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इस्लाम के आदर्शों पर चल महिलाओं को दें पूरा अधिकार
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अंबेडकरनगर। इस्लाम में महिलाओं को पुरुषों के बराबर दर्जा दिया गया है। ऐसे में हम सभी की जिम्मेदारी है कि इस्लाम के बताए रास्तों पर चलते हुए महिलाओं को उनका अधिकार दें। यदि इसमें कोई किसी भी प्रकार की कमी करता है या फिर महिला उत्पीड़न करता है, तो वह वास्तव में इस्लाम का सच्चा मानने वाला नहीं है। यह बातें मौलाना मोहम्मद मोहसनि ने मजलिस को संबोधित करते हुए कहीं।
हजपुरा स्थित इमामबारगाह में आयोजित मजलिस में मौलाना मोहसिन ने कहा कि आखिरी रसूल हजरत मोहम्मद मुस्तफा की इकलौती बेटी फातिमा जहेरा ने महिलाओं को उनके अधिकार के बारे में सबसे पहले जागरूक किया था। उन्होंने इस संबंध में अभियान चलाकर महिलाओं को उनके अधिकार के प्रति जागरूक किया था। फातिमा जहेरा ने ऐसे समय में महिलाओं को जागरूक करना प्रारंभ किया था, जब अरब में यदि लड़कियां पैदा होती थीं, तो उन्हें जिंदा दफना दिया जाता था। जागरूकता का ही नतीजा था कि इस प्रथा की समाप्ति हो गई।
मौलाना ने लड़कियों की शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि लड़कियों पर दो परिवारों की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में उनका साक्षर होना अत्यंत आवश्यक है। मौलाना ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि कुछ लोग लड़कों को बेहतर शिक्षा देने पर अधिक जोर देते हैं। यह गलत है। कहा कि महिला हिंसा को इस्लाम में बड़ा गुनाह बताया गया है। बाद में मौलाना ने फातिमा जहेरा की शहादत पढ़कर माहौल को भावुक बना। इस मौके पर मौलाना मोहम्मद अली, मौलाना अरशी, सिब्ते हसन, राहिब, जाहिद, नदीम आदि मौजूद रहे।
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हजपुरा स्थित इमामबारगाह में आयोजित मजलिस में मौलाना मोहसिन ने कहा कि आखिरी रसूल हजरत मोहम्मद मुस्तफा की इकलौती बेटी फातिमा जहेरा ने महिलाओं को उनके अधिकार के बारे में सबसे पहले जागरूक किया था। उन्होंने इस संबंध में अभियान चलाकर महिलाओं को उनके अधिकार के प्रति जागरूक किया था। फातिमा जहेरा ने ऐसे समय में महिलाओं को जागरूक करना प्रारंभ किया था, जब अरब में यदि लड़कियां पैदा होती थीं, तो उन्हें जिंदा दफना दिया जाता था। जागरूकता का ही नतीजा था कि इस प्रथा की समाप्ति हो गई।
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मौलाना ने लड़कियों की शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि लड़कियों पर दो परिवारों की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में उनका साक्षर होना अत्यंत आवश्यक है। मौलाना ने कहा कि अक्सर देखा गया है कि कुछ लोग लड़कों को बेहतर शिक्षा देने पर अधिक जोर देते हैं। यह गलत है। कहा कि महिला हिंसा को इस्लाम में बड़ा गुनाह बताया गया है। बाद में मौलाना ने फातिमा जहेरा की शहादत पढ़कर माहौल को भावुक बना। इस मौके पर मौलाना मोहम्मद अली, मौलाना अरशी, सिब्ते हसन, राहिब, जाहिद, नदीम आदि मौजूद रहे।
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