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जिले में तेज हुई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां
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गौरीगंज (अमेठी)। भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी पर जिले में होने वाले आयोजनों की तैयारियां तेज हो गई हैं। जिले भर के थानों से लेकर नंदमहर व त्रिसुंडी में भी विशेष आयोजन होंगे, जिन्हें लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं।
प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लिया था। स्थानीय तहसील के नंदमहर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को प्रति वर्ष भव्य आयोजन किया जाता है।
ऐसा ही एक भव्य आयोजन पिछले करीब तीन दशक से भादर ब्लॉक के त्रिसुंडी में भी होता आ रहा है। जिले की पुलिस लाइंस व सभी थानों में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को परंपरागत रूप से मनाया जाता है। कोविड काल में शासन के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए आयोजन को यादगार बनाने के लिए इन सभी स्थानों पर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
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जन्माष्टमी पर ऐसे करें श्रीकृष्ण का पूजन
जगदीशपुर। पं. अनिल शास्त्री ने बताया कि पूजा स्थल पर एक छोटी सी चौकी लेकर उस पर लाल रंग का वस्त्र बिछाएं। इसके पश्चात उसके ऊपर एक खाली पात्र रख दें। इस पात्र में श्रीकृष्ण की मूर्ति को स्थापित करें। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलित करें और साथ में ही धूप भी जलाकर रख दें।
भगवान श्रीकृष्ण को अपने मन में याद करते हुए उन्हें आमंत्रित करें और अपने पूजन को स्वीकार करने की याचना करें। इसके बाद श्री कृष्ण की मूर्ति का पहले पंचामृत से अभिषेक करें और फिर उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं। श्रीकृष्ण की मूर्ति को वस्त्र धारण करवाएं तथा उनका साज-श्रृंगार करें। फिर उन्हें पहले दीप दिखाने के बाद धूप बत्ती दिखाएं।
श्रीकृष्ण का तिलक करने के लिए अष्टगंध चंदन अथवा रोली का उपयोग करें। टीके के साथ अक्षत लगाना न भूलें। इसके बाद श्री कृष्ण की पसंद कि चीजें उन्हें भोग के रूप में अर्पित करें। इसके लिए आप मुख्य रूप से माखन का उपयोग कर सकते हैं।
फल, मिश्री और मिठाई भी चढ़ा सकते हैं। तुलसी का पत्ता अवश्य चढ़ाएं। गंगाजल अर्पित करें। अब श्रीकृष्ण को उनके बाल रूप में याद करें और सोचें कि वो पीपल के पत्ते पर विश्राम कर रहे हैं और अंगूठा चूस रहे हैं। श्री कृष्ण के नाम का जाप करें। उनके नाम का जाप करते हुए अर्थ का स्मरण करें। कृष्ण का अर्थ है जो मोक्ष को अपनी ओर आकृष्ट करे। अंत में प्रार्थना करें। चौकी पर पुष्पादि चढ़ाएं और कृष्ण को धन्यवाद कहें और साथ ही किसी भी भूल के लिए क्षमा याचना करें।
शुभ तिथि व मुहूर्त
जगदीशपुर। पं. अनिल कुमार शास्त्री के अनुसार भाद्रपद की अष्टमी तिथि 30 अगस्त (सोमवार) को पड़ रही है। इसी दिन कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। अष्टमी तिथि की शुरुआत 29 अगस्त को रात 11:25 बजे हो जाएगी। इसका समापन 30 अगस्त को ही रात 1:59 बजे होगा। श्रीकृष्ण की पूजा करने का शुभ मुहूर्त 30 अगस्त को रात 11:59 बजे से रात 12:44 बजे तक रहेगा। इस हिसाब से पूजा करने के शुभ मुहूर्त की कुल अवधि 45 मिनट का होगा।
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प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लिया था। स्थानीय तहसील के नंदमहर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को प्रति वर्ष भव्य आयोजन किया जाता है।
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ऐसा ही एक भव्य आयोजन पिछले करीब तीन दशक से भादर ब्लॉक के त्रिसुंडी में भी होता आ रहा है। जिले की पुलिस लाइंस व सभी थानों में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को परंपरागत रूप से मनाया जाता है। कोविड काल में शासन के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए आयोजन को यादगार बनाने के लिए इन सभी स्थानों पर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
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जन्माष्टमी पर ऐसे करें श्रीकृष्ण का पूजन
जगदीशपुर। पं. अनिल शास्त्री ने बताया कि पूजा स्थल पर एक छोटी सी चौकी लेकर उस पर लाल रंग का वस्त्र बिछाएं। इसके पश्चात उसके ऊपर एक खाली पात्र रख दें। इस पात्र में श्रीकृष्ण की मूर्ति को स्थापित करें। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलित करें और साथ में ही धूप भी जलाकर रख दें।
भगवान श्रीकृष्ण को अपने मन में याद करते हुए उन्हें आमंत्रित करें और अपने पूजन को स्वीकार करने की याचना करें। इसके बाद श्री कृष्ण की मूर्ति का पहले पंचामृत से अभिषेक करें और फिर उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं। श्रीकृष्ण की मूर्ति को वस्त्र धारण करवाएं तथा उनका साज-श्रृंगार करें। फिर उन्हें पहले दीप दिखाने के बाद धूप बत्ती दिखाएं।
श्रीकृष्ण का तिलक करने के लिए अष्टगंध चंदन अथवा रोली का उपयोग करें। टीके के साथ अक्षत लगाना न भूलें। इसके बाद श्री कृष्ण की पसंद कि चीजें उन्हें भोग के रूप में अर्पित करें। इसके लिए आप मुख्य रूप से माखन का उपयोग कर सकते हैं।
फल, मिश्री और मिठाई भी चढ़ा सकते हैं। तुलसी का पत्ता अवश्य चढ़ाएं। गंगाजल अर्पित करें। अब श्रीकृष्ण को उनके बाल रूप में याद करें और सोचें कि वो पीपल के पत्ते पर विश्राम कर रहे हैं और अंगूठा चूस रहे हैं। श्री कृष्ण के नाम का जाप करें। उनके नाम का जाप करते हुए अर्थ का स्मरण करें। कृष्ण का अर्थ है जो मोक्ष को अपनी ओर आकृष्ट करे। अंत में प्रार्थना करें। चौकी पर पुष्पादि चढ़ाएं और कृष्ण को धन्यवाद कहें और साथ ही किसी भी भूल के लिए क्षमा याचना करें।
शुभ तिथि व मुहूर्त
जगदीशपुर। पं. अनिल कुमार शास्त्री के अनुसार भाद्रपद की अष्टमी तिथि 30 अगस्त (सोमवार) को पड़ रही है। इसी दिन कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी। अष्टमी तिथि की शुरुआत 29 अगस्त को रात 11:25 बजे हो जाएगी। इसका समापन 30 अगस्त को ही रात 1:59 बजे होगा। श्रीकृष्ण की पूजा करने का शुभ मुहूर्त 30 अगस्त को रात 11:59 बजे से रात 12:44 बजे तक रहेगा। इस हिसाब से पूजा करने के शुभ मुहूर्त की कुल अवधि 45 मिनट का होगा।