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विभागों में बजट ठिकाने लगाने की होड़

Tue, 29 Mar 2016 11:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर Updated Tue, 29 Mar 2016 11:08 PM IST
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department continued to budget adjustments
अंबेडकरनगर के सीएमओ कार्यालय में वित्तीय वर्ष की समाप्ति को देखते हुए मंगलवार देरसायं तक होता कार्य। - फोटो : अमर उजाला

वित्तीय वर्ष की समाप्ति नजदीक होने के साथ ही धन खर्च करने को लेकर विभिन्न विभागों में हड़बड़ी का माहौल है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मंगलवार को देर शाम तक कार्यालयों में अधिकारी व कर्मचारी अपनी-अपनी कुर्सी पर डटे रहे।

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वर्ष भर योजनाओं का लाभ पात्रों को दिलाने को लेकर लापरवाह बने रहे विभागों में अंतिम समय में धनराशि खर्च करने की हड़बड़ी मची हुई है। कुछ विभाग ऐसे हैं, जो विभिन्न योजनाओं के सुचारु संचालन के लिए उपलब्ध हुए धन का अधिकांश खर्च ही नहीं कर सके तो कुछ विभाग धन खर्च करने में पूरी तरह फिसड्डी हैं।
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ऐसे में अब जबकि वित्तीय वर्ष समाप्त होने में मात्र दो दिन का समय शेष रह गया है तो ऐसे में बाकी रह गए धन को खर्च करने में विभागों में हड़बड़ी मची हुई है। जल्द से जल्द शेष रह गया धन खर्च हो, इसके लिए अधिकारी व कर्मचारी लगातार माथापच्ची कर रहे हैं।
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वर्ष भर योजनाओं को लेकर लापरवाही करने वाले अधिकारी व कर्मचारी अब वित्तीय वर्ष के आखिरी दिनों में शासन से उपलब्ध धन को खर्च करने में लगे हुए हैं। शत-प्रतिशत धन खर्च हो जाए, इसके लिए एक तरफ जहां सोमवार देर शाम तक ज्यादातर  कार्यालय खुले रहे, वहीं मंगलवार को भी देर शाम तक कार्यालयों में काम होता रहा।

सुबह से ही अधिकारी व कर्मचारी धन खर्च करने को लेकर माथापच्ची करते रहे। योजनाओं का पात्रों को समुचित लाभ दिलाने एवं शासन से उपलब्ध धन को समय रहते खर्च करने को लेकर विभागीय अधिकारी कितना गंभीर रहे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अल्पसंख्यक विभाग में कब्रिस्तानों पर बाउंड्रीवाल निर्माण के लिए वर्ष 2014-15 में आई धनराशि दो करोड़ नौ लाख व वर्ष 2015-16 में आई धनराशि दो करोड़ नौ लाख में से अब तक एक ढेला भी खर्च नहीं किया जा सका है।

इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्रामीण स्वास्थ्य स्वच्छता पोषण समिति के खाते में 95 लाख रुपये से अधिक की धनराशि मौजूद है लेकिन अब तक उसे खर्च नहीं किया जा सका है। चतुर्थ राज्यवित्त आयोग के तहत विगत मई माह में 23 करोड़ 40 लाख रुपये की धनराशि जिला पंचायतराज अधिकारी कार्यालय को उपलब्ध हुई थी।

उपभोग प्रमाण पत्र न मिलने एवं विभागीय कर्मचारियों की लापरवाही के चलते 20 मार्च को यह धनराशि संबंधित ग्राम पंचायतों के खाते में स्थानांतरित की जा सकी। स्वच्छ भारत अभियान के तहत इसी विभाग में 10 करोड़ 51 लाख रुपये की 90 प्रतिशत धनराशि ही लोहिया समग्र गांव में भेजी जा सकी है, जबकि 10 प्रतिशत धनराशि अभी भी विभाग के खाते में मौजूद है।


लोहिया आवास योजना के तहत 797 पात्रों को प्रथम किस्त के रूप में एक लाख 37 हजार 500 रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई। शेष एक लाख 37 हजार 500 रुपये प्रति आवास की दर से धनराशि विभाग के खाते में मौजूद है। इसी प्रकार एमडीएम व मनरेगा के तहत भी शासन से प्राप्त धनराशि नहीं खर्च की जा सकी।

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