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Amethi News: कल्पवृक्ष के समान है भागवत कथा
Mon, 21 Apr 2025 12:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Mon, 21 Apr 2025 12:55 AM IST
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अमेठी सिटी। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य की सभी इच्छाओं को पूरा करती है। यह कल्पवृक्ष के समान है। इसके लिए मनुष्य को निर्मल भाव से कथा सुनने और सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए। ये बातें भेंटुआ ब्लॉक के पूरे द्वारिका गांव में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन प्रवाचक आचार्य गोविंद त्रिपाठी महाराज ने कहीं।
प्रवाचक ने कहा कि भागवत कथा भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। भागवत की महिमा सुनाते हुए कहा कि एक बार नारदजी ने चारों धाम की यात्रा की, लेकिन उनके मन को शांति नहीं हुई। नारदजी वृंदावन धाम की ओर जा रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि एक सुंदर युवती की गोद में दो बुजुर्ग लेटे हुए थे, जो अचेत थे। युवती बोली, महाराज मेरा नाम भक्ति है। यह दोनों मेरे पुत्र हैं, जिनके नाम ज्ञान और वैराग्य हैं। यह वृंदावन में दर्शन करने जा रहे थे, लेकिन बृज में प्रवेश करते ही यह दोनों अचेत हो गए। आप इन्हें जगा दीजिए।
इसके बाद नारदजी ने चारों वेद, छह शास्त्र और 18 पुराण व गीता पाठ भी सुना दिया, लेकिन वह नहीं जागे। नारद ने यह समस्या मुनियों के समक्ष रखी। ज्ञान, वैराग्य को जगाने का उपाय पूछा। इस अवसर पर डॉ. सुभाष तिवारी, रामचन्द्र तिवारी, अरुण तिवारी, रमेश तिवारी, प्रदीप तिवारी, कैलाशनाथ तिवारी, संजय तिवारी, आलोक तिवारी, विद्या देवी एवं प्रभावती देवी आदि मौजूद रहे।
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प्रवाचक ने कहा कि भागवत कथा भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। भागवत की महिमा सुनाते हुए कहा कि एक बार नारदजी ने चारों धाम की यात्रा की, लेकिन उनके मन को शांति नहीं हुई। नारदजी वृंदावन धाम की ओर जा रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि एक सुंदर युवती की गोद में दो बुजुर्ग लेटे हुए थे, जो अचेत थे। युवती बोली, महाराज मेरा नाम भक्ति है। यह दोनों मेरे पुत्र हैं, जिनके नाम ज्ञान और वैराग्य हैं। यह वृंदावन में दर्शन करने जा रहे थे, लेकिन बृज में प्रवेश करते ही यह दोनों अचेत हो गए। आप इन्हें जगा दीजिए।
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इसके बाद नारदजी ने चारों वेद, छह शास्त्र और 18 पुराण व गीता पाठ भी सुना दिया, लेकिन वह नहीं जागे। नारद ने यह समस्या मुनियों के समक्ष रखी। ज्ञान, वैराग्य को जगाने का उपाय पूछा। इस अवसर पर डॉ. सुभाष तिवारी, रामचन्द्र तिवारी, अरुण तिवारी, रमेश तिवारी, प्रदीप तिवारी, कैलाशनाथ तिवारी, संजय तिवारी, आलोक तिवारी, विद्या देवी एवं प्रभावती देवी आदि मौजूद रहे।
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