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Ambedkar Nagar News: 20 लाख से बना बरातघर हुआ खंडहर
Mon, 01 Sep 2025 12:43 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Mon, 01 Sep 2025 12:43 AM IST
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खंडहर में तब्दील हो गया बारात घर।
जलालपुर (अंबेडकरनगर)। तहसील क्षेत्र के निजामपुर गांव में कभी सामाजिक आयोजनों की सुविधा के लिए बनाया गया बरातघर अब प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होकर खंडहर बन चुका है। बसपा शासनकाल में पूर्व सांसद घनश्याम चंद्र खरवार की पहल पर करीब 20 लाख रुपये की लागत से बना यह भवन आज रखरखाव के अभाव में बेकार पड़ा है।
गांव के बीच स्थित यह बरातघर अब सामाजिक उपयोग के बजाय असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है। टूटी खिड़कियां, उखड़े दरवाजे, और चारों ओर फैली गंदगी वर्षों से उपेक्षा की कहानी कहती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बरातघर न होने से बेटियों की शादी के लिए उन्हें 1 से 2 लाख रुपये खर्च कर निजी मैरिज हॉल बुक करने पड़ते हैं। यह खर्च मध्यमवर्गीय ग्रामीणों के लिए भारी पड़ता है। ग्रामीणों ने कई बार मरम्मत और संचालन की मांग उठाई, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस पहल नहीं की।
सरकार बदली, लेकिन हालत जस की तस
स्थानीय निवासी राजाराम प्रजापति ने कहा कि जिस भवन पर लाखों खर्च हुए, वह अब देखने लायक नहीं बचा। सरकारें बदलीं लेकिन किसी ने इसकी सुध नहीं ली। त्रिभुवन ने बताया कि यहां अब हर रात शराबियों और असामाजिक तत्वों की भीड़ होती है, जिससे गांव का माहौल बिगड़ रहा है। वहीं ग्रामीण श्रीराम ने मांग की कि इस ढांचे का पुनर्निर्माण कर इसे फिर से उपयोगी बनाया जाए। महंगे निजी हॉल आम ग्रामीण की पहुंच से बाहर हैं, सरकारी बारातघर का जीर्णोद्धार मध्यमवर्ग के लिए राहत बन सकता है।
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लापरवाही पर होगी कार्रवाई
निर्माण के बाद बरातघर का विधिवत हैंडओवर हुआ या नहीं, जानकारी की जाएगी। लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। सार्वजनिक संपत्ति की दुर्दशा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बृजेश तिवारी, सहायक विकास खंड अधिकारी
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गांव के बीच स्थित यह बरातघर अब सामाजिक उपयोग के बजाय असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है। टूटी खिड़कियां, उखड़े दरवाजे, और चारों ओर फैली गंदगी वर्षों से उपेक्षा की कहानी कहती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बरातघर न होने से बेटियों की शादी के लिए उन्हें 1 से 2 लाख रुपये खर्च कर निजी मैरिज हॉल बुक करने पड़ते हैं। यह खर्च मध्यमवर्गीय ग्रामीणों के लिए भारी पड़ता है। ग्रामीणों ने कई बार मरम्मत और संचालन की मांग उठाई, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस पहल नहीं की।
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सरकार बदली, लेकिन हालत जस की तस
स्थानीय निवासी राजाराम प्रजापति ने कहा कि जिस भवन पर लाखों खर्च हुए, वह अब देखने लायक नहीं बचा। सरकारें बदलीं लेकिन किसी ने इसकी सुध नहीं ली। त्रिभुवन ने बताया कि यहां अब हर रात शराबियों और असामाजिक तत्वों की भीड़ होती है, जिससे गांव का माहौल बिगड़ रहा है। वहीं ग्रामीण श्रीराम ने मांग की कि इस ढांचे का पुनर्निर्माण कर इसे फिर से उपयोगी बनाया जाए। महंगे निजी हॉल आम ग्रामीण की पहुंच से बाहर हैं, सरकारी बारातघर का जीर्णोद्धार मध्यमवर्ग के लिए राहत बन सकता है।
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लापरवाही पर होगी कार्रवाई
निर्माण के बाद बरातघर का विधिवत हैंडओवर हुआ या नहीं, जानकारी की जाएगी। लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। सार्वजनिक संपत्ति की दुर्दशा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बृजेश तिवारी, सहायक विकास खंड अधिकारी