{"_id":"66340ac5df458f0267061dd4","slug":"registration-of-36-private-hospitals-canceled-amethi-news-c-96-1-brp1002-117963-2024-05-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amethi News: 36 निजी अस्पतालों का पंजीकरण रद्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amethi News: 36 निजी अस्पतालों का पंजीकरण रद्द
Fri, 03 May 2024 03:21 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Fri, 03 May 2024 03:21 AM IST
विज्ञापन
अमेठी सिटी। स्वास्थ्य विभाग ने जिले में चल रहे अस्पतालों व पैथाेलॉजी के नवीनीकरण के लिए 30 अप्रैल तक पोर्टल पर आवेदन करने की व्यवस्था की थी लेकिन, इसके बाद भी 36 चिकित्सा संस्थानों ने कोई आवेदन नहीं किया। अब इन संस्थानों का पंजीकरण रद्द हो गया है। इन निजी चिकित्सा संस्थानों को पंजीकरण के लिए नये सिरे से आवेदन करना होगा। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग ऐसे संस्थानों की सूची तैयार कर रहा है।गत वर्ष जिले में कुल 102 नर्सिंग हाेम व हाॅस्पिटल, 19 क्लीनिक व 34 पैथालॉजी का पंजीकरण था। 155 चिकित्सा संस्थानों के सापेक्ष इस साल 126 ने ही आवेदन किया है। इसमें चार संस्थानों का आवेदन नया है। पुराने 122 में से तीन ने दो बार आवेदन कर दिया। पुराने चिकित्सा संस्थानों में से 119 ऐसे बचे हैं, जिन्होंने नवीनीकरण के लिए आवेदन किया है। इस तरह 36 चिकित्सा संस्थान ऐसे हैं, जो निर्धारित तिथि तक पोर्टल पर आवेदन नहीं किए, ऐसे में अब उनका पंजीकरण रद्द हो गया है।
नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. राम प्रसाद ने बताया कि जिन संस्थानों ने नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया है, उनका पंजीकरण स्वत: निरस्त हो गया। अब उन्हें नये सिरे से पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा। ऐसे संस्थानों की अलग से सूची तैयार कराई जा रही है।
मानकों में होता है खेल
- अस्पतालों के पंजीकरण में मानकों की अनदेखी की कई बार शिकायतें आती है। दरअसल, व्यवस्था है कि यदि 49 बेड का अस्पताल है तो उसका पंजीकरण सीएमओ के स्तर से हो जाएगा। इससे ऊपर की बेड क्षमता के अस्पतालों का पंजीकरण डीएम की अध्यक्षता वाली टीम को करना होता है।
विज्ञापन
इसमें एमबीबीएस चिकित्सक के साथ ही ऑनकाल बेहोशी के डाॅक्टर, पैरा मेडिकल स्टाफ के अलावा अग्निशमन विभाग से एनओसी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी के साथ अन्य कॉलम पूरे करने होते हैं। इन्हीं मानकों में खेल होता है। दरअसल, जिले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कोई नहीं है, और न ही बायो मेडिकल वेस्ट की कोई कंपनी।
मानक पूरे होंगे, तभी होगा पंजीकरण
सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह का कहना है कि निजी अस्पतालों का पंजीकरण तभी किया जाता है, जब मानक पूरे होते हैं। टीम इसकी जांच करके रिपोर्ट देती है। अभिलेखों का सत्यापन कराया जाता है। अगर कहीं पर भी लापरवाही मिलेगी तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. राम प्रसाद ने बताया कि जिन संस्थानों ने नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया है, उनका पंजीकरण स्वत: निरस्त हो गया। अब उन्हें नये सिरे से पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा। ऐसे संस्थानों की अलग से सूची तैयार कराई जा रही है।
विज्ञापन
मानकों में होता है खेल
- अस्पतालों के पंजीकरण में मानकों की अनदेखी की कई बार शिकायतें आती है। दरअसल, व्यवस्था है कि यदि 49 बेड का अस्पताल है तो उसका पंजीकरण सीएमओ के स्तर से हो जाएगा। इससे ऊपर की बेड क्षमता के अस्पतालों का पंजीकरण डीएम की अध्यक्षता वाली टीम को करना होता है।
विज्ञापन
इसमें एमबीबीएस चिकित्सक के साथ ही ऑनकाल बेहोशी के डाॅक्टर, पैरा मेडिकल स्टाफ के अलावा अग्निशमन विभाग से एनओसी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी के साथ अन्य कॉलम पूरे करने होते हैं। इन्हीं मानकों में खेल होता है। दरअसल, जिले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कोई नहीं है, और न ही बायो मेडिकल वेस्ट की कोई कंपनी।
मानक पूरे होंगे, तभी होगा पंजीकरण
सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह का कहना है कि निजी अस्पतालों का पंजीकरण तभी किया जाता है, जब मानक पूरे होते हैं। टीम इसकी जांच करके रिपोर्ट देती है। अभिलेखों का सत्यापन कराया जाता है। अगर कहीं पर भी लापरवाही मिलेगी तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।