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जिला अस्पताल में दवाओं से लेकर जरूरी सामान तक की करनी पड़ेगी खुद व्यवस्था

Mon, 17 Oct 2022 11:45 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 17 Oct 2022 11:45 PM IST
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From medicines to essential items, arrangements will have to be made in the district hospital itself
अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल में मुफ्त इलाज की उम्मीद दम तोड़ रही है। उपचार से जुड़े ज्यादातर सामान व दवाओं की व्यवस्था मरीजों को स्वयं करनी होती है। बेड पर यदि चादर की जरूरत महसूस हो तो घर से लाना होगा। चोट लगी है और टांके लगवाने हैं तो धागे की व्यवस्था भी करनी पड़ेगी। यही नहीं ग्लब्स, आरएल बोतल, यूरिन बैग व स्पाइनल निडिल समेत सुन्न करने के लिए लगने वाला इंजेक्शन भी उपलब्ध नहीं है।
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प्रदेश सरकार के तमाम दावों के बावजूद जिला अस्पताल में बेहतर उपचार की सुविधाएं आए दिन बेपटरी ही दिखती हैं। कई दिन तक जहां जरूरी जीवन रक्षक दवाओं का टोटा नहीं दूर हो पाता है तो वहीं इमरजेंसी पहुंचने वाले मरीजों के उपचार के लिए दवाओं के साथ जरूरी सामग्री का संकट बना रहता है।
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सोमवार को जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती ज्यादातर मरीजों की बेडशीट ही नदारद थी। कई मरीज दिक्कत महसूस होने पर अपने घर से चादर मंगाकर उसका प्रयोग करते दिखे। कई बेडों की हालत भी ठीक नहीं थी। कहीं फॉम निकल गए थे तो कहीं किसी बेड पर जंग लगा दिखा। वार्डों की साफ-सफाई व्यवस्था भी रामभरोसे ही दिखी।
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अस्पताल में मिल रहीं सुविधाओं का जिक्र करते ही ज्यादातर मरीजों का दर्द छलक पड़ा। बोले- साहब बस नाम का जिला अस्पताल है, कहने के लिए ही यहां मुफ्त में उपचार होता है। राहत बस इतनी है कि निजी अस्पतालों में बेडचार्ज देना पड़ता है, यहां नहीं। दवाएं व इलाज से जुड़े अधिकांश सामान बाहर से ही खरीदकर लाने पड़े हैं।
बड़ेरिया निवासी रामनयन पेट दर्द के चलते शनिवार रात भर्ती हुए थे। उनके बेड पर चादर नहीं थी। इससे काफी दिक्कत हो रही थी। शिकायत दर्ज करायी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इस पर घर से चादर मंगवानी पड़ी। डिहवा दौलतपुर के मुन्नीलाल बुखार से पीड़ित हैं। उनके भी बेड से चादर नदारद थी।
जलालपुर के चकौरा निवासी जगरूपम निषाद ने बताया कि वे शनिवार को दुर्घटना में घायल हो गए थे। परिजनों ने उन्हें यहां भर्ती कराया। उनके पैर में टांका लगाने की जरूरत पड़ी तो अस्पताल कर्मियों ने बताया कि धागा ही मौजूद नहीं है। उनके परिजन बाहर से 250 रुपये में धागा खरीदकर लाए। इसके बाद उन्हें टांका लगाया गया। बुखार से पीड़ित नुरुद्दीननपुर निवासी सुंदरी ने बताया कि उनके भी बेड पर चादर नहीं है। चिकित्सकों ने जो दवाएं लिखी थीं, उनमें से एक दवा बाहर से खरीदनी पड़ी।

कुछ दवाओं व सामान की उपलब्धता के लिए स्वास्थ्य निदेशालय को पत्र लिखा गया है। डिमांड के अनुसार सामान व दवाओं की उपलब्धता न होने के चलते यह संकट खड़ा हुआ है। जल्द ही यह समस्या दूर हो जाएगी। मरीजों को बेहतर सुविधा व उपचार का लाभ दिया जाएगा।
-डॉ. ओमप्रकाश, सीएमएस
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