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Ambedkar Nagar News: जानलेवा हमले के मामले में पूर्व बसपा नेता बरी
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अंबेडकरनगर। जलालपुर के 37 वर्ष पुराने हत्या के प्रयास के मामले में अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाया। पूर्व बसपा नेता कैलाश यादव समेत तीन आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया गया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-प्रथम) पवन कुमार शुक्ला की अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया है।
यह वारदात आठ मार्च 1989 को हुई थी। जलालपुर निवासी मोतीलाल मिश्रा ने तत्कालीन बसपा नेता कैलाश यादव व इनके साथी अंबिका प्रसाद और हीरालाल समेत पांच के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप जानलेवा हमले और बलवा सहित अन्य तमाम धाराओं में था। मोतीलाल मिश्रा का आरोप था कि पूर्व से दर्ज एक मामले में सुलह का दबाव बनाने के लिए उन पर गोली चलाई गई थी। पुलिस ने जांच के बाद आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया था। मामले की सुनवाई एडीजे प्रथम की कोर्ट में चली।
बरी होने का आधार
विचारण के दौरान आरोपी अंबिका प्रसाद और हीरालाल समेत चार की मौत हो गई थी। ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई। कैलाश यादव के विरुद्ध सुनवाई जारी रखी गई। करीब 37 वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों के गवाहों और साक्ष्यों का परीक्षण किया। मुख्य गवाहों ने अदालत के समक्ष घटना का समर्थन नहीं किया। वादी मोतीलाल मिश्रा और विवेचक का भी निधन हो गया था, जिससे उनकी गवाही नहीं हो पाई। इस दौरान अभियोजन पक्ष आरोपों को पुष्ट नहीं कर पाया।
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यह वारदात आठ मार्च 1989 को हुई थी। जलालपुर निवासी मोतीलाल मिश्रा ने तत्कालीन बसपा नेता कैलाश यादव व इनके साथी अंबिका प्रसाद और हीरालाल समेत पांच के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप जानलेवा हमले और बलवा सहित अन्य तमाम धाराओं में था। मोतीलाल मिश्रा का आरोप था कि पूर्व से दर्ज एक मामले में सुलह का दबाव बनाने के लिए उन पर गोली चलाई गई थी। पुलिस ने जांच के बाद आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया था। मामले की सुनवाई एडीजे प्रथम की कोर्ट में चली।
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बरी होने का आधार
विचारण के दौरान आरोपी अंबिका प्रसाद और हीरालाल समेत चार की मौत हो गई थी। ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई समाप्त कर दी गई। कैलाश यादव के विरुद्ध सुनवाई जारी रखी गई। करीब 37 वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों के गवाहों और साक्ष्यों का परीक्षण किया। मुख्य गवाहों ने अदालत के समक्ष घटना का समर्थन नहीं किया। वादी मोतीलाल मिश्रा और विवेचक का भी निधन हो गया था, जिससे उनकी गवाही नहीं हो पाई। इस दौरान अभियोजन पक्ष आरोपों को पुष्ट नहीं कर पाया।
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