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बिना पानी सूख रही मेंथा व गन्ने की फसल
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
Updated Wed, 27 Apr 2016 10:57 PM IST
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अंबेडकरनगर की शारदा नहर में नहीं बचा पानी।
- फोटो : अमर उजाला
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भीषण गर्मी के साथ शारदा सहायक नहर में पानी न होने से किसानों व आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एक तरफ जहां किसान अपनी फसलों की सिंचाई को लेकर खासे परेशान हैं, वहीं पशु पक्षियों के समक्ष भी पेयजल संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश ऐसे तालाब हैं जिनमें पानी नहीं है।
ऐसे में नहरों व माइनरों में पानी नहीं होने से जल संकट और बढ़ गया है। नहर विभाग की इस उदासीनता को प्रशासन भी गंभीरता से नहीं ले रहा है। जनपदवासी लंबे समय से नहर में पानी छोड़े जाने की मांग कर रहे हैं। शारदा सहायक नहर में लंबे समय से पानी नहीं आ सका है। इससे न सिर्फ माइनर सूख चुकी हैं, बल्कि नहर में भी पानी की जगह रेत उड़ रही है।
नहर के भरोसे मेंथा व गन्ने की खेती करने वाले किसानों को तगड़ा झटका लगा है। किसानों का कहना है कि नहर विभाग की उदासीनता के चलते उनके लिए यह खेती काफी महंगी साबित होती जा रही है। तेज धूप व गर्मी के चलते मेंथा की जहां प्रत्येक सप्ताह सिंचाई करनी पड़ रही है, वहीं गन्ने में भी 7 से 10 दिन के अंदर पानी लगाना पड़ रहा है।
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नहर में पानी न होने से उन्हें निजी ट्यूबवेल से सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे सिंचाई करने में काफी खर्च आ रहा है। रतनपुर के किसान जगदंबा प्रसाद कहते हैं कि बड़ी उम्मीद के साथ नहर के किनारे ढाई बीघा खेत में मेंथा की फसल लगाई थी। नहर के साथ न देने से अब यह घाटे की खेती साबित हो रही है।
जमुनीपुर के मनीष वर्मा नहर के भरोसे गन्ने की खेती कर पछता रहे हैं। इसी समय गन्ने को अधिक पानी की जरूरत होती है, ऐसे में यदि पर्याप्त पानी नहीं मिल पाएगा तो फसल बर्बाद हो जाएगी। क्षेत्र के शिवकुमार तिवारी, महेंद्र यादव व रोहित कुमार आदि का कहना है कि नहर में पानी न आने से कई तालाब सूख चुके हैं।
लोगों ने जिला प्रशासन से शारदा सहायक नहर में अविलंब पानी छुड़वाए जाने की मांग की है। उधर अपर जिलाधिकारी रामसूरत पांडेय ने बताया कि सिंचाई व नलकूप विभाग जल पानी छोड़े जाने के लिए कहा जा चुका है।
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ऐसे में नहरों व माइनरों में पानी नहीं होने से जल संकट और बढ़ गया है। नहर विभाग की इस उदासीनता को प्रशासन भी गंभीरता से नहीं ले रहा है। जनपदवासी लंबे समय से नहर में पानी छोड़े जाने की मांग कर रहे हैं। शारदा सहायक नहर में लंबे समय से पानी नहीं आ सका है। इससे न सिर्फ माइनर सूख चुकी हैं, बल्कि नहर में भी पानी की जगह रेत उड़ रही है।
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नहर के भरोसे मेंथा व गन्ने की खेती करने वाले किसानों को तगड़ा झटका लगा है। किसानों का कहना है कि नहर विभाग की उदासीनता के चलते उनके लिए यह खेती काफी महंगी साबित होती जा रही है। तेज धूप व गर्मी के चलते मेंथा की जहां प्रत्येक सप्ताह सिंचाई करनी पड़ रही है, वहीं गन्ने में भी 7 से 10 दिन के अंदर पानी लगाना पड़ रहा है।
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नहर में पानी न होने से उन्हें निजी ट्यूबवेल से सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे सिंचाई करने में काफी खर्च आ रहा है। रतनपुर के किसान जगदंबा प्रसाद कहते हैं कि बड़ी उम्मीद के साथ नहर के किनारे ढाई बीघा खेत में मेंथा की फसल लगाई थी। नहर के साथ न देने से अब यह घाटे की खेती साबित हो रही है।
जमुनीपुर के मनीष वर्मा नहर के भरोसे गन्ने की खेती कर पछता रहे हैं। इसी समय गन्ने को अधिक पानी की जरूरत होती है, ऐसे में यदि पर्याप्त पानी नहीं मिल पाएगा तो फसल बर्बाद हो जाएगी। क्षेत्र के शिवकुमार तिवारी, महेंद्र यादव व रोहित कुमार आदि का कहना है कि नहर में पानी न आने से कई तालाब सूख चुके हैं।
लोगों ने जिला प्रशासन से शारदा सहायक नहर में अविलंब पानी छुड़वाए जाने की मांग की है। उधर अपर जिलाधिकारी रामसूरत पांडेय ने बताया कि सिंचाई व नलकूप विभाग जल पानी छोड़े जाने के लिए कहा जा चुका है।