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छह माह में हटाएं मिली स्टेडियम से अतिक्रमण
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भादर (अमेठी)। ब्लॉक क्षेत्र के घोरहा गांव में स्थित ग्रामीण मिनी स्टेडियम, सरकारी स्कूल के खेल मैदान व ऊसर, बंजर और नवीन परती की 24 बीघा भूमि पर कई दशक से हुआ अतिक्रमण जल्द हटेगा। एक खिलाड़ी की याचिका पर हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ की ओर से इस संबंध में जारी निर्देश के बाद संबंधित भूमि पर लंबे समय से आबाद लोगों में हड़कंप मचा है। कोर्ट ने भूमि अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए तहसील प्रशासन को छह माह का समय दिया है।
घोरहा गांव मेें जिले का सबसे बड़ा स्टेडियम (ग्रामीण मिनी स्टेडियम) है। मिनी स्टेडियम के बगल में उच्च प्राथमिक व प्राथमिक स्कूल का संचालन होता है। इसके आस पास बड़ा भू-भाग ऊसर, बंजर व नवीन परती के रूप में दर्ज है। स्टेडियम के रूप में दर्ज जमीन के एक हिस्से पर जहां स्टेडियम भवन व स्टेडियम का बाउंड्रीवॉल है वहीं शेष अधिकांश भूमि पर लोगों का कब्जा है।
कब्जा करने वालों ने इस भूमि पर बड़े-बड़े पक्के मकान, दुकान, पशुशाला, दालान व बाउंड्रीवॉल बना लिया है। मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कोशिश शुरू होने को 42 साल बीत चुके हैं। इस दौरान कई बार भूमि पर काबिज लोगों के खिलाफ बेदखली का आदेश भी जारी हुआ। लेकिन यह आदेश सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गया।
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अतिक्रमण प्रभावित भूमि का ब्यौरा
कोर्ट की ओर से जिस भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने का निर्देश दिया गया है उसमें ग्राम पंचायत घोरहा का खेल मैदान गाटा संख्या 160, जूनियर हाईस्कूल का मैदान 114 ख, 116, 117, युवा कल्याण विभाग द्वारा निर्मित ग्रामीण मिनी स्टेडियम की भूमि गाटा संख्या 152 मि., 153 मि., 158, 159 तथा समीप स्थित ऊसर, बंजर, नवीन परती भूमि गाटा संख्या 112 क, 114 क, 115, 152, 153 शामिल है।
शुरू हुई थी कब्जा हटाने की कोशिश
इस भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कोशिश जूनियर हाईस्कूल भादर (अब कंपोजिट विद्यालय भादर) के प्रधानाचार्य स्व. राम उदित सिंह ने भूमि प्रबंधन समिति घोरहा के साथ मिलकर की थी। तब तहसीलदार अमेठी ने वर्ष 1985, 1986 व 1987 में स्कूल के खेल मैदान को अतिक्रमण मुक्त करने के उद्देश्य से भूमि पर काबिज लोगों को बेदखल करने का आदेश हुआ था। यह आदेश कागज तक सिमट कर रह गया। दूसरी बार ग्रामीण मिनी स्टेडियम की स्थापना के समय यह कोशिश हरिमूर्ति सिंह, अशोक सिंह हिटलर व तत्कालीन ग्राम प्रधान घोरहा जनार्दन सिंह ने की। इनके द्वारा नौ जुलाई 2001 को सीडीओ सुल्तानपुर को शिकायती पत्र दिया गया। तब भी खेल मैदान व समीप स्थित ऊसर भूमि पर काबिज लोगों के खिलाफ न्यायालय तहसीलदार द्वारा सभी कब्जाधारकों के खिलाफ बेदखली का आदेश हुआ लेकिन यह आदेश भी कागजों तक सिमट गया।
सदन में उठा था मुद्दा
गांव के रहने वाले व अधिवक्ता अभीष्ट विक्रम सिंह के प्रार्थना पत्र पर कांग्रेस एमएलसी दीपक सिंह ने नियम 115 के तहत खेल मैदान, व स्टेडियम की भूमि पर अतिक्रमण का मुद्दा 11 जुलाई 2017 को विधान परिषद में उठाया। बावजूद इसके भूमि अतिक्रमण मुक्त नहीं हो पाई।
हाईकोर्ट गए खिलाड़ी अंश सिंह
प्रभावित भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए गांव के रहने वाले खिलाड़ी अंश सिंह ने 14 दिसंबर 2021 को मुख्य सचिव, आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद के अलावा कमिश्नर अयोध्या, डीएम व एसडीएम से मांग की। इसके अलावा संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायत की। इसके बाद लेखपाल आशीष सिंह द्वारा अतिक्रमणकारियों द्वारा पक्का मकान बना लेने व पूर्व में न्यायालय द्वारा बेदखल होने की आख्या प्रस्तुत की गई। हालांकि भूमि अतिक्रमण मुक्त नहीं हो सकी। इसके बाद अंश ने 27 जनवरी 2022 को हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में पीआईएल दाखिल की। इस पर सात, 14, 15 फरवरी व तीन मार्च को सुनवाई हुई।
