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Ambedkar Nagar News: गौहन्ना जमीन विवाद में राज्य सरकार को मिली बड़ी राहत
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अंबेडकरनगर। अकबरपुर के गौहन्ना में गाटा संख्या 614-गा की जमीन पर कब्जे और स्वामित्व के विवाद में जिला जज चंद्रोदय कुमार की अदालत ने राज्य सरकार और अकबरपुर नगर पालिका को राहत दी है। अदालत ने निचली अदालत के 28 सितंबर के आदेश को निरस्त करते हुए राज्य सरकार और नगर पालिका की ओर से दाखिल आपत्तियों को सुनवाई योग्य माना है। साथ ही निचली अदालत को दोनों आपत्तियों पर सुनवाई कर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
मामला देव नारायण व अन्य बनाम झिनकू व अन्य से जुड़ा है। वर्ष 1995 में दाखिल मूलवाद में 17 दिसंबर 2021 को डिक्री पारित हुई थी। इसके निष्पादन के दौरान राज्य सरकार और अकबरपुर नगर पालिका ने गाटा संख्या 614-गा पर स्वतंत्र अधिकार, स्वामित्व और कब्जे का दावा करते हुए आपत्तियां दाखिल की थीं। निचली अदालत ने दोनों आपत्तियों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि राज्य सरकार और नगर पालिका मूल वाद में पक्षकार नहीं थे।
जिला जज ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि निष्पादन की कार्यवाही में तीसरे पक्ष की ओर से किए गए स्वतंत्र अधिकार, स्वामित्व या कब्जे के दावे की सुनवाई की व्यवस्था है। दावा सही, गलत, कमजोर या विलंबित है या नहीं, यह अलग विषय है। केवल मूल वाद का पक्षकार न होने के आधार पर दावे को सुनवाई से बाहर नहीं किया जा सकता।
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अदालत ने कहा कि राजस्व अभिलेख अथवा बाद के प्रशासनिक आदेश अपने आप स्वामित्व का अंतिम प्रमाण नहीं हैं। हालांकि, उनके अस्तित्व की अनदेखी भी नहीं की जा सकती। इसलिए जमीन की वास्तविक पहचान, संबंधित पक्षों के अधिकार और कब्जे, दावे के स्रोत तथा पूर्व में पारित राजस्व और चकबंदी संबंधी आदेशों के प्रभाव की जांच जरूरी है।
जिला अदालत ने दोनों आपत्तियों को बहाल करते हुए निचली अदालत को सुनवाई का निर्देश दिया है। पूरी कार्यवाही यथासंभव तीन माह में पूरी करने को कहा गया है। विवादित जमीन पर अंतिम निर्णय होने तक यथास्थिति बनाए रखने का भी आदेश दिया गया है।
नौवीं बार लौटी थी कब्जा हटाने गई टीम
बबुरहिया गांव में गाटा संख्या 614-ग पर झिनकू समेत सात लोगों के निर्माण हैं। बीते मंगलवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन यादवेंद्र सिंह के आदेश के अनुपालन में कब्जा हटाने के लिए पुलिस और न्यायिक टीम पहुंची थी। प्रशासनिक अधिकारी के मौके पर न पहुंचने और महिलाओं के विरोध के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। वर्ष 2025 में हुए आदेश के बाद टीम को नौवीं बार वापस लौटना पड़ा।
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मामला देव नारायण व अन्य बनाम झिनकू व अन्य से जुड़ा है। वर्ष 1995 में दाखिल मूलवाद में 17 दिसंबर 2021 को डिक्री पारित हुई थी। इसके निष्पादन के दौरान राज्य सरकार और अकबरपुर नगर पालिका ने गाटा संख्या 614-गा पर स्वतंत्र अधिकार, स्वामित्व और कब्जे का दावा करते हुए आपत्तियां दाखिल की थीं। निचली अदालत ने दोनों आपत्तियों को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि राज्य सरकार और नगर पालिका मूल वाद में पक्षकार नहीं थे।
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जिला जज ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि निष्पादन की कार्यवाही में तीसरे पक्ष की ओर से किए गए स्वतंत्र अधिकार, स्वामित्व या कब्जे के दावे की सुनवाई की व्यवस्था है। दावा सही, गलत, कमजोर या विलंबित है या नहीं, यह अलग विषय है। केवल मूल वाद का पक्षकार न होने के आधार पर दावे को सुनवाई से बाहर नहीं किया जा सकता।
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अदालत ने कहा कि राजस्व अभिलेख अथवा बाद के प्रशासनिक आदेश अपने आप स्वामित्व का अंतिम प्रमाण नहीं हैं। हालांकि, उनके अस्तित्व की अनदेखी भी नहीं की जा सकती। इसलिए जमीन की वास्तविक पहचान, संबंधित पक्षों के अधिकार और कब्जे, दावे के स्रोत तथा पूर्व में पारित राजस्व और चकबंदी संबंधी आदेशों के प्रभाव की जांच जरूरी है।
जिला अदालत ने दोनों आपत्तियों को बहाल करते हुए निचली अदालत को सुनवाई का निर्देश दिया है। पूरी कार्यवाही यथासंभव तीन माह में पूरी करने को कहा गया है। विवादित जमीन पर अंतिम निर्णय होने तक यथास्थिति बनाए रखने का भी आदेश दिया गया है।
नौवीं बार लौटी थी कब्जा हटाने गई टीम
बबुरहिया गांव में गाटा संख्या 614-ग पर झिनकू समेत सात लोगों के निर्माण हैं। बीते मंगलवार को सिविल जज सीनियर डिवीजन यादवेंद्र सिंह के आदेश के अनुपालन में कब्जा हटाने के लिए पुलिस और न्यायिक टीम पहुंची थी। प्रशासनिक अधिकारी के मौके पर न पहुंचने और महिलाओं के विरोध के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। वर्ष 2025 में हुए आदेश के बाद टीम को नौवीं बार वापस लौटना पड़ा।