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महिलाओं का कैसे हो उपचार, एएनएम सेंटर खुद पड़ा बीमार
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राजेसुल्तानपुर। सरकार एक तरफ मरीजों को स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का दावा कर रही है। दूसरी तरफ बदहाल पड़े एएनएम सेंटर दुरुस्त करने की जरूरत नहीं महसूस की जा रही है। करीब एक दशक से बनकर तैयार जल्लापुर एएनएम सेंटर बदहाली के दौर से गुजर रहा है। सेंटर पर न तो कभी एएनएम दिखाई पड़ती हैं और न ही स्वास्थ्य विभाग के दूसरे कर्मचारी। करीब पांच हजार से अधिक की आबादी को प्राथमिक चिकित्सा के लिए आज भी दूरदराज के अस्पतालों का चक्कर काटना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि जहांगीरगंज विकास खंड की जल्लापुर ग्राम पंचायत में करीब एक दशक पहले एएनएम सेंटर का निर्माण हुआ था। एएनएम सेंटर का उद्देश्य ग्राम पंचायत की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर प्राथमिक चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के साथ ही प्रसव आदि कराना था। ग्राम पंचायत में एएनएम सेंटर बना तो ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब उन्हें महिलाओं के उपचार के लिए दूर के अस्पतालों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा, लेकिन ग्रामीणों की यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिक सकी। देखरेख के अभाव में एएनएम सेंटर लगातार खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। लाखों रुपए खर्च कर बने इस भवन की सुध लेने न तो कभी तैनात एएनएम पहुंचीं और न ही स्वास्थ्य महकमा।
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ऐसे में यह एएनएम सेंटर ग्रामीणों के लिए छलावा साबित हो रहा है। इससे जल्लापुर, सोल्हवां, गंगासागर, ऊंचेपुर, हज्जीपुर, केदरुपुर, कोटिया, अशरफपुर व मूसेपुर सहित दर्जनों गांवों की आबादी उपचार के लिए दूरदराज के अस्पतालों का चक्कर लगाने के लिए विवश है। गांव के राधेश्याम तिवारी, अजय यादव, धूपनारायण चौहान, मधुकर तिवारी आदि ने स्वास्थ्य विभाग से एएनएम सेंटर की उपयोगिता सुनिश्चित कराने की मांग की है। उधर, जहांगीरगंज सीएचसी अधीक्षक डॉ. उदयचंद्र यादव ने बताया कि जल्द ही मामले को दिखवाया जाएगा।
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गौरतलब है कि जहांगीरगंज विकास खंड की जल्लापुर ग्राम पंचायत में करीब एक दशक पहले एएनएम सेंटर का निर्माण हुआ था। एएनएम सेंटर का उद्देश्य ग्राम पंचायत की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर प्राथमिक चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के साथ ही प्रसव आदि कराना था। ग्राम पंचायत में एएनएम सेंटर बना तो ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
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ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब उन्हें महिलाओं के उपचार के लिए दूर के अस्पतालों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा, लेकिन ग्रामीणों की यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिक सकी। देखरेख के अभाव में एएनएम सेंटर लगातार खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। लाखों रुपए खर्च कर बने इस भवन की सुध लेने न तो कभी तैनात एएनएम पहुंचीं और न ही स्वास्थ्य महकमा।
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ऐसे में यह एएनएम सेंटर ग्रामीणों के लिए छलावा साबित हो रहा है। इससे जल्लापुर, सोल्हवां, गंगासागर, ऊंचेपुर, हज्जीपुर, केदरुपुर, कोटिया, अशरफपुर व मूसेपुर सहित दर्जनों गांवों की आबादी उपचार के लिए दूरदराज के अस्पतालों का चक्कर लगाने के लिए विवश है। गांव के राधेश्याम तिवारी, अजय यादव, धूपनारायण चौहान, मधुकर तिवारी आदि ने स्वास्थ्य विभाग से एएनएम सेंटर की उपयोगिता सुनिश्चित कराने की मांग की है। उधर, जहांगीरगंज सीएचसी अधीक्षक डॉ. उदयचंद्र यादव ने बताया कि जल्द ही मामले को दिखवाया जाएगा।