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Ambedkar Nagar News: धैर्य खोने से टूटते हैं संबंध
Wed, 05 Nov 2025 11:44 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Wed, 05 Nov 2025 11:44 PM IST
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आलापुर (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के जोगीपुर में श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को प्रवाचक देवेश मिश्रा ने सती चरित्र, ध्रुव चरित्र व प्रायश्चित की महत्ता का वर्णन किया।
प्रवाचक ने कहा कि जहां आपके आराध्य देव या गुरु का अपमान होने की संभावना हो, उस स्थान पर जाना पाप समान है, चाहे वह आपके पिता का घर ही क्यों न हो। जब भगवान शिव की अनुमति के बिना सती अपने पिता दक्ष के यज्ञ में गईं, तो वहां भगवान शिव का अपमान हुआ। इस अपमान से आहत सती ने स्वयं को अग्नि में स्वाहा कर दिया। सम्मान और मर्यादा धर्म से भी बड़ा आचरण है। जहां गुरु और इष्ट की अवमानना हो, वहां भक्ति का वास नहीं होता। ध्रुव की सौतेली माता सुरुचि ने जब अपमान किया, तब ध्रुव की माता सुनीति ने क्रोध नहीं किया, बल्कि अपने पुत्र को धैर्य और संयम का पाठ सिखाया। प्रवाचक ने कहा कि यदि परिवार में संकट आए तो धैर्य ही सबसे बड़ा धर्म है। धैर्य खोने से संबंध टूटते हैं, जबकि संयम से संकट टल जाते हैं। भक्ति की कोई आयु नहीं होती। जैसे मिट्टी को बचपन में आकार दिया जा सकता है, वैसे ही बचपन में भक्ति का बीज बोने से जीवन धन्य बनता है। मनुष्य को अपने कर्मों की शुद्धि पर ध्यान देना चाहिए।
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प्रवाचक ने कहा कि जहां आपके आराध्य देव या गुरु का अपमान होने की संभावना हो, उस स्थान पर जाना पाप समान है, चाहे वह आपके पिता का घर ही क्यों न हो। जब भगवान शिव की अनुमति के बिना सती अपने पिता दक्ष के यज्ञ में गईं, तो वहां भगवान शिव का अपमान हुआ। इस अपमान से आहत सती ने स्वयं को अग्नि में स्वाहा कर दिया। सम्मान और मर्यादा धर्म से भी बड़ा आचरण है। जहां गुरु और इष्ट की अवमानना हो, वहां भक्ति का वास नहीं होता। ध्रुव की सौतेली माता सुरुचि ने जब अपमान किया, तब ध्रुव की माता सुनीति ने क्रोध नहीं किया, बल्कि अपने पुत्र को धैर्य और संयम का पाठ सिखाया। प्रवाचक ने कहा कि यदि परिवार में संकट आए तो धैर्य ही सबसे बड़ा धर्म है। धैर्य खोने से संबंध टूटते हैं, जबकि संयम से संकट टल जाते हैं। भक्ति की कोई आयु नहीं होती। जैसे मिट्टी को बचपन में आकार दिया जा सकता है, वैसे ही बचपन में भक्ति का बीज बोने से जीवन धन्य बनता है। मनुष्य को अपने कर्मों की शुद्धि पर ध्यान देना चाहिए।
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