड़कें पीएमजीएसवाई के तहत बनाई गई थीं। 3.75 मीटर चौड़े कादूनाला-थौरी मार्ग का निर्माण तीन करोड़ 80 लाख 67 हजार रुपये की लागत से यूनिक कांस्ट्रक्शन कंपनी व 5.50 मीटर चौड़े मुसाफिरखाना-पारा संपर्क मार्ग का निर्माण चार करोड़ 28 लाख 99 हजार रुपये की लागत से मेसर्स राज कांस्ट्रक्शन कंपनी ने कराया था।
कैसे क्षतिग्रस्त हो गईं सड़कें
इन सड़कों का निर्माण पूरा होने के कुछ ही दिन बाद पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का निर्माण शुरू हो गया। आरोप है कि एक्सप्रेसवे के निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री ढोने के लिए लगे वाहनों की दिन-रात आवाजाही से दोनों सड़कें जल्दी ही क्षतिग्रस्त हो गईं।
प्राक्कलन समिति कर चुकी जांच
इन सड़कों के जर्जर होने व पब्लिक की ओर से लगातार मिल रही शिकायत से नाराज विधायक राकेश प्रताप सिंह ने इसकी शिकायत शासन में की थी। विधायक की शिकायत पर 10 मार्च 2020 को प्राक्कलन समिति ने दोनों सड़कों का स्थलीय निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण के बाद पांच जनवरी 2021 को प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष व सदस्यों ने दोबारा पीएमजीएसवाई के मुख्य कार्यपालक अधिकारी की मौजूदगी में सड़कों की जांच की थी।
सदन में उठाया था मुद्दा
विधायक राकेश प्रताप सिंह ने दोनों जर्जर सड़कों का मुद्दा 23 फरवरी 2021 को सदन में भी उठाया था। विधायक के अनुसार सदन में पूछे गए प्रश्न के जवाब में शासन ने 25 फरवरी को लिखित जवाब देकर उन्हें बताया था कि दोनों सड़कों के पुनर्निर्माण का इस्टीमेट बन गया है तीन महीने में सड़कों का पुर्ननिर्माण शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि ऐसा हुआ नहीं।
इस मुद्दे पर विधायक ने दिया था इस्तीफा
दोनों क्षतिग्रस्त सड़कें तब चर्चा में आई थीं जब गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह ने सड़कों का पुनर्निर्माण नहीं होने पर अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। विधायक ने दो अक्टूबर 2021 को जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से कहा कि यदि 31 अक्तूबर को पूर्वाह्न 11 बजे तक दोनों सड़कों का निर्माण शुरू नहीं हुआ तो वे अपने पद से इस्तीफा देकर जीपीओ पर धरना देंगे। ऐसा नहीं होने पर राकेश 31 अक्तूबर को लखनऊ पहुंचे और विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा जीपीओ पर धरना शुरू कर दिया। सात दिन तक चले धरने के बाद फिर उन्होंने आमरण अनशन शुरू किया था।
11 नवंबर को किया था श्रमदान
सड़कों के पुनर्निर्माण की मांग पूरी नहीं होने पर इस्तीफा देकर अनशन करने वाले विधायक ने 11 नवंबर को दोनों सड़कों पर श्रमदान शुरू कर दिया। श्रमदान में बड़ी संख्या में लोग सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और मैटेरियल लेकर पहुंचे थे। जब तक प्रशासन कुछ समझ पाता तब तक कई किलोमीटर सड़क चलने लायक बना दी गई। हालांकि बाद में सक्रिय प्रशासन उन्हें व समर्थकों को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन ले गया और देर रात छोड़ दिया। बाद में विधायक व श्रमदान में शामिल कई नामजद व अज्ञात लोगों के खिलाफ केस भी दर्ज किया गया था।

9 : गौरीगंज : कलेक्ट्रेट में अफसरों के साथ बैठक करते एसआईटी टीम के प्रभारी। -संवाद- फोटो : AMETHI