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सरयू नदी पर नहीं शुरु हो सका पीपा पुल, आवागमन का संकट
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फोटो 2, अंबेडकरनगर के राजेसुल्तानपुर में पीपा पुल से आवागमन न शुरु होने से बढ़ी नागरिकों की मुश्क?
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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राजेसुलतानपुर। कम्हरिया घाट के सरयू नदी पर बना पीपा पुल अब तक आवागमन के लिए खुल नहीं सका है। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। पीपा पुल के रास्ते आवागमन शुरू न होने के कारण एक तरफ जहां सबसे ज्यादा मुश्किल चार पहिया वाहन चालकों को हो रही है, वहीं नाव संचालकों की मनमानी से की भी मुश्किल बढ़ गई हैं। प्रत्येक वर्ष 15 नवंबर से पीपा पुल से आवागमन शुरू हो जाता था, लेकिन इस बार नदी में कटान अधिक होने के चलते आवागमन शुरू नहीं किया जा सका है। इससे नाव संचालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं। प्रशासन भी इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। इससे प्रतिदिन करीब 15 हजार आबादी को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। चार पहिया वाहन चालकों को 40 से 50 किलोमीटर अधिक दूरी तय करनी पड़ रही है।
बताते चलें कि सरयू नदी के कम्हरिया घाट पर पीपा पुल के रास्ते जौनपुर, आजमगढ़, अंबेडकरनगर व गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, संतकबीर नगर के नागरिक आवागमन करते हैं। बरसात के समय में सरयू नदी में जल स्तर बढ़ने पर किसी प्रकार के खतरे से बचने के लिए पीपा पुल से आवागमन रोक दिया जाता है। जलस्तर घटने पर पीपा पुल से आवागमन 15 नवंबर से शुरू होता है जो 15 जून तक चलता है। इस बार निर्धारित तिथि बीत चुकी है। इसके बावजूद अब तक पीपा पुल का कार्य पूरा करके उसे नागरिकों के लिए खोला नहीं जा सका है। इससे चार पहिया वाहन से आवागमन करने वाले नागरिकों को 40 से 50 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
इससे एक तरफ जहां नागरिकों का अतिरिक्त धन बर्बाद होता है, वहीं घंटे भर से ज्यादा का समय भी लगता है। नागरिकों ने जिला प्रशासन से अविलंब पीपा पुल से आवागमन शुरू कराए जाने की मांग की है। कहा कि नागरिकों की असुविधा को ध्यान में रखते हुए इस पर अविलंब काम शुरू करना चाहिए। जानकारों का कहना है कि इस बार नदी में अधिक बहाव के चलते ज्यादा कटान हुई है। इसके चलते जिस जगह पर पीपा पुल बना है, वहां नदी की चौड़ाई बढ़ गई है। इससे पीपा पुल से आवागमन जारी रखने के लिए अधिक पीपे की जरूरत है। उसकी उपलब्धता अब तक सुनिश्चित नही हो सकी है। इसके चलते पीपा पुल से आवागमन शुरू नहीं हो पा रहा है।
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पीपा पुल से आवागमन बहाल न होने से लगभग 15 हजार आबादी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। दो पहिया, साइकिल व पैदल आवागमन करने वाले राहगीरों तो नाव के सहारे नदी पार कर रहे हैं, लेकिन इसके एवज में उन्हें इन दिनों दो गुना किराया देना पड़ रहा है। चार पहिया वाहन चालकों को 40 से 50 किलोमीटर अधिक दूरी तय कर बिड़हर घाट पुल से आवागमन करना पड़ रहा है।
इतना ही नही शाम होने के साथ ही नाव से आवागमन भी ठप पड़ जाता है। इससे नागरिकों को सबसे ज्यादा मुश्किल होती है। राहगीर संजय कुमार, बिपिनचंद्र, रामप्रवेश मिश्र व सतीशचंद्र पांडेय ने बताया कि दोपहिया वाहनों से आवागमन करने वाले लोगों से 60 रुपये, साइकिल वालों से 30 व पद यात्रियों से 20 रुपये लिया जाता है, जबकि इससे पहले इसका आधा किराया नाव संचालक लेते थे। इस बार अब तक पीपा पुल से आवागमन न शुरू होने से नाव संचालकों की मनमानी बढ़ गई है।
