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Ambedkar Nagar News: वाद सूची में दिवंगत अधिवक्ता का नाम दर्ज, उठे सवाल
Thu, 28 Aug 2025 10:58 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Thu, 28 Aug 2025 10:58 PM IST
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विद्युतनगर (अंबेडकरनगर)। उप जिलाधिकारी (एसडीएम) न्यायालय टांडा में बुधवार को जारी वाद सूची में लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। एक वाद में प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता के रूप में दिवंगत अधिवक्ता का नाम अंकित किया गया, जिनका निधन काफी समय पहले हो चुका है। इस चूक को लेकर अधिवक्ताओं में असंतोष है।
जानकारी के अनुसार 27 अगस्त को एसडीएम टांडा न्यायालय में 208 वादों की सुनवाई सूचीबद्ध थी। इनमें से पांचवें नंबर पर दर्ज वाद सरकार बनाम पतिराम आदि (थाना इब्राहिमपुर) में सरकारी अधिवक्ता जावेद सिद्दीकी और प्रतिवादी की ओर से महेन्द्र नाथ श्रीवास्तव का नाम वाद पत्र में अंकित था। स्थानीय अधिवक्ताओं का कहना है कि यह सिर्फ त्रुटि नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में मूलभूत लापरवाही का उदाहरण है। उनका कहना है कि यदि दिवंगत अधिवक्ताओं के नाम अब भी न्यायिक रिकॉर्ड में संलग्न हैं, तो यह न केवल सिस्टम की निष्क्रियता को दर्शाता है, बल्कि वादियों के न्याय पाने के अधिकार को भी प्रभावित करता है।
एसडीएम ने दिए जांच के निर्देश
एसडीएम टांडा अरविंद त्रिपाठी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि संभावना है कि पुराने रिकॉर्ड को अपडेट नहीं किया गया होगा। संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और रिकॉर्ड में संशोधन कराया जाएगा। लापरवाही पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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जानकारी के अनुसार 27 अगस्त को एसडीएम टांडा न्यायालय में 208 वादों की सुनवाई सूचीबद्ध थी। इनमें से पांचवें नंबर पर दर्ज वाद सरकार बनाम पतिराम आदि (थाना इब्राहिमपुर) में सरकारी अधिवक्ता जावेद सिद्दीकी और प्रतिवादी की ओर से महेन्द्र नाथ श्रीवास्तव का नाम वाद पत्र में अंकित था। स्थानीय अधिवक्ताओं का कहना है कि यह सिर्फ त्रुटि नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में मूलभूत लापरवाही का उदाहरण है। उनका कहना है कि यदि दिवंगत अधिवक्ताओं के नाम अब भी न्यायिक रिकॉर्ड में संलग्न हैं, तो यह न केवल सिस्टम की निष्क्रियता को दर्शाता है, बल्कि वादियों के न्याय पाने के अधिकार को भी प्रभावित करता है।
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एसडीएम ने दिए जांच के निर्देश
एसडीएम टांडा अरविंद त्रिपाठी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि संभावना है कि पुराने रिकॉर्ड को अपडेट नहीं किया गया होगा। संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और रिकॉर्ड में संशोधन कराया जाएगा। लापरवाही पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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