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1335 वक्फ संपत्तियों की भेज दी गई लिस्ट
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गौरीगंज (अमेठी)। वक्फ संपत्तियों के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज प्रकरणों की शासन के निर्देश पर दोबारा जांच होगी। 1988 में प्रकाशित गजट के अनुसार जिले में कुल वक्फ संपत्तियों की संख्या 1335 है। अप्रैल 1989 के बाद राजस्व अभिलेखों में दर्ज संपत्ति से जुड़ी सूचना नहीं होने से शासन के निर्देश पर दर्ज संपत्तियों की सूची जांच के लिए नामित एसडीएम को भेजी गई है। जांच के बाद ही 1989 के बाद दर्ज वक्फ संपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक होगी।
ग्राम पंचायतों में सुरक्षित भूमि (बंजर, भीटा व ऊसर) को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कर कब्जा करने की कोशिश पर अब अंकुश लगेगा। शासन की ओर से सात अप्रैल 1989 को जारी शासनादेश निरस्त करने के बाद प्रशासन इस दौरान दर्ज संपत्तियों का ब्योरा खंगाल रहा है। शासनादेश निरस्त होने के बाद अप्रैल 1989 के बाद वक्फ संपत्तियों के रूप में दर्ज सभी मामलों की जांच कर रिपोर्ट मांगी गई है। वक्फ संपत्तियों के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज कब्रिस्तान, मस्जिद, ईदगाह, कर्बला, ताकिया, इमामबाड़ा व मजार समेत अन्य की जांच होगी।
जांच नियमानुसार हो इसके लिए डीएम के निर्देश पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने सभी एसडीएम को जांच अधिकारी नामित किया है। प्रभारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नरेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि शासन के निर्देश पर जिले में मौजूद सभी वक्फ संपत्तियों की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट में 1989 के बाद दर्ज संपत्तियों की जानकारी सामने आने के बाद जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को रिपोर्ट भेजते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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विभाग के पास 1988 में प्रकाशित हुए गजट के अनुसार तिलोई में 441, मुसाफिरखाना में 372 तो गौरीगंज व अमेठी की संयुक्त सूची में 542 वक्फ संपत्तियों की सूचना ही मौजूद है। सात अप्रैल 1989 के बाद वक्फ संपत्तियों के रूप में दर्ज सुरक्षित भूमि से जुड़ी कोई जानकारी विभाग के पास नहीं है। ऐसे में विभाग ने 1988 में प्रकाशित गजट के अनुसार मौजूद सूची एसडीएम को भेजी है।
एडीएम वित्त एवं राजस्व अजीत कुमार सिंह ने बताया कि जिले में मौजूदा समय में कुल 12 शत्रु संपत्तियां हैं। 12 शत्रु संपत्तियों में सात मुसाफिरखाना तहसील क्षेत्र तो पांच तिलोई तहसील क्षेत्र में हैं। इन शत्रु संपत्तियों पर न तो कोई अवैध रूप से काबिज है, न ही इनसे जुड़ा कोई विवाद कभी सामने आया है। जिले में शत्रु संपत्तियों का कुल रकबा 2.917 हेक्टेयर है। सभी शत्रु संपत्तियां राजस्व अभिलेखों में इसी रूप में पंजीकृत हैं।
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ग्राम पंचायतों में सुरक्षित भूमि (बंजर, भीटा व ऊसर) को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कर कब्जा करने की कोशिश पर अब अंकुश लगेगा। शासन की ओर से सात अप्रैल 1989 को जारी शासनादेश निरस्त करने के बाद प्रशासन इस दौरान दर्ज संपत्तियों का ब्योरा खंगाल रहा है। शासनादेश निरस्त होने के बाद अप्रैल 1989 के बाद वक्फ संपत्तियों के रूप में दर्ज सभी मामलों की जांच कर रिपोर्ट मांगी गई है। वक्फ संपत्तियों के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज कब्रिस्तान, मस्जिद, ईदगाह, कर्बला, ताकिया, इमामबाड़ा व मजार समेत अन्य की जांच होगी।
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जांच नियमानुसार हो इसके लिए डीएम के निर्देश पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने सभी एसडीएम को जांच अधिकारी नामित किया है। प्रभारी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नरेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि शासन के निर्देश पर जिले में मौजूद सभी वक्फ संपत्तियों की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट में 1989 के बाद दर्ज संपत्तियों की जानकारी सामने आने के बाद जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को रिपोर्ट भेजते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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विभाग के पास 1988 में प्रकाशित हुए गजट के अनुसार तिलोई में 441, मुसाफिरखाना में 372 तो गौरीगंज व अमेठी की संयुक्त सूची में 542 वक्फ संपत्तियों की सूचना ही मौजूद है। सात अप्रैल 1989 के बाद वक्फ संपत्तियों के रूप में दर्ज सुरक्षित भूमि से जुड़ी कोई जानकारी विभाग के पास नहीं है। ऐसे में विभाग ने 1988 में प्रकाशित गजट के अनुसार मौजूद सूची एसडीएम को भेजी है।
एडीएम वित्त एवं राजस्व अजीत कुमार सिंह ने बताया कि जिले में मौजूदा समय में कुल 12 शत्रु संपत्तियां हैं। 12 शत्रु संपत्तियों में सात मुसाफिरखाना तहसील क्षेत्र तो पांच तिलोई तहसील क्षेत्र में हैं। इन शत्रु संपत्तियों पर न तो कोई अवैध रूप से काबिज है, न ही इनसे जुड़ा कोई विवाद कभी सामने आया है। जिले में शत्रु संपत्तियों का कुल रकबा 2.917 हेक्टेयर है। सभी शत्रु संपत्तियां राजस्व अभिलेखों में इसी रूप में पंजीकृत हैं।