सरयू नदी में इस बार कटान अधिक है। इसके चलते नदी की धारा की चौड़ाई काफी बढ़ गयी है। यहां पर उपलब्ध 88 में से 84 पीपे लगा दिए गए हैं। अभी 21 पीपों की आवश्यकता है। पीपे इलाहाबाद से मंगाने की प्रक्रिया चल रही है। पीपा उपलब्ध होने के बाद कार्य पूरा कर दिया जाएगा। इसके बाद आवागमन बहाल हो जाएगा।
- गौरव श्रीवास्तव, अवर अभियंता, लोक निर्माण विभाग
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बताते चलें कि सरयू नदी के कम्हरिया घाट पर पीपा पुल के रास्ते जौनपुर, आजमगढ़, अंबेडकरनगर व गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, संतकबीर नगर के नागरिक आवागमन करते हैं। बरसात के समय में सरयू नदी में जल स्तर बढ़ने पर किसी प्रकार के खतरे से बचने के लिए पीपा पुल से आवागमन रोक दिया जाता है। जलस्तर घटने पर पीपा पुल से आवागमन 15 नवंबर से शुरू होता है जो 15 जून तक चलता है। इस बार निर्धारित तिथि बीत चुकी है। इसके बावजूद अब तक पीपा पुल का कार्य पूरा करके उसे नागरिकों के लिए खोला नहीं जा सका है। इससे चार पहिया वाहन से आवागमन करने वाले नागरिकों को 40 से 50 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
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इससे एक तरफ जहां नागरिकों का अतिरिक्त धन बर्बाद होता है, वहीं घंटे भर से ज्यादा का समय भी लगता है। नागरिकों ने जिला प्रशासन से अविलंब पीपा पुल से आवागमन शुरू कराए जाने की मांग की है। कहा कि नागरिकों की असुविधा को ध्यान में रखते हुए इस पर अविलंब काम शुरू करना चाहिए। जानकारों का कहना है कि इस बार नदी में अधिक बहाव के चलते ज्यादा कटान हुई है। इसके चलते जिस जगह पर पीपा पुल बना है, वहां नदी की चौड़ाई बढ़ गई है। इससे पीपा पुल से आवागमन जारी रखने के लिए अधिक पीपे की जरूरत है। उसकी उपलब्धता अब तक सुनिश्चित नही हो सकी है। इसके चलते पीपा पुल से आवागमन शुरू नहीं हो पा रहा है।
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पीपा पुल से आवागमन बहाल न होने से लगभग 15 हजार आबादी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। दो पहिया, साइकिल व पैदल आवागमन करने वाले राहगीरों तो नाव के सहारे नदी पार कर रहे हैं, लेकिन इसके एवज में उन्हें इन दिनों दो गुना किराया देना पड़ रहा है। चार पहिया वाहन चालकों को 40 से 50 किलोमीटर अधिक दूरी तय कर बिड़हर घाट पुल से आवागमन करना पड़ रहा है।
इतना ही नही शाम होने के साथ ही नाव से आवागमन भी ठप पड़ जाता है। इससे नागरिकों को सबसे ज्यादा मुश्किल होती है। राहगीर संजय कुमार, बिपिनचंद्र, रामप्रवेश मिश्र व सतीशचंद्र पांडेय ने बताया कि दोपहिया वाहनों से आवागमन करने वाले लोगों से 60 रुपये, साइकिल वालों से 30 व पद यात्रियों से 20 रुपये लिया जाता है, जबकि इससे पहले इसका आधा किराया नाव संचालक लेते थे। इस बार अब तक पीपा पुल से आवागमन न शुरू होने से नाव संचालकों की मनमानी बढ़ गई है।
सरयू नदी में इस बार कटान अधिक है। इसके चलते नदी की धारा की चौड़ाई काफी बढ़ गयी है। यहां पर उपलब्ध 88 में से 84 पीपे लगा दिए गए हैं। अभी 21 पीपों की आवश्यकता है। पीपे इलाहाबाद से मंगाने की प्रक्रिया चल रही है। पीपा उपलब्ध होने के बाद कार्य पूरा कर दिया जाएगा। इसके बाद आवागमन बहाल हो जाएगा।
- गौरव श्रीवास्तव, अवर अभियंता, लोक निर्माण विभाग