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एनी बुलियन ने गौरीगंज से ठगे 25 करोड़
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गौरीगंज (अमेठी)। एनी बुलियन कंपनी में कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने के फेर में स्थानीय विस क्षेत्र से भी 25 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश हुआ है। संचालक की गिरफ्तारी के बाद स्थानीय एजेंट अपने घरों से फरार हो चुके हैं। कई वर्ष पहले निर्मित लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग में विस क्षेत्र के कई गांवों के किसानों की भूमि अधिग्रहीत हुई थी।
लखनऊ, सुल्तानपुर व प्रतापगढ़ में कई करोड़ की ठगी करने वाली एनी बुलियन कंपनी का जाल जगदीशपुर के साथ ही गौरीगंज क्षेत्र में भी गहरे से फैला हुआ था। यहां कंपनी का दफ्तर तो नहीं था लेकिन उसके एजेंट पूरे क्षेत्र में फैले थे। एजेंट लोगों को 40 फीसदी ब्याज मिलने की गारंटी देकर उनका निवेश कराते थे। यहां ज्यादातर एजेेंट स्थानीय (यह ऐसे एजेंट थे जो पहले तो कंपनी में निवेश किए काफी दिनों तक फिर 40 फीसदी ब्याज पाने के बाद कंपनी के एजेंट बन गए) थे।
करीब पांच वर्ष पहले लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि में विस क्षेत्र के कई गांव शामिल थे। भूमि अधिग्रहण के बाद किसानों को भारीभरकम मुआवजे की राशि मिली। ज्यादातर लोगों ने मुआवजे में मिली अधिकांश राशि का निवेश कंपनी में 40 फीसदी ब्याज मिलने के लालच में कर दिया। निवेश करने वालों के अनुसार एजेंट कंपनी का दफ्तर लखनऊ में होने की बात कहते थे। पिछले कई महीनों से नियमित मिलने वाली ब्याज की राशि मिलना बंद हो गई थी।
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बृहस्पतिवार को कंपनी संचालक अजीत गुप्ता के लखनऊ में गिरफ्तार होने की खबर सार्वजनिक हुई तो लोगों के होश उड़ गए। अकेले गौरीगंज क्षेत्र के गांव बस्तीदेई, मझवारा, सरमे, भटगवां, परशरामपुर, गुलालपुर व बलभद्रपुर समेत दर्जनों गांव के किसानों ने कंपनी में 25 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया है। कंपनी संचालक के गिरफ्तार होने के बाद ब्याज की राशि जल्द मिलने की बात कहने वाले स्थानीय एजेंट अपने घरों से भाग गए हैं। यहां तक की उनका मोबाइल फोन भी बंद हो गया है।
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लखनऊ, सुल्तानपुर व प्रतापगढ़ में कई करोड़ की ठगी करने वाली एनी बुलियन कंपनी का जाल जगदीशपुर के साथ ही गौरीगंज क्षेत्र में भी गहरे से फैला हुआ था। यहां कंपनी का दफ्तर तो नहीं था लेकिन उसके एजेंट पूरे क्षेत्र में फैले थे। एजेंट लोगों को 40 फीसदी ब्याज मिलने की गारंटी देकर उनका निवेश कराते थे। यहां ज्यादातर एजेेंट स्थानीय (यह ऐसे एजेंट थे जो पहले तो कंपनी में निवेश किए काफी दिनों तक फिर 40 फीसदी ब्याज पाने के बाद कंपनी के एजेंट बन गए) थे।
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करीब पांच वर्ष पहले लखनऊ-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए अधिग्रहीत की गई भूमि में विस क्षेत्र के कई गांव शामिल थे। भूमि अधिग्रहण के बाद किसानों को भारीभरकम मुआवजे की राशि मिली। ज्यादातर लोगों ने मुआवजे में मिली अधिकांश राशि का निवेश कंपनी में 40 फीसदी ब्याज मिलने के लालच में कर दिया। निवेश करने वालों के अनुसार एजेंट कंपनी का दफ्तर लखनऊ में होने की बात कहते थे। पिछले कई महीनों से नियमित मिलने वाली ब्याज की राशि मिलना बंद हो गई थी।
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बृहस्पतिवार को कंपनी संचालक अजीत गुप्ता के लखनऊ में गिरफ्तार होने की खबर सार्वजनिक हुई तो लोगों के होश उड़ गए। अकेले गौरीगंज क्षेत्र के गांव बस्तीदेई, मझवारा, सरमे, भटगवां, परशरामपुर, गुलालपुर व बलभद्रपुर समेत दर्जनों गांव के किसानों ने कंपनी में 25 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया है। कंपनी संचालक के गिरफ्तार होने के बाद ब्याज की राशि जल्द मिलने की बात कहने वाले स्थानीय एजेंट अपने घरों से भाग गए हैं। यहां तक की उनका मोबाइल फोन भी बंद हो गया है।