तीन मार्च को दिया निर्देश
सुनवाई पूरी होने के बाद तीन मार्च को न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने तहसीलदार अमेठी को निर्देश दिया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 ग्राम सभा भूमि अंतर्गत धारा 67(1) के तहत न्यायालय में विचाराधीन सभी वाद का निस्तारण करते हुए खेल मैदान, स्कूल का खेल मैदान, ग्रामीण मिनी स्टेडियम व पास स्थित ऊसर, बंजर और नवीन परती खाते की भूमि को छह माह में अतिक्रमण मुक्त कराकर कोर्ट को अवगत कराएं।
जल्द कराया जाएगा बेदखल
तहसीलदार बृजमोहन ने बताया कि छह महीने में जो मुकदमे हुए हैं उनकी सुनवाई पूरी कर निस्तारित करने तथा अतिक्रमणकारियों के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई पूरी करने का निर्देश है। मुकदमा निस्तारित करके सभी को बेदखल कराया जाएगा।
नहीं मिला कोई निर्देश
लेखपाल आशीष सिंह ने कहा कि अभी तक हमें रिट या आदेश नहीं प्राप्त हुआ है। 14 फरवरी को जो निर्देश आया था उस निर्देश को पूरा करके पत्रावली दाखिल कर दी गई है। अधिकारी जो निर्णय लेंगे उस पर अमल कराया जाएगा।
करेंगे हर संभव कोशिश
याचिका दाखिल करने वाली खिलाड़ी अंश सिंह ने बताया कि अतिक्रमण के कारण खेल परिसर में हॉकी, फुटबाल, दौड़ जैसे किसी भी एक खेल का पूर्ण मैदान नहीं बन पा रहा है। जबकि खेल मैदान, स्कूल का मैदान, ग्रामीण मिनी स्टेडियम व ग्राम सभा की भूमि मिलाकर लगभग 24 बीघा भूमि है। भूमि अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए विधिक रूप से हर संभव कोशिश की जाएगी।
लंबे समय से आबाद हैं हम
सुग्रीव सिंह ने बताया कि हम लोग जमींदारी उन्मूलन कानून आने के पहले से ही इस भूमि पर रह रहे हैं। हमारे रहन-सहन में बाधा आ जाएगी। हम लोग कहां रहने जाएंगे।
अमृतलाल ने कहा कि मेरा मकान 50-60 साल से बना है। अगर हम लोगों का मकान गिरा दिया जाएगा तब हम कहां जाएंगे। इसके अलावा कुछ है भी नहीं हम लोगों के पास। सरकार को हमारी स्थिति पर भी विचार करना चाहिए।
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घोरहा गांव मेें जिले का सबसे बड़ा स्टेडियम (ग्रामीण मिनी स्टेडियम) है। मिनी स्टेडियम के बगल में उच्च प्राथमिक व प्राथमिक स्कूल का संचालन होता है। इसके आस पास बड़ा भू-भाग ऊसर, बंजर व नवीन परती के रूप में दर्ज है। स्टेडियम के रूप में दर्ज जमीन के एक हिस्से पर जहां स्टेडियम भवन व स्टेडियम का बाउंड्रीवॉल है वहीं शेष अधिकांश भूमि पर लोगों का कब्जा है।
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कब्जा करने वालों ने इस भूमि पर बड़े-बड़े पक्के मकान, दुकान, पशुशाला, दालान व बाउंड्रीवॉल बना लिया है। मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कोशिश शुरू होने को 42 साल बीत चुके हैं। इस दौरान कई बार भूमि पर काबिज लोगों के खिलाफ बेदखली का आदेश भी जारी हुआ। लेकिन यह आदेश सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गया।
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अतिक्रमण प्रभावित भूमि का ब्यौरा
कोर्ट की ओर से जिस भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने का निर्देश दिया गया है उसमें ग्राम पंचायत घोरहा का खेल मैदान गाटा संख्या 160, जूनियर हाईस्कूल का मैदान 114 ख, 116, 117, युवा कल्याण विभाग द्वारा निर्मित ग्रामीण मिनी स्टेडियम की भूमि गाटा संख्या 152 मि., 153 मि., 158, 159 तथा समीप स्थित ऊसर, बंजर, नवीन परती भूमि गाटा संख्या 112 क, 114 क, 115, 152, 153 शामिल है।
शुरू हुई थी कब्जा हटाने की कोशिश
