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Amethi News: संजय गांधी अस्पताल के सीओओ सहित चार के खिलाफ चार्जशीट
Sat, 30 Mar 2024 12:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 30 Mar 2024 12:55 AM IST
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अमेठी। मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। वर्ष 2023 के सितंबर माह में महिला मरीज की मौत के बाद काफी हंगामा हुआ था। जिला प्रशासन ने अस्पताल को बंद करा दिया था, बाद में उच्च न्यायालय के आदेश पर अस्पताल खुला था। उस वक्त दर्ज कराए गए मुकदमे की जांच कर रही पुलिस ने मामले में आरोपित अस्पताल के सीओओ (चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर) सहित चार के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया है।
मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल में मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के रामशाहपुर निवासी दिव्या शुक्ला 14 सितंबर 2023 को पथरी का ऑपरेशन कराने गई थी। ऑपरेशन थियेटर में बेहोशी का इंजेक्शन देने के दौरान तबीयत बिगड़ने पर दिव्या को लखनऊ ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई थी। मृतका के परिजनों ने शव रखकर प्रदर्शन किया था। परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।
स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के बाद अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर सभी सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया था। बाद में उच्च न्यायालय के आदेश पर 18 दिन बाद अस्पताल खुला था। पीड़ित पक्ष के करीबी व अधिवक्ता कालिका प्रसाद मिश्र ने शुक्रवार को बताया कि उस वक्त दर्ज मुकदमे की विवेचना कर रहे मुंशीगंज थाने के दरोगा सुरेश कुमार ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया है।
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अस्पताल के सीओओ अवधेश शर्मा निवासी बी-29 न्यू शांतिनगर थाना जनकगंज ग्वालियर मध्य प्रदेश, डॉ. उजैर अब्दुल्लाह सिद्दीकी निवासी हनीफ नगर प्यारे पट्टी रोग थाना कोतवाली नगर सुल्तानपुर, डॉ. मोहम्मद रजा निवासी दादूपुर सुल्तानपुर व डॉ. शुभम द्विवेदी निवासी विकास खंड गोमतीनगर लखनऊ के खिलाफ धारा 304 ए के तहत चार्जशीट दाखिल की गई है। मामले के विवेचक ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल करने की पुष्टि की है। अस्पताल प्रशासन के सीओओ का कहना है कि चार्जशीट की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो न्यायालय की शरण ली जाएगी।
सीएमओ की टीम की जांच में मिलीं थी कमियां
मरीज की मौत के मामले में सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने एसीएमओ डॉ. राम प्रसाद, डिप्टी सीएमओ डाॅ. पीके उपाध्याय व जिला संयुक्त अस्पताल के एनेस्थेटिस्ट डाॅ. अभय गोयल की टीम बनाकर जांच कराई थी। जांच में स्वास्थ्य अधिकारियों ने लापरवाही उजागर करते हुए रिपाेर्ट दी थी।
इसमें पाया गया था कि मरीज दिव्या शुक्ला को 14 सितंबर 2023 को समय 12:30 बजे जनरल एनेस्थिसिया दी गई। अभिलेखों के अनुसार पूर्व की जांचों में मरीज दिव्या की स्थिति सामान्य थी। मरीज के प्री एनेस्थेटिस्ट से संबंधित कोई प्रमाण नहीं मिले थे। निश्चेतक द्वारा बताया गया कि उनके द्वारा मरीज की प्री एनेस्थेटिस्ट जांच की गई थी। पाया गया था कि मरीज को जनरल एनेस्थिसिया देने से गंभीर स्थिति होने पर मरीज को 80 मिनट बाद दोपहर 01:50 बजे आईसीयू में भर्ती किया गया। मरीज की गंभीर स्थिति होने पर तत्काल आईसीयू में भर्ती किया जाना जरूरी था।
पाया गया कि उस 80 मिनट में किसी विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा मरीज का उपचार नहीं किया गया। हार्ट अटैक आने पर मरीज के इलाज में लापरवाही पाई गई थी। जांच टीम की रिपोर्ट के अनुसार हार्ट अटैक आने के उपरांत लगभग 12 घंटे बाद 16 सितंबर 2023 को 01:50 बजे हायर सेन्टर मेदान्ता, लखनऊ के लिए रेफर किया गया। चिकित्सालय में हार्ट अटैक के उपचार से संबंधित कोई कार्डियोलॉजिस्ट / एमडी मेडिसिन की व्यवस्था नहीं थी। मरीज की अत्यंत गम्भीर स्थिति के बावजूद रेफर करने में देरी की गई। स्वास्थ्य विभाग ने इस रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल की सेवाओं पर रोक लगा दिया था।
दोनों तरफ से हुए थे आंदोलन
- महिला की मौत के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर अधिवक्ता कालिका प्रसाद मिश्र ने कैंडल मार्च निकालकर आंदोलन किया था। भाजपाइयों ने भी सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया था। वहीं, अस्पताल बंद होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने जबरदस्त आंदोलन चलाया था। यहां तक कि रायबरेली सांसद सोनिया गांधी के प्रतिनिधि किशोरी लाल शर्मा तक ने यहां पर डेरा डाल रखा था।
