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आर्थिक हालत ने उच्च शिक्षा से रोका तो खुद खोल दी बच्चों के लिए पाठशाला
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फोटो 32, अंबेडकरनगर के आलापुर में बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देते दिव्यांग नीलेश यादव
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। हिम्मत और जुनून हो तो लोग क्या नहीं कर सकते हैं। पद्मश्री अरुणिमा सिन्हा को अपना आदर्श मानकर आलापुर तहसील क्षेत्र के सिपाह गांव निवासी नीलेश यादव ने समाज में अपनी एक नई पहचान बनाने की ठान ली है। दोनों पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने छोटे छोटे बच्चों का भविष्य संवारने का संकल्प लिया है। प्रतिदिन अलग अलग चरण में वह अपने घर पर ही गांव के करीब 40 बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने का काम कर रहे हैं। यही नहीं अपने सहपाठियों से पैसा एकत्रित करते हैं और बच्चों को समय समय पर जरूरी पाठ्य पुस्तकें भी मुहैया कराते हैं।
कहते हैं जब इरादें नेक हों और अपने लक्ष्य के प्रति मजबूत दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो न गरीबी आड़े आती है, और न ही शारीरिक अक्षमता। कुछ ऐसी ही मिसाल कायम कर रहे हैं आलापुर तहसील क्षेत्र के सिपाह गांव निवासी 31 वर्षीय नीलेश यादव। दोनों पैरों से दिव्यांग नीलेश की आर्थिक स्थिति भले ही ठीक नहीं रही, लेकिन पढ़ने में उनकी रुचि हमेशा थी। धनाभाव के चलते उनके सपनों को अब तक पर तो नहीं लग सके, लेकिन बेहतर शिक्षा हासिल कर समाज के आम बच्चों को आगे ले जाने की उनके अंदर जो ललक है, वह अपने बलबूते उसे पूरा करने में जुटे हैं। जिले की निवासी पद्मश्री अरुणिमा सिन्हा को उन्होंने अपना आदर्श मान लिया है। दिव्यांग अरुणिमा ने एवरेस्ट फतह करकर न सिर्फ करोड़ों हिंदुस्तानियों का सिर गर्व से ऊंचा किया, बल्कि वह लाखों ऐसे दिव्यांगों के जीवन का प्रेरणाश्रोत बन चुकी हैं, जिनसे प्रेरणा से हर कोई अपने लक्ष्य को पा सकता है।
आर्थिक तंगी के चलते उच्च शिक्षा हासिल करने से वंचित नीलेश पिछले काफी दिनों से अपने घर पर ही गांव के 40 से अधिक बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने का वीणा उठा लिया है। सुबह 7 बजे से यह सिलसिला प्रत्येक दिन शुरू होता है और अपराह्न तीन बजे तक चलता है। नीलेश की मानें तो उन्हें ऐसा करने से अपार सुख की अनुभूति होती है। उनका लक्ष्य था कि उच्च शिक्षा हासिल कर शिक्षक बनना और बच्चों को बेहतर शिक्षा देना। विभिन्न परिस्थितियों के कारण वह सरकारी शिक्षक तो नहीं बन सके, लेकिन वह अपने लक्ष्य को अपने हिसाब से जरूर पूरा कर रहे हैं। बताया कि इन दिनों वह परिजनों व अन्य लोगों की मदद से सिंगारी देवी महाविद्यालय से डीएलएड बीटीसी का प्रक्षिशण ले रहे हैं।
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कहते हैं जब इरादें नेक हों और अपने लक्ष्य के प्रति मजबूत दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो न गरीबी आड़े आती है, और न ही शारीरिक अक्षमता। कुछ ऐसी ही मिसाल कायम कर रहे हैं आलापुर तहसील क्षेत्र के सिपाह गांव निवासी 31 वर्षीय नीलेश यादव। दोनों पैरों से दिव्यांग नीलेश की आर्थिक स्थिति भले ही ठीक नहीं रही, लेकिन पढ़ने में उनकी रुचि हमेशा थी। धनाभाव के चलते उनके सपनों को अब तक पर तो नहीं लग सके, लेकिन बेहतर शिक्षा हासिल कर समाज के आम बच्चों को आगे ले जाने की उनके अंदर जो ललक है, वह अपने बलबूते उसे पूरा करने में जुटे हैं। जिले की निवासी पद्मश्री अरुणिमा सिन्हा को उन्होंने अपना आदर्श मान लिया है। दिव्यांग अरुणिमा ने एवरेस्ट फतह करकर न सिर्फ करोड़ों हिंदुस्तानियों का सिर गर्व से ऊंचा किया, बल्कि वह लाखों ऐसे दिव्यांगों के जीवन का प्रेरणाश्रोत बन चुकी हैं, जिनसे प्रेरणा से हर कोई अपने लक्ष्य को पा सकता है।
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आर्थिक तंगी के चलते उच्च शिक्षा हासिल करने से वंचित नीलेश पिछले काफी दिनों से अपने घर पर ही गांव के 40 से अधिक बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने का वीणा उठा लिया है। सुबह 7 बजे से यह सिलसिला प्रत्येक दिन शुरू होता है और अपराह्न तीन बजे तक चलता है। नीलेश की मानें तो उन्हें ऐसा करने से अपार सुख की अनुभूति होती है। उनका लक्ष्य था कि उच्च शिक्षा हासिल कर शिक्षक बनना और बच्चों को बेहतर शिक्षा देना। विभिन्न परिस्थितियों के कारण वह सरकारी शिक्षक तो नहीं बन सके, लेकिन वह अपने लक्ष्य को अपने हिसाब से जरूर पूरा कर रहे हैं। बताया कि इन दिनों वह परिजनों व अन्य लोगों की मदद से सिंगारी देवी महाविद्यालय से डीएलएड बीटीसी का प्रक्षिशण ले रहे हैं।
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