इस भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कोशिश जूनियर हाईस्कूल भादर (अब कंपोजिट विद्यालय भादर) के प्रधानाचार्य स्व. राम उदित सिंह ने भूमि प्रबंधन समिति घोरहा के साथ मिलकर की थी। तब तहसीलदार अमेठी ने वर्ष 1985, 1986 व 1987 में स्कूल के खेल मैदान को अतिक्रमण मुक्त करने के उद्देश्य से भूमि पर काबिज लोगों को बेदखल करने का आदेश हुआ था। यह आदेश कागज तक सिमट कर रह गया। दूसरी बार ग्रामीण मिनी स्टेडियम की स्थापना के समय यह कोशिश हरिमूर्ति सिंह, अशोक सिंह हिटलर व तत्कालीन ग्राम प्रधान घोरहा जनार्दन सिंह ने की। इनके द्वारा नौ जुलाई 2001 को सीडीओ सुल्तानपुर को शिकायती पत्र दिया गया। तब भी खेल मैदान व समीप स्थित ऊसर भूमि पर काबिज लोगों के खिलाफ न्यायालय तहसीलदार द्वारा सभी कब्जाधारकों के खिलाफ बेदखली का आदेश हुआ लेकिन यह आदेश भी कागजों तक सिमट गया।
सदन में उठा था मुद्दा
गांव के रहने वाले व अधिवक्ता अभीष्ट विक्रम सिंह के प्रार्थना पत्र पर कांग्रेस एमएलसी दीपक सिंह ने नियम 115 के तहत खेल मैदान, व स्टेडियम की भूमि पर अतिक्रमण का मुद्दा 11 जुलाई 2017 को विधान परिषद में उठाया। बावजूद इसके भूमि अतिक्रमण मुक्त नहीं हो पाई।
हाईकोर्ट गए खिलाड़ी अंश सिंह
प्रभावित भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए गांव के रहने वाले खिलाड़ी अंश सिंह ने 14 दिसंबर 2021 को मुख्य सचिव, आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद के अलावा कमिश्नर अयोध्या, डीएम व एसडीएम से मांग की। इसके अलावा संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायत की। इसके बाद लेखपाल आशीष सिंह द्वारा अतिक्रमणकारियों द्वारा पक्का मकान बना लेने व पूर्व में न्यायालय द्वारा बेदखल होने की आख्या प्रस्तुत की गई। हालांकि भूमि अतिक्रमण मुक्त नहीं हो सकी। इसके बाद अंश ने 27 जनवरी 2022 को हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में पीआईएल दाखिल की। इस पर सात, 14, 15 फरवरी व तीन मार्च को सुनवाई हुई।
तीन मार्च को दिया निर्देश
सुनवाई पूरी होने के बाद तीन मार्च को न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह ने तहसीलदार अमेठी को निर्देश दिया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 ग्राम सभा भूमि अंतर्गत धारा 67(1) के तहत न्यायालय में विचाराधीन सभी वाद का निस्तारण करते हुए खेल मैदान, स्कूल का खेल मैदान, ग्रामीण मिनी स्टेडियम व पास स्थित ऊसर, बंजर और नवीन परती खाते की भूमि को छह माह में अतिक्रमण मुक्त कराकर कोर्ट को अवगत कराएं।
जल्द कराया जाएगा बेदखल
तहसीलदार बृजमोहन ने बताया कि छह महीने में जो मुकदमे हुए हैं उनकी सुनवाई पूरी कर निस्तारित करने तथा अतिक्रमणकारियों के खिलाफ बेदखली की कार्रवाई पूरी करने का निर्देश है। मुकदमा निस्तारित करके सभी को बेदखल कराया जाएगा।
नहीं मिला कोई निर्देश
लेखपाल आशीष सिंह ने कहा कि अभी तक हमें रिट या आदेश नहीं प्राप्त हुआ है। 14 फरवरी को जो निर्देश आया था उस निर्देश को पूरा करके पत्रावली दाखिल कर दी गई है। अधिकारी जो निर्णय लेंगे उस पर अमल कराया जाएगा।
करेंगे हर संभव कोशिश
याचिका दाखिल करने वाली खिलाड़ी अंश सिंह ने बताया कि अतिक्रमण के कारण खेल परिसर में हॉकी, फुटबाल, दौड़ जैसे किसी भी एक खेल का पूर्ण मैदान नहीं बन पा रहा है। जबकि खेल मैदान, स्कूल का मैदान, ग्रामीण मिनी स्टेडियम व ग्राम सभा की भूमि मिलाकर लगभग 24 बीघा भूमि है। भूमि अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए विधिक रूप से हर संभव कोशिश की जाएगी।
लंबे समय से आबाद हैं हम
सुग्रीव सिंह ने बताया कि हम लोग जमींदारी उन्मूलन कानून आने के पहले से ही इस भूमि पर रह रहे हैं। हमारे रहन-सहन में बाधा आ जाएगी। हम लोग कहां रहने जाएंगे।
अमृतलाल ने कहा कि मेरा मकान 50-60 साल से बना है। अगर हम लोगों का मकान गिरा दिया जाएगा तब हम कहां जाएंगे। इसके अलावा कुछ है भी नहीं हम लोगों के पास। सरकार को हमारी स्थिति पर भी विचार करना चाहिए।