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चालकों की मनमानी व प्रबंधन की बेफिक्री पड़ रही भारी

Tue, 26 Jul 2016 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर Updated Tue, 26 Jul 2016 11:45 PM IST
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The drivers seem to be unfazed by the management's arbitrary and heavy
स्कूली बच्चों को ले जाती जर्जर बस। - फोटो : अमर उजाला
स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर यहां भी प्रशासन पूरी तरह बेफिक्र नजर आता है। अहिरौली व जलालपुर थानाक्षेत्र में एक वर्ष के भीतर ही स्कूल बसों से दो अलग-अलग हादसे में 15 से अधिक छात्र-छात्राओं के घायल होने की घटना सामने आ चुकी है।
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पूर्व में भी इस प्रकार की घटनाएं जब तब होती रहती हैं। ऐसी अधिकांश घटनाओं में चालकों द्वारा तेज गति से वाहन चलाए जाने, कान में इयर फोन लगाए रखने या फिर वाहन चलाते समय मोबाइल से बात करने का मामला सामने आया है।
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इसके बाद भी स्कूल बसों से जुड़े चालकों पर ऐसे प्रतिबंध सख्ती से लागू करने की तरफ न तो स्कूल प्रशासन का ध्यान है और न ही प्रशासन का।  गौरतलब है कि एक दिन पहले भदोही में बच्चों से भरी बस के रेलवे क्रॉसिंग पर दुर्घटनाग्रस्त होने पर 8 बच्चों की मौत हो गई थी।
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प्राथमिक जांच में घटना के पीछे बस चालक की बड़ी लापरवाही सामने आई। स्कूली बच्चों से जुड़े वाहन चालकों की लापरवाही का दौर सिर्फ भदोही तक ही सीमित नहीं है। जिले में भी स्कूल वाहन चालकों द्वारा जमकर मनमानी की जा रही है।

आए दिन बड़ी दुर्घटना को दावत देते हुए विभिन्न स्कूलों के वाहन तेजी से सड़कों पर दौड़ते हैं। इनमें से अधिकांश बसें ऐसी हैं, जो पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं, तो वहीं अधिकांश के चालक अप्रशिक्षित हैं। स्कूली बच्चों से भरी होने के बाद भी चालक तेज गति से बस चलाने में नहीं हिचकिचाते हैं।

इसकी शिकायत कई बार न सिर्फ स्कूल प्रशासन, बल्कि जिला प्रशासन से भी की गई, लेकिन कभी इस तरफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका। अधिक दबाव पडने पर अभियान तो चलाया जाता, लेकिन बड़े विद्यालयों पर कार्रवाई करने की बजाए अभियान छोटे विद्यालयों तक ही सीमित रहती।

इस प्रकार की स्कूली बसों पर कार्रवाई को लेकर संबंधित विभाग कितना गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लगभग छह माह पूर्व गद्दोपुर स्थित एक विद्यालय की तेज रफ्तार स्कूली बस ने अकबरपुर गौहनिया मार्ग पर तीन अलग अलग साइकिल सवारों को टक्कर मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था।

घटना से नाराजगी ग्रामीणों ने घेराबंदी कर बस को रोक लिया और उसे आग के हवाले कर दिया था। इस स्कूल बस के चालक पर आरोप था कि वह अक्सर इयर फोन लगाकर बस चलाता है। 

अकबरपुर के अभिभावक जगदीश कुमार व रविशंकर तिवारी ने कहा कि अधिकांश स्कूली बसों के चालक अप्रशिक्षित हैं। उस पर से वे या तो कान में इयर फोन लगाए रहते हैं या फिर मोबाइल पर बात करते हैं। ऐसे चालकों पर स्कूल प्रशासन व जिला प्रशासन को कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

जलालपुर के सुनील कुमार व अभिषेक सिंह ने कहा कि अधिकांश बसें बुरी तरह जर्जर हो चुकी है। इसके बाद भी वह तेज गति से सड़कों पर दौड़ रही है। ऐसी बसों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।


अपर जिलाधिकारी रामसूरत पांडेय ने कहा कि जल्द ही डीआईओएस व बीएसए को निर्देश होगा कि सभी स्कूल वाहन से जुड़े चालकों को सख्त निर्देश दिए जाएं कि वे निर्धारित गति सीमा का पालन करें। वाहन चलाते समय कतई मोबाइल या इयर फोन का प्रयोग न करें। स्कूल प्रबंधकों को भी यह निर्देश होगा कि वे संबंधित वाहनों के फिटनेस की जांच करवाते रहें।
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