{"_id":"69f789aef38208342a0b9c80","slug":"where-the-laughter-of-children-used-to-echo-there-was-now-silence-ambedkar-nagar-news-c-91-1-brp1007-155590-2026-05-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ambedkar Nagar News: जहां बच्चों की खिलखिलाहट गूंजती थी, वहां पसरा सन्नाटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ambedkar Nagar News: जहां बच्चों की खिलखिलाहट गूंजती थी, वहां पसरा सन्नाटा
विज्ञापन
शव देखकर अचेत होकर जमीन पर गिर पड़ी मृतकों की बड़ी मां शकीला। संवाद
अंबेडकरनगर। करीब चार साल पहले अकबरपुर के मीरानपुर मुरादाबाद में नियाज अहमद ने अपने घर की नींव डाली तो सपना था कि इस घर के आंगन में चार बच्चे हंसते-खेलते, पढ़ते-लिखते भविष्य का सफर पूरा करेंगे। जो घर दो दिन पहले तक बच्चों की खिलखिलाहट से गूंजता रहता था, रविवार को वहां मातमी सन्नाटा छाया रहा।
नियाज अहमद सऊदी अरब के यांबू शहर में रहकर ठेकेदारी का काम करते हैं। महरुआ के कसड़ा गांव में उन्हें पैतृक जमीन भी मिली थी। इस जमीन को नियाज ने अपने बड़े भाई सलीम को बेच दिया था और इससे मिली पूंजी से पत्नी के नाम जमीन खरीदी। फिर दो मंजिला घर का निर्माण कराया। यहां बच्चों को सुख-सुविधा मिल सके, इसके लिए एसी से लेकर अन्य तमाम बुनियादी जरूरतों को पूरा किया। घर रहने लायक तो हो गया था लेकिन इसमें दरवाजे-खिड़की से लेकर अन्य तमाम फिनिशिंग के कार्य कराए जाने अभी बाकी थे। इसके लिए नियाज ने तारीख मुकर्रर कर रखी थी।
बच्चों से वादा किया था कि बकरीद के समय वह घर आएंगे और तमाम कार्य भी कराएंगे। इससे पहले ही बेटे शफीक (14), सऊद (12), उमर (10) और बेटी बयान (8) उर्फ सादिया की हत्या ने भविष्य के सपनों को चूर-चूर कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
नियाज अहमद सऊदी अरब के यांबू शहर में रहकर ठेकेदारी का काम करते हैं। महरुआ के कसड़ा गांव में उन्हें पैतृक जमीन भी मिली थी। इस जमीन को नियाज ने अपने बड़े भाई सलीम को बेच दिया था और इससे मिली पूंजी से पत्नी के नाम जमीन खरीदी। फिर दो मंजिला घर का निर्माण कराया। यहां बच्चों को सुख-सुविधा मिल सके, इसके लिए एसी से लेकर अन्य तमाम बुनियादी जरूरतों को पूरा किया। घर रहने लायक तो हो गया था लेकिन इसमें दरवाजे-खिड़की से लेकर अन्य तमाम फिनिशिंग के कार्य कराए जाने अभी बाकी थे। इसके लिए नियाज ने तारीख मुकर्रर कर रखी थी।
विज्ञापन
बच्चों से वादा किया था कि बकरीद के समय वह घर आएंगे और तमाम कार्य भी कराएंगे। इससे पहले ही बेटे शफीक (14), सऊद (12), उमर (10) और बेटी बयान (8) उर्फ सादिया की हत्या ने भविष्य के सपनों को चूर-चूर कर दिया।
विज्ञापन