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Amethi News: सच्चे मित्र से खुश रहते हैं भगवान
Mon, 21 Apr 2025 12:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 21 Apr 2025 12:55 AM IST
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गौरीगंज के पूरे मदनसिंह बलीपुर खुर्दवा में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु।-स्रोत - आयोजक
अमेठी सिटी। आज की मित्रता केवल स्वार्थ पर आधारित रह गई है। सच्चे मन से मित्रता करने वाले से भगवान भी खुश रहते हैं। शुद्ध आचरण से की गई मित्रता का कोई मोल नहीं होता है। ये बातें गौरीगंज के पूरे मदनसिंह बलीपुर खुर्दवा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन रविवार को प्रवाचक कमलेश द्विवेदी ने कहीं।
प्रवाचक ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता की कथा सुनाई। कहा कि भागवत कथा भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। गलती करने के बाद क्षमा मांगना मनुष्य का गुण है। दूसरे की गलती को बिना द्वेष के क्षमा कर दे, वह मनुष्य महात्मा होता है। प्रवाचक ने कहा कि सुदामा भगवान कृष्ण के परम मित्र होने के बावजूद भिक्षा मांगकर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। गरीबी के बावजूद वह सदैव भगवान के ध्यान में मग्न रहते थे।
पत्नी के बार-बार आग्रह करने पर सुदामा भगवान श्रीकृष्ण से मिलने के लिए द्वारिका पहुंचते हैं। भगवान नंगे पैर दौड़कर मित्र को गले से लगा लेते हैं। भगवान सुदामा को सिंहासन पर बैठाकर उनके चरण धोते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से राजा परीक्षित के मन से मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है। तक्षक के डसने पर राजा परीक्षित परमधाम को प्राप्त करते हैं। इस मौके पर राजेंद्र प्रसाद मिश्र, गिरिजाशंकर मिश्र आदि मौजूद रहे।
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प्रवाचक ने श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता की कथा सुनाई। कहा कि भागवत कथा भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। गलती करने के बाद क्षमा मांगना मनुष्य का गुण है। दूसरे की गलती को बिना द्वेष के क्षमा कर दे, वह मनुष्य महात्मा होता है। प्रवाचक ने कहा कि सुदामा भगवान कृष्ण के परम मित्र होने के बावजूद भिक्षा मांगकर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। गरीबी के बावजूद वह सदैव भगवान के ध्यान में मग्न रहते थे।
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पत्नी के बार-बार आग्रह करने पर सुदामा भगवान श्रीकृष्ण से मिलने के लिए द्वारिका पहुंचते हैं। भगवान नंगे पैर दौड़कर मित्र को गले से लगा लेते हैं। भगवान सुदामा को सिंहासन पर बैठाकर उनके चरण धोते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से राजा परीक्षित के मन से मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है। तक्षक के डसने पर राजा परीक्षित परमधाम को प्राप्त करते हैं। इस मौके पर राजेंद्र प्रसाद मिश्र, गिरिजाशंकर मिश्र आदि मौजूद रहे।
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