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एनटीपीसी को जरूरत का आधा मिल रहा कोयला
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अंबेडकरनगर। तमाम कोशिशों के बाद भी एनटीपीसी के टांडा प्लांट को कोयला संकट से उबारा नहीं जा सका है। हालात यह हैं कि लगभग छह रैक कोयले की जरूरत के सापेक्ष अधिकतम तीन रैक कोयला ही प्रतिदिन यहां पहुंच पा रहा है। ऐसे में लगातार पांचवें दिन भी फेज-1 की कुल 440 यूनिट की चार इकाइयों से बिजली का उत्पादन ठप रहा। उधर, फेज-2 की कुल 1320 मेगावाट की दो नई इकाइयों से भी क्षमता के अनुरूप उत्पादन नहीं हो पा रहा है। हालांकि अब दोनों नई इकाइयों को मिलाकर 24 घंटे का औसत उत्पादन लगभग साढ़े नौ सौ मेगावाट तक पहुंच गया है। इस बीच कोयला संकट के चलते अभी अगले तीन-चार दिनों तक फेज-1 की चारों ठप इकाइयों से फिर से बिजली उत्पादन शुरू होने के आसार नहीं बन पा रहे हैं।
एनटीपीसी का टांडा संयंत्र भी राष्ट्रव्यापी कोयला संकट की चपेट में है। यहां भी कोयले की कमी ने बिजली उत्पादन काफी हद तक प्रभावित किया है। एनटीपीसी के स्थानीय अधिकारियों व कर्मचारियों की सूझबूझ व तत्परता के चलते स्थिति कुछ दिनों तक तो जरूरी नियंत्रित रही, लेकिन इसके बाद आपूर्ति पर तेजी से असर आने लगा। नतीजा यह हुआ कि यहां पर फेज-1 की 440 यूनिट की चार इकाइयां एक-एक कर अस्थायी तौर पर ठप कर देनी पड़ीं। इसके बावजूद हालात अभी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ पा रहे हैं।
अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एनटीपीसी में कोयले की जितनी खपत है, उसकी 50 प्रतिशत आपूर्ति ही इन दिनों हो पा रही है। इसके चलते ही यहां 1760 मेगावाट की कुल उत्पादन क्षमता के सापेक्ष बिजली का उत्पादन नहीं हो पा रहा। सूत्रों के अनुसार एनटीपीसी को प्रतिदिन लगभग छह रैक कोयले की जरूरत सुचारु बिजली उत्पादन के लिए होती है। अभी तमाम कोशिशों के बाद भी तीन रैक कोयले की उपलब्धता एनटीपीसी के टांडा संयंत्र को हो पा रही है। चार पांच दिन पहले तक कोयले की दो रैक पहुंच पा रही थीं, लेकिन अब औसतन तीन रैक कोयला टांडा एनटीपीसी को मिल पा रहा है।
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ऐसे में फिलहाल यह संभव नहीं हो पा रहा है कि फेज-1 की चारों इकाइयों से फिर से बिजली का उत्पादन शुरू किया जा सके। चारों इकाइयों को ऊर्जीकृत किसी तरह से बनाए रखा जा रहा है। इनसे बिक्री के लिए बिजली का उत्पादन नहीं किया जा रहा है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो अगले तीन से चार दिनों तक अभी फेज-1 की सभी चार यूनिटों से बिजली का उत्पादन शुरू होने के आसार नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब तक पांच से छह रैक कोयला एनटीपीसी टांडा को नहीं मिलने लगेगा, तब तक फेज-1 की इकाइयों से बिजली का उत्पादन शुरू कर पाना संभव नहीं हो पाएगा।
फेज-2 की इकाइयों से बढ़ा बिजली उत्पादन
एनटीपीसी टांडा में फेज-2 के तहत 660-660 क्षमता की दो इकाइयां स्थापित हैं। इन दोनों में बिजली उत्पादन कार्य काफी हद तक प्रभावित हुआ था। यह हाल तब था जब फेज-1 की चारों इकाइयां चल रही थीं। फेज-1 की इन चारों इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद किए जाने के बाद से यहां लगने वाले कोयले की खपत को फेज-2 की इकाइयों की तरफ मोड़ दिया गया। इसका असर भी देखने को मिल रहा है। पहले जहां कुल 1320 यूनिट की दोनों इकाइयों से कोयला संकट के चलते उत्पादन घटकर लगभग साढ़े सात सौ मेगावाट हो गया था। वहीं फेज-1 की चारों इकाइयों को बंद करने के बाद उत्पादन बढ़कर साढ़े आठ सौ पहुंचा था। अब यहां लगभग साढ़े नौ सौ मेगावाट का औसत उत्पादन हो रहा है। हालांकि एनटीपीसी की स्थानीय टीम के अथक प्रयासों के चलते सोमवार को एक बार एक हजार मेगावाट तक का उत्पादन करने की सफलता हासिल हुई थी।
