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गन्ने से सूप पीटकर भगवान को किया आमंत्रित, भगाई गई दरिद्रता
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फोटो 10, अंबेडकरनगर जिला मुख्यालय पर होती गन्ने की बिक्री।
- फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। एकादशी पर्व के दूसरे दिन भोर में परंपरागत ढंग से महिलाओं ने गन्ने से सूप पीटते हुए भगवान को आमंत्रित किया। साथ ही दरिद्रता को खदेड़ा भी। घर से प्रारंभ हुई इस परंपरा को गांव व मोहल्ले के बाहर जाकर संपन्न हुई। इस परंपरा को निभाने के दौरान आतिशबाजी भी हुई। इसके साथ ही महिलाओं व पुरुषों ने विशेष पूजन अर्चन कर परिवार की सुख व समृद्धि के लिए कामना की।
उल्लास के साथ प्रबोधिनी एकादशी पर्व को मनाए जाने के बाद गुरुवार भोर में गन्ने से सूप को पीटने की परंपरा निभाई गई। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान घर में आमंत्रित होते हैं और दरिद्रता दूर होती है। इसी परंपरा को पूरी श्रद्धा के साथ निभाई गई। भोर में पहले महिलाओं ने भगवान को आमंत्रित करने व दहिरद्रता दूर करने का उद्घोष करते हुए गन्ने से सूप पीटा।
घर के कोने कोने में गन्ने से सूप पीटते हुए महिलाएं व युवतियां घर से बाहर निकलीं और इसी प्रकार पीटते हुए गांव के बाहर तक गईं। इसके बाद सूप व गन्न गांव के बाहर फेंक दिया। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से दरिद्रता गांव के बाहर चली जाती है। इस बीच सूप पीटने के दौरान जगह जगह आतिशबाजी भी हुई। इसमें युवाओं ने बढ़ चढ़कर भागीदारी की। बाद में महिलाओं व पुरुषों ने घर पहुंचकर विशेष पूजा अर्चना की। साथ ही परिवार के सुख व समृद्धि के लिए कामना भी की।
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इस बीच एकादशी पर्व के पर्व के दूसरे दिन भी जिले के बाजार गन्ने, सिंघाड़ा व शकरकंद की दुकानों से गुलजार रहीं। बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने संबंधित बाजारों में पहुंचकर सिंघाड़ा, गन्ना व शकरकंद की खरीदारी की। सिंघाड़ा व शकरकंद विक्रेता रामू सोनकर व पवन मौर्य ने कहा कि पर्व के दिन की तरह ही दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में खरीदारों ने पहुंचकर खरीदारी की। इसी प्रकार की गन्ने की भी खरीदारी लोगों ने बढ़ चढ़कर की।
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उल्लास के साथ प्रबोधिनी एकादशी पर्व को मनाए जाने के बाद गुरुवार भोर में गन्ने से सूप को पीटने की परंपरा निभाई गई। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान घर में आमंत्रित होते हैं और दरिद्रता दूर होती है। इसी परंपरा को पूरी श्रद्धा के साथ निभाई गई। भोर में पहले महिलाओं ने भगवान को आमंत्रित करने व दहिरद्रता दूर करने का उद्घोष करते हुए गन्ने से सूप पीटा।
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घर के कोने कोने में गन्ने से सूप पीटते हुए महिलाएं व युवतियां घर से बाहर निकलीं और इसी प्रकार पीटते हुए गांव के बाहर तक गईं। इसके बाद सूप व गन्न गांव के बाहर फेंक दिया। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से दरिद्रता गांव के बाहर चली जाती है। इस बीच सूप पीटने के दौरान जगह जगह आतिशबाजी भी हुई। इसमें युवाओं ने बढ़ चढ़कर भागीदारी की। बाद में महिलाओं व पुरुषों ने घर पहुंचकर विशेष पूजा अर्चना की। साथ ही परिवार के सुख व समृद्धि के लिए कामना भी की।
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इस बीच एकादशी पर्व के पर्व के दूसरे दिन भी जिले के बाजार गन्ने, सिंघाड़ा व शकरकंद की दुकानों से गुलजार रहीं। बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने संबंधित बाजारों में पहुंचकर सिंघाड़ा, गन्ना व शकरकंद की खरीदारी की। सिंघाड़ा व शकरकंद विक्रेता रामू सोनकर व पवन मौर्य ने कहा कि पर्व के दिन की तरह ही दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में खरीदारों ने पहुंचकर खरीदारी की। इसी प्रकार की गन्ने की भी खरीदारी लोगों ने बढ़ चढ़कर की।