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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ambedkar Nagar News ›   whole exercise Failure to prevent pollution

प्रदूषण रोकने को सारी कवायद फेल

Fri, 13 Nov 2015 11:10 PM IST
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
अबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 13 Nov 2015 11:10 PM IST
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पटाखों का भी बढ़ चढ़कर प्रयोग किया गया। उधर तमाम दिशा निर्देशों के बाद प्रतिमा विसर्जन को लेकर भी प्रदूषण से बचने को कोई वैकल्पिक तैयारी नहीं की जा सकी। ऐसे में इस बार भी तमसा व सरयू नदी में प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ।
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लगातार बढ़ते विभिन्न प्रकार के प्रदूषण पर अंकुश पाने एवं पर्यावरण में गैसों का संतुलन बनाए रखने के लिए दीपपर्व से कई दिन पहले से ही विभिन्न प्रचार माध्यमों से लोगों से ग्रीन दीपावली मनाए जाने की अपील की जा रही थी।
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इसके लिए न सिर्फ सेलीब्रेटीज को भी लगाया गया था, बल्कि कई स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्यों ने विद्यालयों में जाकर छात्र छात्राओं से ग्रीन दीपावली मनाए जाने की अपील की थी। साथ ही दीपपर्व पर आतिशबाजी न करने एवं बड़ी संख्या में पौधे लगाए जाने की भी अपील की थी।
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यह अलग बात है कि ग्रीन दीपावली मनाए जाने की तमाम अपीलों को खारिज करते हुए लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। ऐसा करते समय न सिर्फ केमिकल्स युक्त धुएं वाले पटाखे का प्रयोग बढ़ चढ़कर किया गया, बल्कि तीव्र ध्वनि वाले पटाखों का भी प्रयोग किया गया।

शहरी क्षेत्रों में सड़कों पर हुई व्यापक आतिशबाजी से प्रदूषण खासा बढ़ा है। ऐसा नहीं कि इसका खामियाजा किसी और को भुगतना होगा, लेकिन इसके बावजूद इन सबकी तरफ ध्यान नहीं दिया गया। इतना ही नहीं पहले नवरात्रि और दीपावली में प्रतिमाओं के विसर्जन को लेकर वैकल्पिक प्रबंध नहीं किए गए।

जिला मुख्यालय पर जहां तमसा नदी में बढ़ चढ़कर प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया, वहीं टांडा व आलापुर तहसील क्षेत्रों में प्रतिमाओं का विसर्जन सरयू नदी में हुआ। गौरतलब है कि नदियों में लगातार बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए न्यायालय ने प्रतिमाओं का विसर्जन नदियों में करने की बजाए वैकल्पिक प्रबंध का निर्देश दिया था।



यह अलग बात है कि न्यायालय के निर्देश का पालन नहीं हुआ। इसी का नतीजा रहा कि जिला मुख्यालय से होकर बह रही तमसा नदी में जहां दुर्गापूजा पर्व में 200 से अधिक प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया, वहीं दीपपर्व में भी 50 से अधिक लक्ष्मी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ।

इसके चलते तहसील तिराहा के निकट स्थित गायत्री मंदिर के पीछे नदी में पानी का बहाव बाधित हो रहा है। इसकी सफाई की तरफ प्रशासन का तनिक भी ध्यान नहीं गया।

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