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33 करोड़ के बकाया भुगतान को मिले सिर्फ 17 करोड़ रुपये
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अंबेडकरनगर। आठ माह के लंबे इंतजार के बाद मनरेगा के तहत हुए कार्यों की निर्माण सामग्री के भुगतान मद में जिले को सिर्फ 17 करोड़ रुपये ही मिल सके। इसके चलते ही सभी नौ ब्लॉकों की तरफ से 33 करोड़ रुपये के बकाया बिलों में से 16 करोड़ के सामग्री बिलों का भुगतान अटक गया है। जिम्मेदार इसके लिए भुगतान में डोंगल के माध्यम से अपनायी प्रक्रिया में हुई फाल्ट को कारण बता रहे हैं। उनका कहना है कि तकनीकी खामी के चलते ही 16 करोड़ की बकाया बिल राशि की स्वीकृति नहीं हो पायी। इससे कई ग्राम प्रधानों को करारा झटका लगा है।
जिले की 902 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत विभिन्न प्रकार के निर्माण कार्य कराए गए थे। शासन से क्रय सामग्रियों के भुगतान के लिए राशि न मिलने के कारण प्राय: सभी ग्राम पंचायतों में योजना के तहत संचालित कार्य ठप पड़े हैं। बीते आठ माह से क्रय सामग्रियों के बकाया भुगतान की मांग ग्राम प्रधानों द्वारा की जा रही है। आठ माह के लंबे इंतजार के बाद गत बीते दिनों शासन स्तर से क्रय सामग्रियों का बकाया भुगतान चुकाने के लिए प्रदेश में एक साथ बजट धनराशि निर्गत की गयी।
इस दौरान बकाया बिलों के भुगतान के लिए जिले के सभी नौ ब्लॉक स्तर से 33 करोड़ रुपये का डिमांड डोगल के जरिए प्रस्तुत किया गया। लेकिन तकनीकी खामी के चलते इसमें से 16 करोड़ रुपये के भुगतान की प्रक्रिया को स्वीकृति नहीं मिल पायी। इस दौरान जिले के हिस्से में आवंटित धनराशि से सिर्फ 17 करोड़ की बकाया बिल राशि का भुगतान ही हो पाया। इससे शत-प्रतिशत भुगतान की आस लगाए ग्राम प्रधानों को झटका लगा है। अब शेष बकाया भुगतान के लिए फिर से राशि आने का इंतजार करना पड़ेगा।
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बोले ग्राम प्रधान, कैसे होंगे कार्य
अंधियरवा के ग्राम प्रधान वेदप्रकाश वर्मा ने कहा कि मनरेगा के तहत जो पक्का कार्य कराया था, उसका 7.50 लाख का बकाया था। गत सोमवार को शासन से जो राशि रिलीज हुई थी, उससे मात्र 80 हजार रुपये ही भुगतान को मिल पाया। अब समझ नहीं आ रहा कि इन रुपयों को किसे और कितना दें। शत-प्रतिशत भुगतान की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। ऐसे में पक्का कार्य किस तरह से आगे बढ़ेगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। अकबरपुर विकास खंड के ग्राम प्रधान ने बताया कि बकाया भुगतान के लिए मात्र आठ प्रतिशत धनराशि ही मिली है। ऐसे में शत-प्रतिशत भुगतान न होने से पक्के कार्य को आगे बढ़ाने प्रयासों को तगड़ा झटका लगा है।
दोबारा राशि आने पर होगा भुगतान
बीते दिनों जब राशि आई थी, तो सभी विकास खंडों की ओर से डोंगल लगाया गया था। भुगतान के लिए सिर्फ 17 करोड़ रुपये ही उपलब्ध हो सके। बची हुई बकाया राशि का भुगतान अब पुन: धनराशि आने पर ही सुनिश्चित हो सकेगा।
राजेंद्र प्रसाद मिश्र, मनरेगा उपायुक्त
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जिले की 902 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत विभिन्न प्रकार के निर्माण कार्य कराए गए थे। शासन से क्रय सामग्रियों के भुगतान के लिए राशि न मिलने के कारण प्राय: सभी ग्राम पंचायतों में योजना के तहत संचालित कार्य ठप पड़े हैं। बीते आठ माह से क्रय सामग्रियों के बकाया भुगतान की मांग ग्राम प्रधानों द्वारा की जा रही है। आठ माह के लंबे इंतजार के बाद गत बीते दिनों शासन स्तर से क्रय सामग्रियों का बकाया भुगतान चुकाने के लिए प्रदेश में एक साथ बजट धनराशि निर्गत की गयी।
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इस दौरान बकाया बिलों के भुगतान के लिए जिले के सभी नौ ब्लॉक स्तर से 33 करोड़ रुपये का डिमांड डोगल के जरिए प्रस्तुत किया गया। लेकिन तकनीकी खामी के चलते इसमें से 16 करोड़ रुपये के भुगतान की प्रक्रिया को स्वीकृति नहीं मिल पायी। इस दौरान जिले के हिस्से में आवंटित धनराशि से सिर्फ 17 करोड़ की बकाया बिल राशि का भुगतान ही हो पाया। इससे शत-प्रतिशत भुगतान की आस लगाए ग्राम प्रधानों को झटका लगा है। अब शेष बकाया भुगतान के लिए फिर से राशि आने का इंतजार करना पड़ेगा।
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बोले ग्राम प्रधान, कैसे होंगे कार्य
अंधियरवा के ग्राम प्रधान वेदप्रकाश वर्मा ने कहा कि मनरेगा के तहत जो पक्का कार्य कराया था, उसका 7.50 लाख का बकाया था। गत सोमवार को शासन से जो राशि रिलीज हुई थी, उससे मात्र 80 हजार रुपये ही भुगतान को मिल पाया। अब समझ नहीं आ रहा कि इन रुपयों को किसे और कितना दें। शत-प्रतिशत भुगतान की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। ऐसे में पक्का कार्य किस तरह से आगे बढ़ेगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। अकबरपुर विकास खंड के ग्राम प्रधान ने बताया कि बकाया भुगतान के लिए मात्र आठ प्रतिशत धनराशि ही मिली है। ऐसे में शत-प्रतिशत भुगतान न होने से पक्के कार्य को आगे बढ़ाने प्रयासों को तगड़ा झटका लगा है।
दोबारा राशि आने पर होगा भुगतान
बीते दिनों जब राशि आई थी, तो सभी विकास खंडों की ओर से डोंगल लगाया गया था। भुगतान के लिए सिर्फ 17 करोड़ रुपये ही उपलब्ध हो सके। बची हुई बकाया राशि का भुगतान अब पुन: धनराशि आने पर ही सुनिश्चित हो सकेगा।
राजेंद्र प्रसाद मिश्र, मनरेगा उपायुक्त