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एनटीपीसी का टांडा संयंत्र भी राष्ट्रव्यापी कोयला संकट की चपेट में है। यहां भी कोयले की कमी ने बिजली उत्पादन काफी हद तक प्रभावित किया है। एनटीपीसी के स्थानीय अधिकारियों व कर्मचारियों की सूझबूझ व तत्परता के चलते स्थिति कुछ दिनों तक तो जरूरी नियंत्रित रही, लेकिन इसके बाद आपूर्ति पर तेजी से असर आने लगा। नतीजा यह हुआ कि यहां पर फेज-1 की 440 यूनिट की चार इकाइयां एक-एक कर अस्थायी तौर पर ठप कर देनी पड़ीं। इसके बावजूद हालात अभी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ पा रहे हैं।
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अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एनटीपीसी में कोयले की जितनी खपत है, उसकी 50 प्रतिशत आपूर्ति ही इन दिनों हो पा रही है। इसके चलते ही यहां 1760 मेगावाट की कुल उत्पादन क्षमता के सापेक्ष बिजली का उत्पादन नहीं हो पा रहा। सूत्रों के अनुसार एनटीपीसी को प्रतिदिन लगभग छह रैक कोयले की जरूरत सुचारु बिजली उत्पादन के लिए होती है। अभी तमाम कोशिशों के बाद भी तीन रैक कोयले की उपलब्धता एनटीपीसी के टांडा संयंत्र को हो पा रही है। चार पांच दिन पहले तक कोयले की दो रैक पहुंच पा रही थीं, लेकिन अब औसतन तीन रैक कोयला टांडा एनटीपीसी को मिल पा रहा है।
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ऐसे में फिलहाल यह संभव नहीं हो पा रहा है कि फेज-1 की चारों इकाइयों से फिर से बिजली का उत्पादन शुरू किया जा सके। चारों इकाइयों को ऊर्जीकृत किसी तरह से बनाए रखा जा रहा है। इनसे बिक्री के लिए बिजली का उत्पादन नहीं किया जा रहा है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो अगले तीन से चार दिनों तक अभी फेज-1 की सभी चार यूनिटों से बिजली का उत्पादन शुरू होने के आसार नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब तक पांच से छह रैक कोयला एनटीपीसी टांडा को नहीं मिलने लगेगा, तब तक फेज-1 की इकाइयों से बिजली का उत्पादन शुरू कर पाना संभव नहीं हो पाएगा।
फेज-2 की इकाइयों से बढ़ा बिजली उत्पादन
एनटीपीसी टांडा में फेज-2 के तहत 660-660 क्षमता की दो इकाइयां स्थापित हैं। इन दोनों में बिजली उत्पादन कार्य काफी हद तक प्रभावित हुआ था। यह हाल तब था जब फेज-1 की चारों इकाइयां चल रही थीं। फेज-1 की इन चारों इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद किए जाने के बाद से यहां लगने वाले कोयले की खपत को फेज-2 की इकाइयों की तरफ मोड़ दिया गया। इसका असर भी देखने को मिल रहा है। पहले जहां कुल 1320 यूनिट की दोनों इकाइयों से कोयला संकट के चलते उत्पादन घटकर लगभग साढ़े सात सौ मेगावाट हो गया था। वहीं फेज-1 की चारों इकाइयों को बंद करने के बाद उत्पादन बढ़कर साढ़े आठ सौ पहुंचा था। अब यहां लगभग साढ़े नौ सौ मेगावाट का औसत उत्पादन हो रहा है। हालांकि एनटीपीसी की स्थानीय टीम के अथक प्रयासों के चलते सोमवार को एक बार एक हजार मेगावाट तक का उत्पादन करने की सफलता हासिल हुई थी।