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Ambedkar Nagar News: गांवों में घुसा सरयू का पानी, चलने लगी नाव
Mon, 04 Aug 2025 11:21 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Mon, 04 Aug 2025 11:21 PM IST
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आलापुर क्षेत्र के मांझा कम्हरिया में झोपड़ी की कटान करती सरयू नदी।
विद्युतनगर, अंबेडकरनगर। टांडा क्षेत्र में भी सरयू का जलस्तर बढ़ते ही माझा उल्टहवा, माझा अवसानपुर, केवटला, डुहियां तथा माहरीपुर गांव बाढ़ के मुहाने पर खड़े हैं। तहसील प्रशासन ने इन पांचों गांवों पर विशेष रूप से तैयारी की है। इन पांच गांव में दो-दो नाव लगाई गई हैं। प्रत्येक नाव की क्षमता 25 लोगों के लाने और ले जाने के लिए है। तहसीलदार टांडा निखिलेश कुमार ने बताया इन गांवों के प्रधानों को निर्देश दिए गए हैं, कि जहां बाढ से कोई समस्या आ रही उसकी जानकारी दें, ताकि समस्या का तुरंत समाधान कराया जा सके।
कम्हरिया व मांझा कम्हरिया क्षेत्र में नदी के किनारे की किसानों के खेत अब पानी में समाहित होते जा रहे हैं। सप्ताह भर में लगभग एक दर्जन किसानों की चार बीघा से अधिक खेत नदी की धारा में कटान से समाहित हो चुकी है। वहीं बंशीलाल निषाद की छप्पर भी कटान से नदी में समा गया। सरयू नदी खतरे के निशान से मात्र 16 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। ऐसे में अब लोगों को घरों की ओर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। सोमवार को नदी के जलस्तर में 15 सेंटीमीटर की वृद्धि होने से जलस्तर 92.97 मीटर पहुंच गया जो खतरे के निशान से मात्र 16 सेंटीमीटर बाकी है। मांझा कम्हरिया के बद्री का पूरा निषाद बस्ती व पटपरवा के ग्रामीण को भी नदी के जलस्तर बढ़ने से कटान में तेजी आने के कारण गांव के अस्तित्व पर खतरा मड़राता देख भयभीत हैं। मांझा कम्हरिया के सतिराम, राजेश, रंजीत ने कहा कि जब तक स्थाई रूप से नदी के किनारे बोल्डर नहीं लगाए जाएंगे तब तक यहां के लोगों को कटान की समस्या से छुटकारा नहीं मिल सकता है।
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लगातार की जा रही निगरानी
नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है। तहसील प्रशासन मुस्तैद है। जिन 23 गांवों को चिह्नित किया गया है वहां बाढ़ राहत चौकियां दुरुस्त कर ली गई हैं। बाढ़ आने पर लोगों को सुरक्षित स्थानोें पर पहुंचाने के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
- डॉ. सदानंद गुप्ता, एडीएम
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कम्हरिया व मांझा कम्हरिया क्षेत्र में नदी के किनारे की किसानों के खेत अब पानी में समाहित होते जा रहे हैं। सप्ताह भर में लगभग एक दर्जन किसानों की चार बीघा से अधिक खेत नदी की धारा में कटान से समाहित हो चुकी है। वहीं बंशीलाल निषाद की छप्पर भी कटान से नदी में समा गया। सरयू नदी खतरे के निशान से मात्र 16 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। ऐसे में अब लोगों को घरों की ओर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। सोमवार को नदी के जलस्तर में 15 सेंटीमीटर की वृद्धि होने से जलस्तर 92.97 मीटर पहुंच गया जो खतरे के निशान से मात्र 16 सेंटीमीटर बाकी है। मांझा कम्हरिया के बद्री का पूरा निषाद बस्ती व पटपरवा के ग्रामीण को भी नदी के जलस्तर बढ़ने से कटान में तेजी आने के कारण गांव के अस्तित्व पर खतरा मड़राता देख भयभीत हैं। मांझा कम्हरिया के सतिराम, राजेश, रंजीत ने कहा कि जब तक स्थाई रूप से नदी के किनारे बोल्डर नहीं लगाए जाएंगे तब तक यहां के लोगों को कटान की समस्या से छुटकारा नहीं मिल सकता है।
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लगातार की जा रही निगरानी
नदी के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है। तहसील प्रशासन मुस्तैद है। जिन 23 गांवों को चिह्नित किया गया है वहां बाढ़ राहत चौकियां दुरुस्त कर ली गई हैं। बाढ़ आने पर लोगों को सुरक्षित स्थानोें पर पहुंचाने के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
- डॉ. सदानंद गुप्ता, एडीएम