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Ambedkar Nagar News: सीता जन्मोत्सव कथा ने श्रोताओं को किया भावविभोर
Tue, 02 Sep 2025 01:03 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Tue, 02 Sep 2025 01:03 AM IST
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आलापुर (अंबेडकरनगर)। आलापुर क्षेत्र के मसेना मिर्जापुर स्थित शांति विहार कॉलोनी में चल रहे चातुर्मास साधना और श्रीराम कथा में शनिवार को प्रवाचक श्रीनिवास दास वेदांती महाराज ने माता सीता के प्राकट्य और जनक की चारों पुत्रियों के विवाह प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। सीता जन्मोत्सव की कथा ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कथा की शुरुआत पं. राम अवध स्मारक इंटर कॉलेज रामनगर के प्रधानाचार्य नागेंद्र बहादुर यादव द्वारा कथा व्यास पीठ पूजन से हुई। वेदांती महाराज ने कहा कि राजा जनक ने जब अकाल से त्रस्त मिथिला को संतान और वर्षा प्राप्ति के उद्देश्य से यज्ञ किया, तो उन्होंने स्वयं खेत जोतना आरंभ किया। यज्ञ भूमि पर हल जोतते समय हल की नोक ‘सीत’ जमीन में गड़े एक कलश से टकराई।कलश खोलने पर उसमें से एक अलौकिक कन्या प्रकट हुई, जिसे जनक ने पुत्री रूप में स्वीकार किया और उसका नाम रखा सीता। जब श्रीराम ने शिवधनुष तोड़कर सीता से विवाह किया, तब ऋषि विश्वामित्र ने राजा दशरथ को जनक जी की अन्य पुत्रियों के साथ राम के भाइयों का विवाह कराने का सुझाव दिया। भरत का विवाह मांडवी से, लक्ष्मण का विवाह उर्मिला से और शत्रुघ्न का विवाह श्रुतकीर्ति से हुआ। इस प्रसंग को सुनकर श्रोता भाव-विभोर हो गए और श्रद्धा व आनंद में डूबे नजर आए।
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कथा की शुरुआत पं. राम अवध स्मारक इंटर कॉलेज रामनगर के प्रधानाचार्य नागेंद्र बहादुर यादव द्वारा कथा व्यास पीठ पूजन से हुई। वेदांती महाराज ने कहा कि राजा जनक ने जब अकाल से त्रस्त मिथिला को संतान और वर्षा प्राप्ति के उद्देश्य से यज्ञ किया, तो उन्होंने स्वयं खेत जोतना आरंभ किया। यज्ञ भूमि पर हल जोतते समय हल की नोक ‘सीत’ जमीन में गड़े एक कलश से टकराई।कलश खोलने पर उसमें से एक अलौकिक कन्या प्रकट हुई, जिसे जनक ने पुत्री रूप में स्वीकार किया और उसका नाम रखा सीता। जब श्रीराम ने शिवधनुष तोड़कर सीता से विवाह किया, तब ऋषि विश्वामित्र ने राजा दशरथ को जनक जी की अन्य पुत्रियों के साथ राम के भाइयों का विवाह कराने का सुझाव दिया। भरत का विवाह मांडवी से, लक्ष्मण का विवाह उर्मिला से और शत्रुघ्न का विवाह श्रुतकीर्ति से हुआ। इस प्रसंग को सुनकर श्रोता भाव-विभोर हो गए और श्रद्धा व आनंद में डूबे नजर आए।
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