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Ambedkar Nagar News: दर्द व चीख से गूंज उठा कसड़ा गांव
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महिलाओं को समझाते लोग। संवाद
अंबेडकरनगर। अकबरपुर के मीरानपुर मुरादाबाद में चार बच्चाें की बेरहमी से हत्या के बाद शव गांव पहुंचे तो हर तरफ चीख-पुकार मच गई। महिलाओं से लेकर बच्चों और परिवार के पुरुषों से आंसुओं का समंदर बह पड़ा। 70 वर्षीय दादी अमीना बानों अपने पोते-पोतियों के कफन में लिपटे शव देखकर बेसुध हो गईं। वह चीख-चीख कर कहती रहीं, उठो... शफीक, सऊद, उमर, बयान उठो, मुझसे बात करो। हर कोई उन्हें समझाने का प्रयास करता रहा, लेकिन आंसू थे कि थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
दोपहर करीब एक बजे शव गांव पहुंचे। पहले इन सभी को सलीम के चचेरे भाई के घर के बाहर तख्त पर रखा गया। महिलाएं इस कदर बेकाबू हो गईं कि उन्हें संभालने में लोग पसीना-पसीना हो गए। महिला गासिया खातून की बड़ी बहन पुलिस के सामने चीख-चीख कर कहती रहीं कि गासिया को ढूंढकर लाओ, उससे पूछो किसने की हत्या? बड़ी अम्मी शकीला अपने बच्चों को गले लगाने के लिए दौड़ीं और अचेत होकर जमीन पर गिर पड़ीं।
परिजनों ने उन्हें उठाया और पानी के छींटे मारकर होश में लाने की कोशिश की, लेकिन वह बार-बार बेहोश हो जाती थीं। बच्चों का चेहरा देखने की ख्वाहिश हर किसी को थी लेकिन हत्यारे ने सिर इस कदर कूच दिया था कि उनको पोस्टमार्टम के बाद पहचान पाना भी मुश्किल था। परिवार के बड़े-बुजुर्ग जनाजा उठने तक महिलाओं को समझाने-बुझाने का प्रयास करते रहे। चार बच्चों का जनाजा एक साथ उठा तो घर के आंगन से लेकर गलियारे तक महिलाएं बदहवास नजर आईं।
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वीडियो कॉल के जरिये अपनों ने जताया शोक : अंबेडकरनगर। सऊदी अरब में रह रहे अब्दुल कादिर ने अपने चचेरे बहन-भाइयों के जनाजे को देखकर भावुक हो गए। बच्चों की हत्या के बाद पिता नियाज ने भी वीडियो काॅल से अपने परिवार की तबाही का मंजर देखा। ताऊ करीम व कलीम भी वीडियो कॉल के जरिये ही इस दुख की घड़ी में शामिल हो सके। परिजनों की आंखों से बहते आंसू उनके न पहुंच पाने के दर्द को बयां कर रहा था।
दूसरे गांव से मंगवाने पड़े ताबूत : महरुआ के मसड़ा गांव में एक साथ चार शव पहुंचने के बाद उनको सुपुर्दे खाक करने के लिए ले जाने वाले ताबूत कम पड़ गए। मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार सुपुर्द-ए-खाक करने से पहले शवों को ताबूतों में रखा जाता है लेकिन गांव में केवल एक ही ताबूत था। ऐसे में महरूआ से एक और बरामदपुर जरियारी से दो ताबूत मंगवाने पड़े। इसके बाद ही जनाजे निकाले जा सके।
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दोपहर करीब एक बजे शव गांव पहुंचे। पहले इन सभी को सलीम के चचेरे भाई के घर के बाहर तख्त पर रखा गया। महिलाएं इस कदर बेकाबू हो गईं कि उन्हें संभालने में लोग पसीना-पसीना हो गए। महिला गासिया खातून की बड़ी बहन पुलिस के सामने चीख-चीख कर कहती रहीं कि गासिया को ढूंढकर लाओ, उससे पूछो किसने की हत्या? बड़ी अम्मी शकीला अपने बच्चों को गले लगाने के लिए दौड़ीं और अचेत होकर जमीन पर गिर पड़ीं।
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परिजनों ने उन्हें उठाया और पानी के छींटे मारकर होश में लाने की कोशिश की, लेकिन वह बार-बार बेहोश हो जाती थीं। बच्चों का चेहरा देखने की ख्वाहिश हर किसी को थी लेकिन हत्यारे ने सिर इस कदर कूच दिया था कि उनको पोस्टमार्टम के बाद पहचान पाना भी मुश्किल था। परिवार के बड़े-बुजुर्ग जनाजा उठने तक महिलाओं को समझाने-बुझाने का प्रयास करते रहे। चार बच्चों का जनाजा एक साथ उठा तो घर के आंगन से लेकर गलियारे तक महिलाएं बदहवास नजर आईं।
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वीडियो कॉल के जरिये अपनों ने जताया शोक : अंबेडकरनगर। सऊदी अरब में रह रहे अब्दुल कादिर ने अपने चचेरे बहन-भाइयों के जनाजे को देखकर भावुक हो गए। बच्चों की हत्या के बाद पिता नियाज ने भी वीडियो काॅल से अपने परिवार की तबाही का मंजर देखा। ताऊ करीम व कलीम भी वीडियो कॉल के जरिये ही इस दुख की घड़ी में शामिल हो सके। परिजनों की आंखों से बहते आंसू उनके न पहुंच पाने के दर्द को बयां कर रहा था।
दूसरे गांव से मंगवाने पड़े ताबूत : महरुआ के मसड़ा गांव में एक साथ चार शव पहुंचने के बाद उनको सुपुर्दे खाक करने के लिए ले जाने वाले ताबूत कम पड़ गए। मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार सुपुर्द-ए-खाक करने से पहले शवों को ताबूतों में रखा जाता है लेकिन गांव में केवल एक ही ताबूत था। ऐसे में महरूआ से एक और बरामदपुर जरियारी से दो ताबूत मंगवाने पड़े। इसके बाद ही जनाजे निकाले जा सके।