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Amethi News: हमारे सुख-दुख के साथी होते हैं मित्र
Sat, 22 Mar 2025 12:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 22 Mar 2025 12:32 AM IST
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अमेठी। मित्र हमारे सुख-दुख के साथी होते हैं। किसी भी परिस्थिति में मित्र हमेशा साथ खड़े होते हैं। भारतीय परंपरा में मित्रता की बहुत से कहानियां प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक कृष्ण और सुदामा की कहानी है। भारतीय परंपरा में मित्र का जीवन में बहुत बड़ा स्थान है। जीवन में माता-पिता और गुरु के बाद मित्र को विशेष स्थान दिया गया है। ये बातें अमेठी कस्बा स्थित लॉन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन शुक्रवार को प्रवाचक सुभाष शांडिल्य महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि जब कभी मित्रता की बात होती है तो कृष्ण और सुदामा की मिसाल दी जाती है। श्रीकृष्ण बालपन में ऋषि संदीपनि के यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे थे तभी उनकी मित्रता सुदामा से हुई थी। शिक्षा-दीक्षा समाप्त होने के बाद भगवान कृष्ण राजा बन गए, वहीं दूसरी तरफ सुदामा के बुरे दौर की शुरुआत हो चुकी थी। बुरे दिनों से परेशान होकर सुदामा की पत्नी ने उन्हें राजा कृष्ण से मिलने जाने के लिए कहा। इस पर सुदामा अपने बाल सखा कृष्ण से मिलने द्वारिका गए। कृष्ण अपने मित्र सुदामा के आने का संदेश पाकर नंगे पैर ही उन्हें लेने के लिए दौड़ पड़ते हैं। भगवान कृष्ण ने मित्र सुदामा के पैर अपने आंसुओं से धोए।
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प्रवाचक ने कहा कि जब कभी मित्रता की बात होती है तो कृष्ण और सुदामा की मिसाल दी जाती है। श्रीकृष्ण बालपन में ऋषि संदीपनि के यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे थे तभी उनकी मित्रता सुदामा से हुई थी। शिक्षा-दीक्षा समाप्त होने के बाद भगवान कृष्ण राजा बन गए, वहीं दूसरी तरफ सुदामा के बुरे दौर की शुरुआत हो चुकी थी। बुरे दिनों से परेशान होकर सुदामा की पत्नी ने उन्हें राजा कृष्ण से मिलने जाने के लिए कहा। इस पर सुदामा अपने बाल सखा कृष्ण से मिलने द्वारिका गए। कृष्ण अपने मित्र सुदामा के आने का संदेश पाकर नंगे पैर ही उन्हें लेने के लिए दौड़ पड़ते हैं। भगवान कृष्ण ने मित्र सुदामा के पैर अपने आंसुओं से धोए।
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