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जनता के प्रति जवाबदेह हो जनप्रतिनिधि
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
Updated Fri, 20 Jan 2017 11:55 PM IST
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अमर उजाला कार्यालय अंबेडकरनगर में शुक्रवार को आयोजित फोकस ग्रुप कार्यक्रम में मौजूद लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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जनता के प्रति जवाबदेह और राजनीति को व्यवसाय न बनाने वाला जनप्रतिनिधि ही क्षेत्र के विकास के प्रति गंभीर हो सकता है। सियासी दलों को जाति-धर्म के आधार पर नहीं बल्कि योग्यता व क्षेत्र में दावेदारों की लोकप्रियता के आधार पर टिकट का निर्धारण करना चाहिए। निर्वाचन आयोग को भी राजनीतिक दलों द्वारा जाति धर्म के मुद्दे को बढ़ावा देने की कोशिशों पर और सख्ती करनी होगी।
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इसके साथ-साथ आम जनमानस को भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन बेहतर ढंग से करना होगा। लगभग सभी क्षेत्रों में मार्ग जाम, अतिक्रमण, स्वास्थ्य सेवा व शिक्षा की बदहाली जैसी समस्या बरकरार है। इन्हें दूर करने को लेकर दावेदारों को स्पष्ट रूप से सामने आना चाहिए।
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बुद्धिजीवियों के मिलेजुले ये विचार शुक्रवार को अमर उजाला द्वारा जिला मुख्यालय पर आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आयोजित फोकस ग्रुप कार्यक्रम में सामने आए। इसमें लोगों ने खुलकर विचार व्यक्त किए। उनका कहना था कि दावेदारों के साथ-साथ राजनीतिक दल व उनके मुखिया भी माहौल खराब करने के लिए कम जिम्मेदार नहीं हैं।
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अब चुनाव मुद्दों के बजाए जाति-धर्म आदि के आधार पर लड़ा जाने लगा है। बुद्धिजीवियों के अनुसार यह देखना कितना चिंताजनक व दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रत्याशियों का चयन योग्यता व लोकप्रियता के आधार पर कम जातीय गुणा-भाग के आधार पर अधिक होने लगा है।
कई बार योग्य प्रत्याशियों को पार्टियों से टिकट नहीं मिल पाता जबकि खास संबंध रखने वाले ऐसे लोग टिकट पा जाते हैं जिनके पास कुछ करने या समझने की इच्छा शक्ति ही नहीं रहती। ऐसे में जुगाड़ के सहारे टिकट पाने वाले लोग आम जनता के प्रति कितने जवाबदेह होंगे, यह आसानी से समझा जा सकता है।
कहा गया कि जनप्रतिनिधि ऐसा होना चाहिए जो चुनाव के बाद भी आम जनता के बीच उसी मनोभाव के साथ नजर आए, जैसा वह निर्वाचित होने से पहले दिखते रहते हैं। आमतौर पर होता यह है कि निर्वाचित होने के बाद जनप्रतिनिधियों से मिल पाना आसान नहीं होता। इसे लेकर ही जनप्रतिनिधियों व जनता के बीच की दूरी बढ़ने लगती है।
जनप्रतिनिधियों को इससे उबरना होगा। उन्हें पार्टी या कुछ खास लोगों के प्रति जवाबदेह होने के बजाए जनता के प्रति जवाबदेह होना होगा। बुद्धिजीवियों का यह भी कहना था कि मतदान का प्रतिशत और ज्यादा बढ़ाने पर जोर देना होगा। जितना ज्यादा मतदान होगा, उतना ही ज्यादा इस बात की गारंटी हो सकती है कि योग्य प्रत्याशियों का चयन होगा।
कहा गया कि जनप्रतिनिधियों को महिला उत्पीड़न व शिक्षा की बेहतरी की तरफ भी पर्याप्त ध्यान देना होगा, जिसमें अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है। लगभग दो घंटे तक चले इस संवाद कार्यक्रम में सभी ने यह महसूस किया कि जब तक जाति-धर्म से ऊपर उठकर तथा प्रत्याशियों की योग्यता के आधार पर मतदान नहीं किया जाएगा, बेहतर माहौल की परिकल्पना नहीं की जा सकती।