उप मुख्यमंत्री ने लिया था संज्ञान
- महिला की मौत के मामले को उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक तक ने संज्ञान लेते हुए सीएमओ से रिपोर्ट मांगी थी। वहीं, अस्पताल बंद होने के बाद पीलीभीत के भाजपा सांसद वरुण गांधी ने अस्पताल खुलवाने को लेकर पत्र लिखा था।
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मुंशीगंज स्थित संजय गांधी अस्पताल में मुसाफिरखाना कोतवाली क्षेत्र के रामशाहपुर निवासी दिव्या शुक्ला 14 सितंबर 2023 को पथरी का ऑपरेशन कराने गई थी। ऑपरेशन थियेटर में बेहोशी का इंजेक्शन देने के दौरान तबीयत बिगड़ने पर दिव्या को लखनऊ ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई थी। मृतका के परिजनों ने शव रखकर प्रदर्शन किया था। परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था।
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स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के बाद अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर सभी सेवाओं पर प्रतिबंध लगा दिया था। बाद में उच्च न्यायालय के आदेश पर 18 दिन बाद अस्पताल खुला था। पीड़ित पक्ष के करीबी व अधिवक्ता कालिका प्रसाद मिश्र ने शुक्रवार को बताया कि उस वक्त दर्ज मुकदमे की विवेचना कर रहे मुंशीगंज थाने के दरोगा सुरेश कुमार ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया है।
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अस्पताल के सीओओ अवधेश शर्मा निवासी बी-29 न्यू शांतिनगर थाना जनकगंज ग्वालियर मध्य प्रदेश, डॉ. उजैर अब्दुल्लाह सिद्दीकी निवासी हनीफ नगर प्यारे पट्टी रोग थाना कोतवाली नगर सुल्तानपुर, डॉ. मोहम्मद रजा निवासी दादूपुर सुल्तानपुर व डॉ. शुभम द्विवेदी निवासी विकास खंड गोमतीनगर लखनऊ के खिलाफ धारा 304 ए के तहत चार्जशीट दाखिल की गई है। मामले के विवेचक ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल करने की पुष्टि की है। अस्पताल प्रशासन के सीओओ का कहना है कि चार्जशीट की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो न्यायालय की शरण ली जाएगी।
सीएमओ की टीम की जांच में मिलीं थी कमियां
मरीज की मौत के मामले में सीएमओ डॉ. अंशुमान सिंह ने एसीएमओ डॉ. राम प्रसाद, डिप्टी सीएमओ डाॅ. पीके उपाध्याय व जिला संयुक्त अस्पताल के एनेस्थेटिस्ट डाॅ. अभय गोयल की टीम बनाकर जांच कराई थी। जांच में स्वास्थ्य अधिकारियों ने लापरवाही उजागर करते हुए रिपाेर्ट दी थी।
इसमें पाया गया था कि मरीज दिव्या शुक्ला को 14 सितंबर 2023 को समय 12:30 बजे जनरल एनेस्थिसिया दी गई। अभिलेखों के अनुसार पूर्व की जांचों में मरीज दिव्या की स्थिति सामान्य थी। मरीज के प्री एनेस्थेटिस्ट से संबंधित कोई प्रमाण नहीं मिले थे। निश्चेतक द्वारा बताया गया कि उनके द्वारा मरीज की प्री एनेस्थेटिस्ट जांच की गई थी। पाया गया था कि मरीज को जनरल एनेस्थिसिया देने से गंभीर स्थिति होने पर मरीज को 80 मिनट बाद दोपहर 01:50 बजे आईसीयू में भर्ती किया गया। मरीज की गंभीर स्थिति होने पर तत्काल आईसीयू में भर्ती किया जाना जरूरी था।
पाया गया कि उस 80 मिनट में किसी विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा मरीज का उपचार नहीं किया गया। हार्ट अटैक आने पर मरीज के इलाज में लापरवाही पाई गई थी। जांच टीम की रिपोर्ट के अनुसार हार्ट अटैक आने के उपरांत लगभग 12 घंटे बाद 16 सितंबर 2023 को 01:50 बजे हायर सेन्टर मेदान्ता, लखनऊ के लिए रेफर किया गया। चिकित्सालय में हार्ट अटैक के उपचार से संबंधित कोई कार्डियोलॉजिस्ट / एमडी मेडिसिन की व्यवस्था नहीं थी। मरीज की अत्यंत गम्भीर स्थिति के बावजूद रेफर करने में देरी की गई। स्वास्थ्य विभाग ने इस रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल की सेवाओं पर रोक लगा दिया था।
दोनों तरफ से हुए थे आंदोलन
- महिला की मौत के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर अधिवक्ता कालिका प्रसाद मिश्र ने कैंडल मार्च निकालकर आंदोलन किया था। भाजपाइयों ने भी सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया था। वहीं, अस्पताल बंद होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने जबरदस्त आंदोलन चलाया था। यहां तक कि रायबरेली सांसद सोनिया गांधी के प्रतिनिधि किशोरी लाल शर्मा तक ने यहां पर डेरा डाल रखा था।
उप मुख्यमंत्री ने लिया था संज्ञान
- महिला की मौत के मामले को उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक तक ने संज्ञान लेते हुए सीएमओ से रिपोर्ट मांगी थी। वहीं, अस्पताल बंद होने के बाद पीलीभीत के भाजपा सांसद वरुण गांधी ने अस्पताल खुलवाने को लेकर पत्र लिखा था।